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WTO में भारत की आठवीं व्यापार नीति समीक्षा जुलाई 2026 में, डिजिटल सुधारों पर रहेगा जोर

जुलाई 2026 में WTO भारत की व्यापार नीतियों की समीक्षा करेगा। भारत ने डिजिटल कस्टम्स और 100% TFA अनुपालन के साथ अपनी तैयारी पूरी की.

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विश्व व्यापार संगठन मुख्यालय (AFP)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 27, 2026 at 11:48 AM IST

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नई दिल्ली: विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भारत की आठवीं व्यापार नीति समीक्षा (Trade Policy Review - TPR) जुलाई 2026 में आयोजित की जाएगी. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस समीक्षा में भारत की राष्ट्रीय व्यापार नीतियों का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा. इस महत्वपूर्ण आयोजन से पहले, भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी व्यापार सुगमीकरण (Trade Facilitation) उपलब्धियों और डिजिटल सीमा शुल्क सुधारों का प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

डिजिटल सुधारों और 'टीएफए प्लस' पर फोकस
हाल ही में जिनेवा में आयोजित विशेष सत्रों में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के सदस्य सुरजित भुजबल के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत के प्रयासों को साझा किया. वित्त मंत्रालय ने बताया कि भारत ने न केवल WTO के व्यापार सुगमीकरण समझौते (TFA) की अपनी 100 प्रतिशत प्रतिबद्धताओं को समय सीमा के भीतर पूरा किया है, बल्कि अब वह 'टीएफए प्लस' उपायों की ओर बढ़ रहा है.

राष्ट्रीय व्यापार सुगमीकरण कार्य योजना (NTFAP 3.0) के तहत, भारत का लक्ष्य न्यूनतम आवश्यकताओं से आगे जाकर वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप अपनी प्रणालियों को ढालना है. भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सीमा शुल्क सुधारों में 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' दृष्टिकोण पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य एक चेहरा रहित, संपर्क रहित और कागज रहित पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है.

वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारत की साख
जिनेवा में आयोजित इन सत्रों में लगभग 40 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जो भारत के अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं में वैश्विक रुचि को दर्शाता है. सुरजित भुजबल ने कहा कि पिछले एक दशक में सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण ने व्यापार वृद्धि और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

भारत का डिजिटल सीमा शुल्क पारिस्थितिकी तंत्र अब व्यापारियों, सीमा शुल्क अधिकारियों, बैंकों और रसद ऑपरेटरों को एक साथ जोड़ता है. इस डिजिटलीकरण से न केवल दस्तावेज़ीकरण की इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसिंग सुनिश्चित हुई है, बल्कि लेन-देन की लागत में कमी और क्लीयरेंस समय में भी तेजी आई है.

भारत की पिछली (सातवीं) समीक्षा जनवरी 2021 में हुई थी. आगामी 2026 की समीक्षा भारत के लिए अपनी पारदर्शी व्यापार नीतियों और सुधारे गए कारोबारी माहौल को दुनिया के सामने पेश करने का एक बड़ा अवसर होगी.

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