गाड़ी मालिकों की बल्ले-बल्ले! अब दूसरे राज्य में 3 साल तक नहीं बदलना होगा नंबर, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
दूसरे राज्यों में तीन साल तक बिना री-रजिस्ट्रेशन-गाड़ी चलाने और छोटे ट्रैफिक चालानों को डिजिटल तरीके से निपटाने के लिए सरकार कानून बदल रही है.

Published : July 7, 2026 at 9:47 AM IST
|Updated : July 7, 2026 at 11:27 AM IST
नई दिल्ली: नौकरी के सिलसिले में एक राज्य से दूसरे राज्य जाने वाले लोगों के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी राहत लेकर आई है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम (मोटर व्हीकल एक्ट) में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है. इस नए बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो ट्रांसफर वाली सरकारी या प्राइवेट नौकरियों में हैं, या फिर कुछ सालों के कॉन्ट्रैक्ट पर दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं.
अब 3 साल तक नहीं बदलना होगा नंबर
मौजूदा कानून (धारा 47) के मुताबिक, अगर आप अपनी गाड़ी को किसी दूसरे राज्य में 1 साल (12 महीने) से ज्यादा रखते हैं, तो आपको वहां का नया रजिस्ट्रेशन नंबर (जैसे DL से MH या HR) लेना पड़ता था. नए प्रस्ताव के तहत अब इस समय सीमा को बढ़ाकर 3 साल करने की तैयारी है.
अधिकारियों का कहना है कि जो लोग 2 या 3 साल के असाइनमेंट पर दूसरे राज्य जाते हैं और वापस अपने गृह राज्य लौट आते हैं, उनके लिए बार-बार गाड़ी का नंबर बदलवाना और फिर पुरानी स्थिति में लाना बहुत बड़ी सिरदर्दी था. इस नियम से लोगों का "ईज ऑफ लिविंग" (जीने की सुगमता) बढ़ेगा. यह नियम उन लोगों के लिए बहुत मददगार होगा जो 'भारत सीरीज' (BH सीरीज) नंबर लेने के हकदार नहीं हैं.
रोड टैक्स को लेकर अभी भी है चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम बहुत अच्छा है, लेकिन यह समस्या का सिर्फ आधा समाधान है. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि भारत के अलग-अलग राज्यों में रोड टैक्स (Road Tax) की दरें अलग-अलग हैं. सही मायने में राहत तब मिलेगी जब सभी राज्यों में रोड टैक्स एक समान कर दिया जाए और 'वाहन पोर्टल' के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य में टैक्स ट्रांसफर करने की ऑनलाइन सुविधा शुरू हो.
कोर्ट जाने की जरूरत नहीं, डिजिटल होगा चालान का फैसलाइस ड्राफ्ट में दूसरा बड़ा बदलाव ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और जुर्माने को लेकर है. सरकार कई छोटे-मोटे ट्रैफिक अपराधों को 'डिक्रिमिनलाइज' (यानी अपराध की श्रेणी से बाहर) करने जा रही है.
अब इन मामलों को कोर्ट भेजने के बजाय राज्यों को एक 'अधिकारी' नियुक्त करना होगा. सभी राज्यों को 6 महीने के भीतर इसके लिए डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तैयार करना होगा. इससे छोटे-मोटे चालान और जुर्माने का निपटारा ऑनलाइन और सरकारी अधिकारियों के स्तर पर ही हो जाएगा, जिससे अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम होगा.
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