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नए नियमों के साथ 'कोल एक्सचेंज' लॉन्च करने को तैयार भारत, 25 साल के लिए मिलेगा लाइसेंस

भारत में 25 वर्षीय लाइसेंस वाले कोल एक्सचेंज नियम,2026 के तहत डिजिटल कोयला व्यापार शुरू होगा, जो पारदर्शी मूल्य निर्धारण और कुशल वितरण सुनिश्चित करेगा.

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सांकेतिक फोटो (getty image)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : June 9, 2026 at 11:11 AM IST

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नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश में 'कोल एक्सचेंज' की स्थापना का रास्ता साफ कर दिया है. यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, कोयला आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक बनाने और एक पारदर्शी, बाजार संचालित व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक सुधार है. कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि हाल ही में लागू किए गए 'खान और खनिज संशोधन अधिनियम, 2025' के तहत देश में 'मिनरल एक्सचेंज' की अवधारणा पेश की गई थी. इसी कानून के तहत सरकार ने इस महीने 'कोल एक्सचेंज नियम, 2026' को अधिसूचित कर दिया है.

CCO को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस बड़े आर्थिक सुधार को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने दिसंबर 2025 में ही 'कोयला नियंत्रक संगठन' (CCO) को नियामक प्राधिकरण के रूप में नामित किया था. CCO के पास ही कोल एक्सचेंजों के पंजीकरण, नियम तय करने और उनके संचालन को विनियमित करने की पूरी जिम्मेदारी होगी. मंत्रालय के अनुसार, पात्र संस्थाओं को CCO द्वारा कोल एक्सचेंज स्थापित करने और संचालित करने की अनुमति दी जाएगी. इन एक्सचेंजों को एक बार में 25 वर्षों की अवधि के लिए पंजीकरण जारी किया जाएगा.

'मेनी-टू-मेनी' ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से बदलेगा बाजार
कोयला मंत्रालय का कहना है कि कोल एक्सचेंज की शुरुआत से कोयला विपणन में एक बड़ा बुनियादी बदलाव आएगा. अब तक देश में कोयले की बिक्री 'वन-टू-मेनी' मॉडल पर आधारित थी, जो अब प्रतिस्पर्धात्मक 'मेनी-टू-मेनी' ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में बदल जाएगी. इससे पारदर्शी और बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण संभव होगा.

व्यापारियों और उद्योगों को सीधा लाभ
इस नए डिजिटल ढांचे से कमर्शियल माइनर्स, कैप्टिव ब्लॉक धारकों और सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) की कोयला कंपनियों को खरीदारों के एक बड़े वैश्विक पूल तक आसान पहुंच मिलेगी. इसके साथ ही बिजली उत्पादकों, सीमेंट और स्टील जैसे बड़े उद्योगों को वास्तविक समय की मांग और आपूर्ति के आधार पर उचित मूल्य पर कोयला मिल सकेगा. यह प्लेटफॉर्म लॉजिस्टिक्स की दक्षता को बढ़ाएगा और आयातित थर्मल कोयले पर भारत की निर्भरता को कम करेगा.

मंत्रालय ने कहा, "कोल एक्सचेंज की यह पहल व्यापार करने में आसानी को बढ़ाने, पारदर्शिता को बढ़ावा देने और एक आधुनिक, आत्मनिर्भर ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है." यह सुधार देश के औद्योगिक विकास को गति देगा और 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा.

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