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परमाणु ऊर्जा में बड़ी छलांग: ऑस्ट्रेलिया देगा भारत को यूरेनियम, पीएम मोदी ने डील पर लगाई मुहर

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु समझौता कर यूरेनियम निर्यात का रास्ता साफ किया,जिससे कड़े सुरक्षा नियमों के तहत भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य मजबूत होंगे.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ के साथ मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में अपनी मीटिंग के बाद एक जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट के दौरान। (ians)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 9, 2026 at 2:14 PM IST

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Updated : July 9, 2026 at 2:32 PM IST

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मेलबर्न: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में लंबे समय से लंबित प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है. इस नए समझौते के बाद अब ऑस्ट्रेलिया से भारत को नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम निर्यात करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.

मेलबर्न में आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बड़ी उपलब्धि की घोषणा की. पीएम मोदी ने कहा, "आज हमने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता किया है. यह समझौता ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त करेगा और हमारे स्वच्छ ऊर्जा के संकल्पों को एक नई ताकत देगा."

केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होगा उपयोग
दोनों देशों द्वारा जारी साझा बयान के अनुसार, यह यूरेनियम आपूर्ति साल 2015 में हस्ताक्षरित 'भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग समझौते' के तहत की जाएगी. इसके तहत मिलने वाले यूरेनियम का उपयोग विशेष रूप से केवल शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा. साथ ही, सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह पूरी प्रक्रिया अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सख्त सुरक्षा मानकों और निगरानी के दायरे में रहेगी.

ऊर्जा सुरक्षा और लचीली सप्लाई चेन पर जोर
इस अवसर पर दोनों देशों ने 'ऊर्जा सुरक्षा पर एक संयुक्त बयान' भी जारी किया. इसमें ऊर्जा व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई. दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के मौजूदा हालातों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसके नकारात्मक असर को लेकर चिंता जताई. भारत और ऑस्ट्रेलिया ने वैश्विक कमोडिटी कीमतों को स्थिर रखने के लिए नियम-आधारित व्यापार और खुले बाजारों का पुरजोर समर्थन किया.

द्विपक्षीय व्यापार को मिलेगी नई गति
ऑस्ट्रेलिया जहां भारत को लिक्विड नेचुरल गैस और कोयले का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, वहीं भारत भी ऑस्ट्रेलिया को लिक्विड फ्यूल और डाउनस्ट्रीम पेट्रोलियम उत्पादों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति करता है. नए समझौते के तहत दोनों देशों ने आपसी निवेश को बढ़ाने और ऊर्जा के इस प्रवाह को निर्बाध बनाए रखने का संकल्प लिया है. ऑस्ट्रेलिया ने वैश्विक ऊर्जा बदलाव को गति देने के लिए भारत की 'ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस' पहल की भी सराहना की.

पीएम मोदी ने दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दो मजबूत लोकतंत्र और महत्वपूर्ण समुद्री शक्तियां हैं, जिनका साझा दृष्टिकोण और आपसी विश्वास दोनों अर्थव्यवस्थाओं को एक उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जा रहा है.

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Last Updated : July 9, 2026 at 2:32 PM IST