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वित्त वर्ष 2026-27 के वृद्धि दर अनुमान को बढ़ाकर 7.0-7.4 प्रतिशत किया गयाः सीईए नागेश्वरन

अर्थव्यवस्था के सात प्रतिशत के बजाय 7.4 प्रतिशत के करीब रहने की अधिक संभावना है.

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मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन (PTI)
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By PTI

Published : February 27, 2026 at 8:48 PM IST

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नई दिल्ली : मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 0.20 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.0-7.4 प्रतिशत कर दिया गया है और इस दौरान देश की अर्थव्यवस्था का आकार आसानी से 4,000 अरब डॉलर के पार पहुंच जाएगा.

जनवरी में संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में अगले वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर 6.8-7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था. नागेश्वरन ने राष्ट्रीय आय की नई शृंखला जारी किए जाने के मौके पर संवाददाताओं से कहा, "नई शृंखला के आधार पर हम वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को पहले के 6.8-7.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.0-7.4 प्रतिशत कर रहे हैं.... हालांकि अर्थव्यवस्था के सात प्रतिशत के बजाय 7.4 प्रतिशत के करीब रहने की अधिक संभावना है."

इसके साथ ही सीईए ने कहा कि मौजूदा संकेतकों के आधार पर मौजूदा कीमतों पर जीडीपी की वृद्धि दर 2026-27 में करीब 11 प्रतिशत रह सकती है जबकि अर्थव्यवस्था का आकार आसानी से 4,000 अरब डॉलर के पार चला जाएगा.

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था व्यापक आधार वाली गतिविधियों के समर्थन से मजबूत वृद्धि की रफ्तार बनाए हुए है. नई राष्ट्रीय आय शृंखला के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष (2025-26) में जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.1 प्रतिशत से अधिक है.

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने 2022-23 को आधार वर्ष बनाते हुए राष्ट्रीय आय की नई श्रृंखला जारी की है जिसने 2011-12 आधार वर्ष वाली पुरानी शृंखला का स्थान लिया है।

दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में वृद्धि दर क्रमशः 6.7, 8.4 और 7.8 प्रतिशत रही. नागेश्वरन ने चालू वित्त वर्ष की चौथी एवं अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत या उससे अधिक रहने का अनुमान भी जताया.

उन्होंने कहा कि अनुकूल रबी बुवाई, पर्याप्त खाद्यान्न भंडार और वैश्विक जिंस कीमतों में नरमी से महंगाई कम एवं नियंत्रण में रहने की संभावना है.

नागेश्वरन ने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ जैसे संभावित व्यापार समझौते निर्यात और पूंजी प्रवाह को समर्थन देंगे। पिछले तीन वर्षों में प्रति व्यक्ति आय वास्तविक रूप से 6.3-6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी है.

उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद भारत ने लगातार सात प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज कर कई अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन किया है. आधार वर्ष संशोधन के बाद 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.5 प्रतिशत आंका गया है, जबकि बजट में इसे 4.4 प्रतिशत बताया गया था.

इस मौके पर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय में सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि आधार वर्ष बदलने का मुख्य कारण जीएसटी एवं वाहन बिक्री जैसे नए आंकड़ें स्रोतों को शामिल करना और अर्थव्यवस्था में पिछले दशक में आए संरचनात्मक बदलावों को बेहतर तरीके से दर्शाना है.

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