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सोना-चांदी हुआ सुपर महंगा, सोना ₹1.52 लाख के पार और चांदी ₹3.28 लाख के रिकॉर्ड स्तर पर

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में सोना और चांदी ने अभूतपूर्व तेजी दर्ज करते हुए नया इतिहास रच दिया है.

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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 20, 2026 at 4:57 PM IST

3 Min Read
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सौरभ शुक्ला
नई दिल्ली: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी ने एक बार फिर नया इतिहास रच दिया है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना मंगलवार को दोपहर करीब 2:30 बजे ₹1,52,260 प्रति 10 ग्राम के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया. वहीं चांदी ने भी रिकॉर्ड बनाते हुए ₹3,27,998 प्रति किलोग्राम का स्तर छू लिया.

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. वैश्विक बाजार में सोना $4,728 प्रति औंस के नए उच्चतम स्तर पर पहुंचा, जबकि चांदी $95.49 प्रति औंस तक चढ़ गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है.

वैश्विक अनिश्चितता बनी तेजी की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार सोना-चांदी में यह तेजी भूराजनीतिक तनाव, ट्रेड वॉर की आशंका, और मुद्रा बाजारों में अस्थिरता के कारण देखने को मिल रही है. निवेशक जोखिम भरे माहौल में सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर सोने और चांदी की ओर रुख कर रहे हैं.

₹2 लाख के पार जा सकता है सोना: रोकड़े
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सोने की कीमतें आगे और बढ़ सकती हैं. उन्होंने अनुमान जताया कि इस साल सोना ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम को पार कर सकता है, जबकि अगले तीन वर्षों में यह ₹3 लाख तक भी पहुंच सकता है. हालांकि उन्होंने निवेशकों को 10–15 प्रतिशत तक के संभावित करेक्शन को ध्यान में रखने की सलाह भी दी.

चांदी में ज्यादा तेजी की संभावना
कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि चांदी में औद्योगिक मांग बढ़ने के कारण इसमें सोने से ज्यादा तेजी की संभावना है. उनके मुताबिक चांदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर $100 प्रति औंस और घरेलू बाजार में ₹3.50 लाख प्रति किलो तक जा सकती है, जबकि सोना जल्द ही ₹1.65 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर देख सकता है.

कमजोर रुपया भी बना सहारा
वेंटुरा के हेड ऑफ कमोडिटी एन.एस. रामास्वामी ने बताया कि वैश्विक तनाव के साथ-साथ भारतीय रुपये में कमजोरी भी घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों को और ऊपर ले जा रही है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 की शुरुआत से ही रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर घरेलू बाजार में दोगुना दिख रहा है.

निवेशकों की नजर आगे की चाल पर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में कीमती धातुएं मजबूत बनी रह सकती हैं, हालांकि ऊंचे स्तरों पर उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. निवेशक अब वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम और मुद्रा बाजार की दिशा पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.

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