ईपीएफओ ने कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर को 8.25 प्रतिशत बरकरार रखा
सरकार ने इस बार भी ईपीएफओ ब्याज दर में कोई इजाफा नहीं किया. पढ़ें पूरी खबर.

Published : March 2, 2026 at 4:21 PM IST
|Updated : March 2, 2026 at 5:01 PM IST
नई दिल्ली : होली से पहले केंद्र सरकार के संगठन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने सोमवार को कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर 2025-26 के लिए ब्याज दर 8.25 प्रतिशत निर्धारित की. यह लगातार दूसरा वर्ष है जब ब्याज दर को अपरिवर्तित रखा गया है.
पिछले वर्ष फरवरी में, ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को बरकरार रखा था. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने 2024 में ब्याज दर को मामूली रूप से बढ़ाकर 2023-24 के लिए 8.25 प्रतिशत कर दिया था, जो 2022-23 में 8.15 प्रतिशत थी.
ईपीएफओ ने मार्च, 2022 में अपने सात करोड़ से अधिक अंशधारकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद जमा पर ब्याज दर को 2021-22 के लिए घटाकर चार दशक से अधिक के न्यूनतम स्तर 8.10 प्रतिशत कर दिया था, जो 2020-21 में 8.5 प्रतिशत थी.
वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 8.10 प्रतिशत की दर 1977-78 के बाद सबसे कम थी. उस समय यह दर 8.0 प्रतिशत थी.
सूत्रों ने बताया, "ईपीएफओ के निर्णय लेने वाले सर्वोच्च निकाय केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने सोमवार को अपनी बैठक में 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) पर 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर देने का निर्णय किया है."
सीबीटी के निर्णय के बाद, 2025-26 के लिए ईपीएफ जमा पर ब्याज दर को वित्त मंत्रालय की सहमति के लिए भेजा जाएगा। सरकार की मंजूरी के बाद, 2025-26 का ब्याज ईपीएफओ के सात करोड़ से अधिक ग्राहकों के खातों में जमा कर दी जाएगी. ईपीएफओ वित्त मंत्रालय के माध्यम से सरकार की मंजूरी के बाद ब्याज दर प्रदान करता है.
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने 2019-20 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर को 2018-19 के लिए निर्धारित 8.65 प्रतिशत से घटाकर सात वर्षों में सबसे कम 8.5 प्रतिशत कर दिया था.
ईपीएफओ ने 2016-17 में अपने ग्राहकों को 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत ब्याज दर प्रदान की थी। 2015-16 में ब्याज दर थोड़ी अधिक यानी 8.8 प्रतिशत थी।
वहीं वित्त वर्ष 2013-14 और 2014-15 दोनों वर्षों में 8.75 प्रतिशत की ब्याज दर दी, जो 2012-13 की 8.5 प्रतिशत दर से अधिक थी। 2011-12 में ब्याज दर 8.25 प्रतिशत थी।
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