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धनतेरस पर ₹1 लाख करोड़ से अधिक के कारोबार की उम्मीद, देसी उत्पादों की ओर लोगों का झुकाव बढ़ा

धनतेरस पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार संभावित, सोना-चांदी की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर, स्वदेशी उत्पादों की मांग में भारी वृद्धि.

IANS
सांकेतिक फोटो (IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : October 18, 2025 at 2:04 PM IST

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नई दिल्ली: इस बार देशभर में धनतेरस के अवसर पर खरीदारी का सिलसिला जबरदस्त है, और अब तक कुल कारोबार का आंकड़ा Rs 1 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है. यह पिछली कई वर्षों में सबसे मजबूत त्योहारों में से एक माना जा रहा है. खासतौर पर सोना-चांदी की बिक्री ने Rs 60,000 करोड़ से अधिक का कारोबार दर्ज किया. दिल्ली के बाजारों में भी Rs 10,000 करोड़ से ज्यादा की बिक्री हुई, जिसमें देशी उत्पादों की मांग में वृद्धि देखी गई.

धनतेरस कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की तेरहवीं तिथि को मनाया जाता है. इस दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खरीदते हैं. माना जाता है कि धनतेरस पर खरीदा गया हर सामान अपनी कीमत तेरह गुना बढ़ा देता है.

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महासचिव और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि धनतेरस का त्योहार भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश लेकर प्रकट होने का प्रतीक है, जो स्वास्थ्य और समृद्धि का संदेश देता है. उन्होंने कहा, "देशभर में सोना, चांदी और अन्य धनतेरस संबंधित वस्तुओं का कुल कारोबार Rs 1 लाख करोड़ के आसपास है."

सीएआईटी और ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ्स फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि सोना और चांदी के गहनों, सिक्कों, और संबंधित वस्तुओं का कारोबार इस बार देशव्यापी Rs 60,000 करोड़ से अधिक रहा. दिल्ली में कारोबार में पिछले साल के मुकाबले 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

पिछले साल दिवाली पर सोने के दाम 10 ग्राम के लगभग Rs 80,000 थे, जबकि इस बार कीमतें बढ़कर Rs 1,30,000 के पार पहुंच गई हैं, जो लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि है. चांदी की कीमतें भी Rs 98,000 प्रति किलोग्राम से बढ़कर Rs 1,80,000 से ऊपर पहुंच गई हैं, जो 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.

महंगे दामों के बावजूद निवेशक सोना और चांदी को सुरक्षित निवेश मानकर खरीदारी कर रहे हैं, वहीं आम ग्राहक हल्के गहने लेना पसंद कर रहे हैं. खंडेलवाल ने यह भी बताया कि तांबा, चांदी, या स्टील के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है, साथ ही वास्तु शास्त्र के अनुसार धनतेरस पर झाड़ू खरीदना गरीबी दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा लाने का संकेत है.

आज के दौर में लोग मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान भी समृद्धि के प्रतीक के रूप में खरीद रहे हैं. इस साल धनतेरस पर सोना-चांदी, रसोई के सामान और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का कारोबार कुल मिलाकर Rs 15,000 करोड़ रहा, जबकि इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रिकल सामानों में Rs 10,000 करोड़ का व्यापार हुआ. सजावट, दीपक और पूजा सामग्री में Rs 3,000 करोड़ का कारोबार दर्ज हुआ. इसके अलावा, मेवे, मिठाई, वस्त्र और वाहन की बिक्री Rs 12,000 करोड़ के आसपास रही.

खंडेलवाल ने जीएसटी दरों में कमी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को इस मजबूत कारोबार का कारण बताया. लोगों में देशी उत्पादों को खरीदने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे छोटे व्यापारी और उत्पादक लाभान्वित हुए हैं.

उन्होंने कहा, "इस त्योहार के मौसम में न केवल मॉल्स में, बल्कि स्थानीय बाजारों, बुलियन मार्केट्स, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स के बाजारों में भी अपार उत्साह देखा गया. धनतेरस और दिवाली अब केवल विश्वास और समृद्धि के त्योहार नहीं रह गए हैं, बल्कि वे आर्थिक उत्साह और स्वदेशी भावना के प्रतीक बन गए हैं, जो भारत की खुदरा अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे रहे हैं."

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