कच्चे तेल की कीमतों में पिछले छह साल में सबसे बड़ी गिरावट, 18 फीसदी तक कम हुए दाम
अमेरिका-ईरान युद्धविराम से कच्चे तेल का भाव टूटा. भारत को मिली बड़ी राहत. महंगाई पर हो सकेगा नियंत्रण. पढ़ें पूरी खबर.

Published : April 8, 2026 at 6:38 PM IST
नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा कर दी गई है. इस घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. आज के कारोबार के दौरान यह 19.26 डॉलर या 17.62 प्रतिशत कम होकर 90.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था. हालांकि, बाद में भाव 94.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छह साल में यह एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट है. मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत 109.27 डॉलर प्रति बैरल थी. ईरान और अमेरिका के बीच जिस दिन युद्ध की शुरुआत हुई थी, उस दिन तेल की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल थी.
युद्ध के बाद से प्रत्येक दिन इसकी कीमतें बढ़ती गईं. एक समय कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने संकेत दिया है कि सीजफायर की अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन की अनुमति दी जाएगी, जिससे आपूर्ति बाधित होने की चिंताएं कम हो गई हैं.
वेस्टेड फाइनेंस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विराम शाह ने कहा, "कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर से नीचे आने के बावजूद, परिष्कृत ईंधन आपूर्ति श्रृंखलाओं और शिपिंग के प्रति भरोसे को सामान्य होने में कई हफ्ते या शायद कई महीने भी लग सकते हैं."
एक्सपर्ट मानते हैं कि तेल की कीमतों में फिर से उछाल तभी आएगा, जब सीजफायर पर संकट आएगा. अगर सीजफायर को लेकर नकारात्मक खबरें आती हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल आएगा और फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे अधिक कीमत हो सकती है.
कच्चे तेल की कीमतों का गिरना, भारत के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करते हैं. ऐसे में महंगे तेल की वजह से न सिर्फ हमें अधिक से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करना पड़ता है, बल्कि आयात बिल भी लगातार बढ़ता जाता है. जबकि कच्चे तेल का बिल घटने से डॉलर की मांग कम होती है और रुपया मजबूत होता है.
BREAKING 🚨: Crude Oil
— Barchart (@Barchart) April 8, 2026
Timberrrrrrrrrrrrr 📉📉 pic.twitter.com/jHG9qJKZ07
कच्चे तेल के भाव गिरने से आम लोगों को राहत
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद की जा सकती है.
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत घट जाएगी.
- एयरलाइंस कंपनियों को फायदा.
- महंगाई पर नियंत्रण संभव.
बुधवार को कच्चे तेल के वायदा भाव में भी भारी गिरावट आई और यह 18 प्रतिशत लुढ़ककर 8,775 रुपये प्रति बैरल पर आ गया. होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है. यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब पांचवें हिस्से के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल में आपूर्ति वाले कच्चे तेल के अनुबंध का वायदा भाव छह प्रतिशत टूटकर 10,029 रुपये प्रति बैरल पर खुला था. बाद में यह और लुढ़कता हुआ 1,894 रुपये या 17.75 प्रतिशत फिसलकर 8,775 रुपये प्रति बैरल पर आ गया.
यह मंगलवार को करीब चार प्रतिशत की वृद्धि के साथ 10,990 रुपये प्रति बैरल के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था.
इसी तरह मई में आपूर्ति वाला अनुबंध भी 1,413 रुपये या 15 प्रतिशत फिसलकर 8,012 रुपये प्रति बैरल के निचले सर्किट स्तर पर पहुंच गया. तनाव कम होने से आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं घटने के बीच बाजार में तेज बिकवाली देखी गई.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में मई में आपूर्ति वाला वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल 16.28 डॉलर या 14.41 प्रतिशत फिसलकर 96.67 डॉलर प्रति बैरल रह गया. कारोबार के दौरान यह 21.9 डॉलर या 19.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ एनवाईमेक्स पर 91.05 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर पहुंच गया.
वहीं जून में आपूर्ति वाले ब्रेंट क्रूड के अनुबंध की कीमत 14.31 डॉलर या 13.10 प्रतिशत टूटकर 94.96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई.
कारोबार के दौरान यह 19.26 डॉलर या 17.62 प्रतिशत कम होकर 90.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया.
विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद भू-राजनीतिक जोखिम घटने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद वह ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को स्थगित करेंगे. इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना भी शामिल है.
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