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'क्या फिर से चीनी कंपनियां भारत आ रही हैं, क्या उन पर प्रतिबंध हट गया है ?'

गलवान हिंसा के बाद पहली बार चीनी कंपनियों को भारत आने की अनुमति दी जा रही है, ऐसा कांग्रेस ने दावा किया है.

Modi, Xi Jiping
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) (X-Account, PM Modi)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 9, 2026 at 6:01 PM IST

6 Min Read
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नई दिल्ली : कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों को खत्म करने वाली है. पांच साल पहले गलवान हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने चीन की कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया था. देश की सुरक्षा का हवाला देकर सरकार ने ये निर्णय लिया था.

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार अपने ही फैसले को फिर से पलटने की तैयारी कर रही है, ताकि चीनी कंपनियां भारतीय सरकारी ठेकों में भागीदारी कर सकें. विपक्षी दलों ने कहा कि सरकार का यह कदम चीनी आक्रामकता के सामने एक "सोची समझी आत्मसमर्पण नीति" जैसा है. पार्टी ने कहा है कि यदि सरकार इस बारे में कोई निर्णय ले रही है, तो आगामी बजट सत्र में उसे इसका कारण बताना चाहिए. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पूछा है कि इस यू टर्न की क्या वजह है, सरकार को बताना चाहिए. वैसे, सरकार ने अभी तक इसे स्वीकार नहीं किया है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट डालते हुए कहा, "मैं देश नहीं झुकने दूंगा. आज जो हो रहा है, वह बिल्कुल उसका उल्टा है. दो ताजा उदाहरण- पांच साल से लगा चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध हटाया जा रहा है. गलवान में भारतीय वीर सैनिकों ने जो आहुति दी, उनके बलिदान का अपमान तो मोदी जी ने चीन को क्लीन चिट थमाकर किया था."

मोदी सरकार पर बरसते हुए खड़गे ने कहा, "अब चीनी कंपनियों के लिए लाल कारपेट बिछाकर, वह ये दिखा रहे हैं कि उनकी लाल आंखों में चीनी लाल रंग कितना गहरा है." उन्होंने कहा कि अमेरिका कच्चे तेल को लेकर भारत पर हमले कर रहा है, रोज रूसी तेल निर्यात पर कमेंट कर रहा है, लेकिन मोदी ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है, और वे अपनी नजरें चुरा रहे हैं.

ट्रंप के उस बयान का भी खड़गे ने जिक्र किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मोदी ने उन्हें "सर" कहकर उनसे मिलने की इच्छा जताई थी. खड़गे ने कहा कि सर वाली बात पर मोदी सरकार सरेंडर करती हुई दिख रही है, वे भारत की विदेश नीति का सम्मान नहीं कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रहित से बड़ा कुछ नहीं होता है. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार ने भारत की पारंपरिक गुटनिरपेक्षता को त्याग दिया है, और वह रणनीतिक स्वायत्तता वाली विदेश नीति को भी छोड़ चुकी है. उन्होंने कहा, "मोदी सरकार की विदेश नीति एक ‘वाइल्ड पेंडुलम’ की तरह कभी इधर, कभी उधर झूलती है और इसका खामियाजा भारत की जनता भुगत रही है."

रक्षा विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि अगर यह सत्य है, तो बहुत ही चिंता की बात है. उन्होंने लिखा, "अगर यह सच है, तो यह भारत के लिए एक और पीछे हटने वाली बात होगी. भारत अब चीन की शर्तों पर संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा है. भारत ने अपनी उस पुरानी मांग को चुपचाप छोड़ दिया है, जिसमें उसने लद्दाख में 2020 से पहले वाली स्थिति बहाल करने की शर्त रखी थी. अब भारत का रुख 'पुरानी स्थिति' से बदलकर सिर्फ 'सीमा पर शांति और स्थिरता' बनाए रखने तक सीमित हो गया है."

मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत का वित्त मंत्रालय सरकारी ठेकों में चीनी कंपनियों को भी आमंत्रित करने जा रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान को पूर्ण सैन्य समर्थन (और खुले तौर पर मोर्चा संभालने) देने के आठ महीने बाद और जब सेना के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह चीन को भारत के “दुश्मनों” में से एक बता चुके हैं- अब मोदी सरकार चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव रख रही है, ताकि वे भारतीय सरकारी ठेकों के लिए बोली लगा सकें."

उन्होंने कहा कि यह कदम भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में चीनी कंपनियों को निवेश की अनुमति देने, चीनी कामगारों को उदारतापूर्वक वीजा प्रदान करने संबंधी पूर्व के निर्णयों के बाद ऐसे समय में उठाया गया है, जब चीन के साथ भारत का रिकॉर्ड व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है.

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सरकार जो भी फैसले रही है, वह नीति आयोग की अनुशंसा के हिसाब से ले रही है. उन्होंने कहा कि यह कदम चीनी आक्रामकता के सामने एक सोची-समझी आत्मसमर्पण नीति से कम नहीं है, जो प्रधानमंत्री की अपनी कमजोरी से उपजी है-जिसका सबसे शर्मनाक उदाहरण 19 जून 2020 को चीन को सार्वजनिक रूप से दी गई उनकी “क्लीन चिट” है.’

कांग्रेस ने कहा कि क्या सरकार भूल गई है कि चीनी सैनिकों ने भारतीय गश्ती दलों को रोक दिया था. क्या सरकार को यह पता नहीं है कि चीन अरुणाचलप्रदेश में लगातार हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा है, क्या उन्हें यह पता नहीं है कि चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर मेडोग बांध बना रहा है. रमेश ने कहा कि क्या सरकार यह भूल गई है कि इसी चीन ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का साथ दिया था.

पर, सबसे अहम सवाल यह है कि अचानक ही सरकार ऐसा निर्णय क्यों ले रही है. वैसे, सरकार ने औपचारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर विशेषज्ञ मानते हैं कि बहुत सारे प्रोजेक्ट्स में होने वाली देरी और सामान की किल्लत एक वजह हो सकती है. आर्थिक मामलों के जानकार बताते हैं कि बिजली क्षेत्र में भारत को उपकरणों की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है और ऐसा हुआ तो भारत को अगले 10 सालों तक इस कमी से जूझना पड़ेगा. इकोनोमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की कमेटी ने भी ऐसी ही सिफारिश की है.

बताया जा रहा है कि मोदी सरकार किसी भी तरीके से बड़े-बड़े प्रोजोक्ट्स को समय पर पूरा करना चाहती है, इसलिए बहुत संभव है सरकार ने ऐसा फैसला लिया हो. एक वजह यह भी है कि अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगा रखा है, लिहाजा उसके पास चीन के साथ डील करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. ट्रंप की इन्हीं फैसलों की वजह से प्रधानमंत्री मोदी करीब सात साल के अंतराल के बाद चीन गए थे.

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