अमेरिका में दोतरफा घिरे गौतम अडाणी, US SEC के बाद अब 'ईरानी गैस' केस ने उड़ाई नींद; शेयर धड़ाम
SEC मामले के बाद अब ईरानी LPG आयात विवाद और अमेरिकी एजेंसी OFAC की पूछताछ से अडाणी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई.

Published : February 10, 2026 at 2:37 PM IST
नई दिल्ली: भारतीय उद्योग जगत के दिग्गज गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी ग्रुप ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ईरान से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस के सभी आयात को पूरी तरह से बंद कर दिया है. समूह की प्रमुख कंपनी, अडानी एंटरप्राइजेज ने सोमवार, 10 फरवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि वह अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय द्वारा की जा रही एक सिविल जांच में पूर्ण सहयोग दे रही है.
जांच का मुख्य कारण
यह जांच मुख्य रूप से उन लेन-देन पर केंद्रित है जो जून 2023 से अब तक अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के माध्यम से किए गए थे. अमेरिकी अधिकारियों को संदेह है कि इन सौदों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं की भागीदारी हो सकती है. अमेरिकी प्रतिबंधों के अनुसार, ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों को वैश्विक वित्तीय प्रणालियों में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है.
अडानी ग्रुप का रुख
अडानी ग्रुप ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि उन्होंने एहतियात के तौर पर 2 जून, 2025 से ही ईरान से होने वाले सभी LPG आयात को रोक दिया था. कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसने पिछले साल जून में 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' में प्रकाशित कुछ आरोपों के बाद खुद ही OFAC के साथ बातचीत शुरू की थी. समूह के अनुसार, 4 फरवरी 2026 को उन्हें औपचारिक रूप से सूचना का अनुरोध (RFI) प्राप्त हुआ, जिसका वे सक्रियता से जवाब दे रहे हैं.
वित्तीय प्रभाव और बाजार की प्रतिक्रिया
कंपनी ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि इस आयात बंदी का उनके समग्र व्यवसाय पर बहुत मामूली प्रभाव पड़ेगा. आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में अडानी एंटरप्राइजेज के कुल राजस्व में LPG का हिस्सा केवल 1.46% था, जबकि पूरे समूह के कुल राजस्व में यह मात्र 0.5% था. हालांकि, इस खबर के सामने आते ही भारतीय शेयर बाजारों में Adani Enterprises के शेयरों में करीब 3.5% की गिरावट दर्ज की गई.
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भविष्य की रणनीति
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अडानी समूह का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के प्रति अपनी संवेदनशीलता और पारदर्शिता को दर्शाता है. वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए समूह अब वैकल्पिक देशों से ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों को तलाशने पर जोर दे रहा है. कंपनी के इस कदम को जोखिम प्रबंधन की एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी या वित्तीय बाधाओं से बचा जा सके.
समूह ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने सभी वैश्विक परिचालनों में उच्चतम कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है. फिलहाल, सभी की निगाहें अमेरिकी जांच के परिणामों और अडानी समूह द्वारा दिए जाने वाले जवाबों पर टिकी हैं. ऊर्जा क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए समूह अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर अपनी आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक लचीला बनाने की दिशा में काम कर रहा है. ब्लूमबर्ग इनपुट के साथ
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