ETV Bharat / bharat

परिवार संग होली मना सकेगा विकास यादव, सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी को दी सात दिन की फरलो

नीतीश कटारा हत्याकांड मामले जेल की सजा काट रहे विकास यादव को अदालत ने होली के लिए सात मार्च तक 'फरलो' दी.

Supreme Court on convict Vikas Yadav to Nitish Katara family
सुप्रीम कोर्ट (ANI)
author img

By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 27, 2026 at 7:40 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा हत्या मामले में 25 साल की जेल की सजा काट रहे विकास यादव की उस याचिका को शुक्रवार को स्वीकार कर लिया, जिसमें उसने 'फरलो' पर जेल से रिहा करने का अनुरोध किया है.

जस्टिस एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की बेंच ने इस बात पर गौर किया कि विकास 23 साल जेल में बिता चुका है और होली पर उसे अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए 7 मार्च तक के लिए 'फरलो' प्रदान की.

‘फरलो’ से तात्पर्य जेल से अस्थायी रिहाई है, न कि पूरी सजा का निलंबन या माफी. यह आमतौर पर, लंबी अवधि की जेल की सजा काट रहे उन कैदियों को दी जाती है, जिन्होंने अपनी सजा का एक हिस्सा कारागार में बिता लिया है.

बेंच ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता ने होली के दौरान (परिवार के साथ) समय बिताने की इच्छा जाहिर करते हुए ‘फरलो’ का अनुरोध किया है. मामले के गुण-दोष पर विचार किये बिना, हम याचिकाकर्ता को 7 मार्च तक 'फरलो' पर रिहा करने की अनुमति देते हैं."

सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने ‘फरलो’ दिए जाने के खिलाफ शिकायतकर्ता के वकील द्वारा जताई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया. बेंच ने कहा, "क्या आप उसे फांसी देना चाहते हैं.. क्या ऐसा ही है. इस मामले में आपकी बात सुनने का क्या मतलब है. 23 साल बाद भी आप पुरानी घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करना नहीं छोड़ना चाहते...."

न्यायमूर्ति सुंदरेश ने मौखिक टिप्पणी की कि इस तरह की राहत देने से कभी-कभी दोषी के सुधार में मदद मिल सकती है. दिल्ली हाई कोर्ट ने 11 फरवरी को विकास यादव की 21 दिनों के लिए ‘फरलो’ पर रिहाई के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी थी.

याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि उसे 'गंभीर अपराधों' के मामले में दोषी करार दिया गया है और दिल्ली कारागार नियम (डीपीआर), 2018 के तहत वह 'फरलो' की राहत के लिए 'कानूनी रूप से अपात्र' है.

सुप्रीम कोर्ट ने 3 अक्टूबर 2016 को, कटारा के अपहरण व हत्या के मामले में विकास यादव और विशाल यादव को बिना किसी छूट के 25 साल की जेल की सजा सुनाई थी. वहीं, मामले में दोषी करार दिये गए एक और व्यक्ति सुखदेव यादव को 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. यह घटना 16 और 17 फरवरी 2002 की दरमियानी रात हुई थी.

ये भी पढ़ें: नीतीश कटारा हत्याकांड: शादी के लिए विकास यादव को नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत, जानें वजह