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साल 2025: दफन होने की कगार पर पहुंचा देश में नक्सलवाद

केंद्र की लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म के खिलाफ मुहिम के तहत साल 2025 में देशभर में नक्सल प्रभावित इलाकों को कम करने में काफी प्रगति हुई.

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17 अक्टूबर, 2025 को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में माओवादी संगठन के एक सेंट्रल कमेटी मेंबर समेत 2011 माओवादियों ने पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के सामने सरेंडर किया. (ANI (File))
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : December 22, 2025 at 4:13 PM IST

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हैदराबाद (तेलंगाना): साल 2025 में भारत ने देश से नक्सलवाद को खत्म करने में काफी कामयाबी हासिल की. मोदी सरकार ने नक्सलवाद खत्म करने के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन तय कर रखी है.

गौर करें तो पूरे साल, सिक्योरिटी फोर्स ने कई ऑपरेशन किए. इसमें कई टॉप और बागी नक्सल कमांडर मारे गए. सरकार के इस एक्शन से लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म (LWE) को करारा झटका लगा है.

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तेलंगाना पुलिस ने 19 दिसंबर, 2025 को हैदराबाद में पुलिस के सामने सरेंडर करने के बाद CPI (माओवादी) के 41 अंडरग्राउंड कैडर के 24 हथियार बरामद किए. (ANI (File))

ग्राउंड जीरो पर लगातार एंटी-नक्सल ऑपरेशन से पीछे धकेले जाने पर, बड़ी संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया. इसके साथ ही अपने पिछले कामों की गलती को समझते हुए, मेनस्ट्रीम में शामिल हो गए.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2025 में कई मौकों पर दोहराया कि मार्च 2026 से पहले भारत से नक्सलवाद खत्म कर दिया जाएगा. होम मिनिस्टर शाह ने संसद में भी इसका एलान किया.

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2 अक्टूबर, 2025 को छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 103 माओवादियों ने अधिकारियों के सामने सरेंडर किया. (ANI (File))

बता दें कि साल 2025 में, सरेंडर और गिरफ्तारियों की संख्या, मारे गए लोगों की संख्या से ज़्यादा हो गई. सरेंडर की ज़्यादा संख्या यह दिखाती है कि नक्सलियों के पास अब बहुत कम समय बचा है. अक्टूबर 2025 में, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में 258 नक्सलियों ने सरेंडर किया. यहा आंकड़ा नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक मील का पत्थर था.

अक्टूबर 2025 के दूसरे हफ़्ते में छत्तीसगढ़ में 170 नक्सलियों ने सरेंडर किया. उसी हफ़्ते, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में क्रमशः 27 और 61 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए. ये सरेंडर LWE (Left Wing Extremism) से निपटने में सुरक्षा बलों की हिम्मत को दिखाते हैं.

2025 में ही कभी आतंक के गढ़ रहे छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और उत्तरी बस्तर नक्सल आतंक से मुक्त घोषित किए गए.

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इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) ने 24 मार्च, 2025 को नारायणपुर के अबूझमाड़ इलाके में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए बेडमाकोटी में एक नया कैंप बनाया. (ANI (File))

जनवरी 2024 से, जब छत्तीसगढ़ में BJP की सरकार बनी है, तब से इस राज्य में 2100 नक्सलियों ने सरेंडर किया है. इसके साथ ही 1785 को गिरफ्तार किया गया है. वहीं 477 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए.

बात पहले की करते हैं. साल 2013 में, अलग-अलग राज्यों के 126 जिलों में नक्सल से जुड़ी हिंसा की खबरें आईं थी. वहीं दिसंबर 2025 तक, छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से सबसे ज़्यादा प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 3 हो गई है. अब, छत्तीसगढ़ में सिर्फ़ बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर ही लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म (LWE) से सबसे ज़्यादा प्रभावित जिले हैं.

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23 जून, 2025 को नक्सल प्रभावित इलाकों के युवाओं के साथ एक ग्रुप में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा. (ANI (File))

LWE से प्रभावित जिलों की कैटेगरी में, यह संख्या भी 18 से घटकर सिर्फ़ 11 हो गई है. अब, भारत में सिर्फ 11 जिले लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म से प्रभावित हैं.

गृह मंत्रालय के अनुसार, 15 अक्टूबर तक, ऑपरेशनल सफलताओं ने 2025 में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिसमें 312 LWE कैडर मारे गए, जिनमें CPI (माओवादी) के जनरल सेक्रेटरी और 08 अन्य पोलित ब्यूरो/सेंट्रल कमेटी के सदस्य शामिल थे.

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सरेंडर करते नक्सली. (ANI (File))

इसमें कहा गया है कि 836 LWE कैडर गिरफ्तार किए गए, और 1,639 ने सरेंडर किया और मुख्यधारा में शामिल हो गए. सरेंडर करने वाले नक्सलियों में एक पोलित ब्यूरो मेंबर और एक सेंट्रल कमेटी मेंबर शामिल हैं.

सख्त और प्लान्ड कोशिश: केंद्र सरकार ने यह भी दावा किया कि नेशनल एक्शन प्लान और पॉलिसी को सख्ती से लागू करके नक्सल खतरे से निपटने में बहुत ज़्यादा सफलता मिली है. इसमें कई तरह के तरीकों पर ध्यान दिया गया है.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. (ANI (File))

नेशनल एक्शन प्लान और पॉलिसी में सटीक इंटेलिजेंस-बेस्ड और लोगों के लिए अच्छे लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज़्म (LWE) के खिलाफ ऑपरेशन शामिल हैं. इन कदमों के साथ-साथ सिक्योरिटी की कमी वाले इलाकों पर तेजी से कब्जा करना, टॉप नेताओं के साथ-साथ ओवरग्राउंड वर्कर्स को टारगेट करना, बुरी सोच का मुकाबला करना, इंफ्रॉस्ट्रक्चर का तेजी से डेवलपमेंट और वेलफेयर स्कीमों का सैचुरेशन, फाइनेंस की कमी, राज्यों और केंद्र सरकारों के बीच बेहतर तालमेल, और माओवादी से जुड़े मामलों की जांच और मुकदमा चलाने में तेजी लाना शामिल है.

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) तस्वीर के लिए पोज देती हुई. (ANI (File))

इस साल हथियार डालने वाले कुछ जाने-माने नक्सलियों में सतीश उर्फ ​​टी वासुदेव राव (CCM), रनिता (SZCM, माड DVC की सेक्रेटरी), भास्कर (DVCM, PL 32), नीला उर्फ ​​नांदे (DVCM, IC और नेलनार AC की सेक्रेटरी), दीपक पालो (DVCM, IC और इंद्रावती AC के सेक्रेटरी) शामिल थे. वासुदेव राव पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था.

SZCM रैंक के ऑपरेटिव पर 25 लाख रुपये, DVCM पर 10 से 15 लाख रुपये और ACM पर 5 लाख रुपये का इनाम था.

शाह ने 28 सितंबर, 2025 को नई दिल्ली में नक्सल मुक्त भारत नाम के एक प्रोग्राम में कहा था कि बिखरे हुए तरीके के बजाय, मोदी सरकार ने एक साथ और बेरहम तरीका अपनाया है.

उन्होंने कहा कि सरकार की पॉलिसी रेड कार्पेट बिछाकर उन लोगों का स्वागत करना है, जो हथियार डालकर सरेंडर करना चाहते हैं. हालांकि अगर कोई बेगुनाह आदिवासियों को मारने के लिए हथियार उठाता है, तो सरकार का फर्ज है कि वह बेगुनाह आदिवासियों की रक्षा करे और हथियारबंद नक्सलियों का सामना करे.

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सरेंडर करते नक्सली. (ANI (File))

DRG, STF, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) और COBRA यूनिट अब एक साथ ऑपरेशन करती हैं, और उनकी चेन ऑफ कमांड अब साफ है. इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग ने नक्सलवाद के खिलाफ भारत की सफलता में बड़ा फर्क डाला है.

इतना ही नहीं, सरकार ने फोरेंसिक जांच शुरू की और एक लोकेशन-ट्रैकिंग सिस्टम उपलब्ध कराया गया, मोबाइल-फ़ोन एक्टिविटी राज्य पुलिस के साथ शेयर की गई, साइंटिफिक कॉल-लॉग एनालिसिस सॉफ़्टवेयर बनाया गया, और नक्सलियों के छिपे हुए सपोर्टर्स का पता लगाने के लिए सोशल-मीडिया एनालिसिस का इस्तेमाल किया गया. इससे 1960 और 1970 के दशक में शुरू हुए नक्सल आंदोलन के खिलाफ भी सफलता मिली.

इन सभी कोशिशों ने नक्सल विरोधी अभियान को और भी सफल और नतीजे देने वाला बनाया.

2025 में मिली बड़ी कामयाबी में से एक तेलंगाना-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर कर्रेगुटा हिल्स पर एक बड़े नक्सल कैंप को खत्म करना था. इसमें हथियारों का बड़ा स्टॉक, दो साल का राशन और हथियार और IED बनाने की फैक्ट्रियां थीं. 23 मई, 2025 को, यह कैंप, जहां पहुंचना बहुत मुश्किल था, ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में खत्म कर दिया गया और 27 हार्डकोर नक्सली मारे गए.

नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास: नई दिल्ली में इसी इवेंट में बोलते हुए शाह ने कहा कि 2014 से 2024 तक, लेफ्ट-विंग एक्सट्रीमिज़्म से प्रभावित राज्यों में 12,000 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं. 17,500 सड़कों के लिए बजट मंजूर किया गया है, और 6,300 करोड़ रुपये की लागत से 5,000 मोबाइल टावर लगाए गए हैं.

इसके अलावा, नक्सल प्रभावित इलाकों में 1,060 बैंक ब्रांच खोली गई हैं, 937 ATM लगाए गए हैं, 37,850 बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट नियुक्त किए गए हैं, 5,899 पोस्ट ऑफिस खोले गए हैं, 850 स्कूल बनाए गए हैं, और 186 अच्छी सुविधाओं वाले हेल्थ सेंटर बनाए गए हैं.

नियादनेल्लानार स्कीम के तहत, छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित इलाके में आयुष्मान भारत कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, स्कूल, राशन की दुकानें और आंगनवाड़ी सेंटर बनाने की मंजूरी देने पर काम कर रही है. सरकार ने वादा किया है कि अगले तीन महीनों में नक्सलवाद खत्म हो जाएगा, और भारतीयों को उम्मीद है कि केंद्र अपना वादा निभाएगा.

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