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देहरादून में वर्ल्ड डिजास्टर कॉन्फ्रेंस का आगाज, उत्तराखंड में इन 3 जगहों पर लगेंगे आधुनिक डॉप्लर रडार

देहरादून में विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन और 20वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन 2025 का आगाज, हरिद्वार-पंतनगर-औली में स्थापित होंगे अत्याधुनिक मौसम राडार

World Disaster Conference 2025
वैज्ञानिक को सम्मानित करते सीएम धामी (फोटो सोर्स- Information Department)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : November 28, 2025 at 9:43 PM IST

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Updated : November 29, 2025 at 9:05 AM IST

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देहरादून: विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन और 20वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन 2025 का शुभारंभ हो गया है. जिसमें केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शिरकत की. इस दौरान एनडीएमए के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल की बुक का विमोचन भी किया गया. वहीं, सीएम धामी ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाली प्रतिभाशाली महिला वैज्ञानिकों को सम्मानित किया.

देहरादून ग्राफिक एरा सिल्वर जुबली कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यभर के विभिन्न शोध एवं शैक्षणिक संस्थानों से चयनित वैज्ञानिकों को 'Young Women Scientist Achievement Award 2025' और 'UCOST Young Women Scientist Excellence Award' दिया गया.

वर्ल्ड डिजास्टर कॉन्फ्रेंस का आगाज (Video- ETV Bharat)

सीएम धामी ने कहा कि विज्ञान, अनुसंधान और तकनीक आधारित नवाचार आपदा प्रबंधन को सशक्त एवं प्रभावी बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाते हैं. साथ ही कहा कि उत्तराखंड की युवा महिला वैज्ञानिकों का शोध कार्य न केवल राज्य बल्कि, देश और दुनिया के लिए प्रेरणादायक है.

World Disaster Conference 2025
देहरादून में विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन (फोटो सोर्स- Information Department)

यंग वीमेन साइंटिस्ट अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित हुईं ये वैज्ञानिक: सम्मानित वैज्ञानिकों में यंग वीमेन साइंटिस्ट अचीवमेंट अवार्ड 2025 (45 वर्ष तक) के अंतर्गत डॉ. अंकिता राजपूत, डॉ. गरिमा पुनेठा, डॉ. ममता आर्या, डॉ. हर्षित पंत, डॉ. प्रियंका शर्मा और डॉ. प्रियंका पांडे शामिल रहीं.

World Disaster Conference 2025
देहरादून में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह (फोटो सोर्स- Information Department)

इन्हें मिला यूकॉस्ट यंग वीमेन साइंटिस्ट एक्सीलेंस अवार्ड: वहीं, यूकॉस्ट यंग वीमेन साइंटिस्ट एक्सीलेंस अवार्ड (30 वर्ष तक) के अंतर्गत डॉ. प्रियंका उनियाल, पलक कंसल, राधिका खन्ना, स्तुति आर्या और देवयानी मुंगल को सम्मानित किया गया.

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इस विश्व आपदा सम्मेलन के आयोजन के लिए उत्तराखंड से बेहतर स्थान और कोई नहीं हो सकता. अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय संस्थानों के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक दूरदर्शी और अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है.

इन जगहों पर लगेंगे अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान रडार: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि हरिद्वार, पंतनगर और औली में अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान रडार स्थापित किए जाएंगे, जो राज्य में मौसम संबंधी चेतावनी तंत्र को और ज्यादा मजबूत बनाएंगे.

सिलक्यारा टनल ऑपरेशन का किया जिक्र: उन्होंने 'सिलक्यारा टनल ऑपरेशन' का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस अभियान ने साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, मजबूत नेतृत्व और वैज्ञानिक दक्षता किसी भी जटिल चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर सकती है.

वहीं, सीएम धामी ने कहा कि इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधि एवं देश-विदेश से आए वैज्ञानिक और शोधकर्ता हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन व आपदा प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श करेंगे.

साथ ही तकनीकी नवाचार, अनुसंधान सहयोग एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में ठोस रणनीतियां बनाई जाएंगी. उन्होंने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन में मिले सुझाव और समाधान न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे दुनिया के लिए उपयोगी साबित होंगे.

सीएम धामी ने कहा कि हिमालय सिर्फ पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप का जीवन स्रोत है. यहां की नदियां, ग्लेशियर और जैव विविधता पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित विकास और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से लगातार हिमालय का संतुलन प्रभावित हो रहा है,.

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बदलते मौसम पैटर्न, बढ़ती बारिश की तीव्रता, अप्रत्याशित बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने नई चिंता पैदा कर दी है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और क्षेत्र विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है. इसी दिशा में यह विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन एक सेतु का काम करेगा.

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Last Updated : November 29, 2025 at 9:05 AM IST