चिट्टे के खिलाफ महिलाएं ले रही लोहा, बिलासपुर में महिलाएं सर्द रातों में सड़क पर दे रहीं पहरा
सरकार, पुलिस, पंचायत और स्थानीय लोग चिट्टा तस्करों के खिलाफ लड़ने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि ये और घरों के चिराग ना बुझा पाए.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 3, 2026 at 4:15 PM IST
बिलासपुर: हिमाचल में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है. इस कड़ाके की ठंड में जब कई लोग घरों में रजाई में दुबके होते हैं तब पंजाब के साथ लगते हिमाचल के बिलासपुर जिले के कई गांवों में महिलाएं आधी रात को हाथों में डंडा लेकर पहरा देने निकल रही हैं.
ठंड के बीच महिलाएं सिर पर शॉल ओढ़कर, हाथों में टॉर्च और डंडा लेकर सड़कों पर निगरानी के निकलती हैं. भारत माता की जय के नारे लगाती हैं. छोटी छोटी टोलियों में ये महिलाएं आने जाने वाले पर नजर रखती हैं और कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखने पर उससे पूछताछ करती हैं. महिलाओं की टोली में 25 से लेकर 40-50 साल की महिलाएं शामिल हैं. ये रोजाना इसी तरह रात को सड़कों पर निकलती हैं. इनकी लड़ाई चिट्टे से परिवार, गांव और अपने प्रदेश को बचाने की लड़ाई है. महिलाएं अब चिट्टे के खिलाफ मुहिम में फ्रंट लाइन वॉरियर की तरह खड़ी हैं.
स्कूली बच्चे होते हैं निशाना
कुछ दिनों से बिलासपुर जिले के छोटे से शहर झंडूता में स्थित ओहर की पंचायत प्रधान प्रेम लता शाम ढलते ही गांव की महिलाओं के साथ रात के अंधेरे में पेट्रोलिंग पर निकलती हैं. प्रेम लता कहती हैं कि हमारे इलाके में फोरलेन बनने के बाद से बाहरी राज्यों की गाड़ियां और संदिग्ध लोग खड़े रहते हैं. ये लोग यहां रात के अंधेरे में क्या करने आते हैं. लोगों के इनके चिट्टे की सप्लाई और अन्य गतिविधियों में शामिल होने का शक है. इन लोगों के जगह जगह खड़े रहने से माहौल खराब होता है. हमारी लड़ाई चिट्टा (हेरोइन) माफिया के खिलाफ है. हम अपने बच्चों और परिवार को खतरनाक लत से बचाना चाहते हैं. चिट्टा कई घर और परिवारों को उजाड़ चुका है. चिट्टे के आदी चोरी और दूसरी घटनाओं को अंजाम देते हैं. हमारी पंचायत से दो युवाओं को चिट्टे की लत के कारण नशा मुक्ति केंद्र भेजा गया है. चिट्टा सप्लायर स्कूली बच्चों को टारगेट करते हैं और ये इनका आसान शिकार होते हैं. कई बार फोन पर कुछ जगहों पर सिरिंज पड़ी होने की शिकायतें फोन पर मिलती रहती हैं.
घर से शुरू होती है लड़ाई
प्रेम लता कहती हैं कि 'पंचायत के हर वार्ड से महिलाएं एक साथ घर से निकलती हैं और रात को सड़कों और चिन्हित स्थानों पर जहां सदिग्ध गतिविधियों का शक होता हैं वहां जाकर निगरानी करती हैं. प्रेम लता कहती हैं कि चिट्टे के खिलाफ लड़ाई लड़ना हम महिलाओं के लिए इतना भी आसान नहीं है. हमारी लड़ाई घर से शुरू होती है. रात को पेट्रोलिंग पर जाने वाली महिलाओं को घर में ही विरोध का सामना करना पड़ता है. उन्हें कमजोर और औरत होने का अहसास दिलवाकर घर पर रहने को कहा जाता है, लेकिन हम कमजोर नहीं है. हम इसके खिलाफ लड़ाई लड़ती रहेंगी.'
चिट्टा माफिया से नहीं लगता डर
प्रेम लता कहती हैं कि सोशल मीडिया पर हमारे ऊपर तरह तरह के कमेंट किए जाते हैं. साथ देने की जगह हमारा हौसला तोड़ने की कोशिश की जाती हैं. हमारे साथ पेट्रोलिंग कर रही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी कोई खास इंतजाम नहीं है. रात को पैट्रोलिंग से लौटते समय महिलाओं को घर के दरवाजे तक छोड़ना भी चुनौती होती है, लेकिन हम किसी से डरने वाली नहीं और किसी के डर से घर पर नहीं बैठ सकती हैं. किसी राजनेता का भी समर्थन हमारे साथ नहीं हैं.
परिवार और प्रदेश की लड़ाई
हिमाचल में पंचायत चुनाव कभी भी हो सकते हैं, क्या ये पंचायत चुनाव से पहले का राजनीतिक स्टंट हैं इस पर प्रेम लता कहती हैं कि 'मेरा आगे चुनाव लड़ने का कोई इरादा भी नहीं है. प्रधान पद छोड़ने के बाद भी हमारी चिट्टे के खिलाफ मुहिम जारी रहेगी, क्योंकि ये लड़ाई हमें परिवार, गांव और हिमाचल के लिए लड़नी हैं. राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है.'

2021 में ठेका करवाया बंद
प्रेमलता ने बताया कि बीते साल मेरी पंचायत ने नोटिफिकेशन भी जारी की थी कि चिट्टे का लेन देन करने वालों को उसको पंचायत की मूलभूत सुविधाओं से वंचित कर किया जाएगा. 2021 में भी मैंने प्रधान का पद संभालते हुए ठेका बंद करवाया था. पिछले साल भी हमारी पंचायत में ठेका खुलवाने की कोशिश की गई थी, लेकिन हमने इसके लिए एनओसी नहीं दी. हमारे ऊपर तरह तरह के दवाब बनाए गए, लेकिन हम इसके आगे नहीं झुके.
लघट गांव की महिला मंडल की महिलाएं भी सड़कों पर उतरीं
औहर की तरह बिलासपुर सदर विधानसभा क्षेत्र के बरमाणा क्षेत्र में आने वाले लघट गांव के महिला मंडल की महिलाएं भी रात को चिट्टा माफिया के खिलाफ पैट्रोलिंग पर निकलती हैं. एकजुटता और हाथों में डंडा इस लड़ाई में उनका हथियार हैं. महिला मंडल लघट से जुड़ी महिलाएं नशा तस्करों को दबोचने के लिए रात को पहरा दे रही हैं, ताकि गांव का माहौल सुरक्षित रहे और उनके बच्चे चिट्टे जैसी लत से सुरक्षित रहें. इन महिलाओं की टोली इस पेट्रोलिंग के कारण विवादों में आ गई थी. महिलाओं ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कुछ युवाओं को कथित तौर पर चिट्टे की सिरिंज के साथ पकड़ा था. लोगों ने इनकी पिटाई कर दी थी और वीडियो वायरल होने के बाद महिलाओं पर एफआईआर हो गई थी. इसका बाद ये मामला चर्चाओं में आ गए थे. महिलाओं पर हुई एफआईआर के विरोध में बीजेपी ने धरना दिया था. मुद्दा बड़ा होता देख महिलाओं पर हुई एफआईआर वापस ले ली गई थी. एफआईआर के बाद भी महिलाओं की पेट्रेलिंग हर रात को जारी हैं.

अंजू शर्मा और कुसुमलता भी दूसरी महिलाओं के साथ पहरा दे रही हैं. इनका कहना है कि 'गांव में नया लिंक रोड़ निकला है और रात होते ही बाहरी लोगों की आवाजाही यहां बढ़ जाती है और इसी का फायदा उठाकर नशा तस्कर युवाओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं. लघट गांव दो पंचायतों बैरी रजादियां और बरमाणा के बीच संपर्क का मुख्य मार्ग है. बरमाणा औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां दिन-रात वाहनों की आवाजाही रहती है, जिससे नशा माफिया की गतिविधियों के लिए यह इलाका आसान रास्ता बन गया है.'

गांवों के लोगों का मिला समर्थन
पहरा दे रही महिलाओं का कहना है कि कई बार स्कूली बच्चों और युवाओं को इस रास्ते पर बहकाने की कोशिश भी की गई, जिसके बाद महिलाओं ने संगठित होकर पहरा देने का फैसला लिया. महिला मंडल की इस मुहिम को गांव के लोगों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है. कई ग्रामीण रात के समय महिलाओं के साथ पहरे में शामिल हो रहे हैं, जबकि अन्य लोग गांव में आने-जाने वालों पर नजर रखते हुए किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत महिला मंडल या पुलिस तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि नशे के खिलाफ आज सख्ती नहीं दिखाई गई तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. महिलाओं की यह सामूहिक और साहसिक पहल न केवल लघट गांव में सुरक्षा और जागरूकता का माहौल बना रही है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी यह संदेश दे रही है कि समाज की एकजुटता से नशे के खिलाफ मजबूत और असरदार लड़ाई लड़ी जा सकती है.
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