सियासी चर्चा : कुनबा बढ़ाने में लगी JDU, क्या बिहार में फिर AIMIM के साथ होगा 'खेला'?
एआईएमआईएम के विधायक नीतीश कुमार को राजनीतिक गुरु बता रहे हैं. विधायकों की टोली 1 अणे मार्ग पहुंच रही है. ऐसे में चर्चा गर्म है.

Published : December 10, 2025 at 9:03 PM IST
रिपोर्ट : अविनाश
पटना : ''हम 2014 से 2024 तक जेडीयू के साथ रहे. नीतीश कुमार ने एक प्लेटफॉर्म दिया. जोकीहाट से जेडीयू की टिकट पर हम उपचुनाव लड़े थे. कहीं न कहीं बिहार में उन्होंने मुझे पहचान दी है. हमेशा उनके कार्यों से प्रभावित रहा हूं. पांच बार मुखिया रहा हूं. अभी इस्तीफा देकर आया हूं. पत्नी भी मुखिया रही हैं. नीतीश कुमार तो मेरे राजनीतिक गुरु हैं.'' ये कहना है मो. मुर्शीद आलम का, जो जोकीहाट से एआईएमआईएम की टिकट पर विधायक चुने गए हैं.
कयासों का बाजार गर्म : जिस प्रकार से एआईएमआईएम के विधायक नीतीश कुमार की तारीफ में पुलिंदे बांध रहे हैं, ऐसे में कयासों का बाजार गर्म है कि क्या एक बार फिर से बिहार में AIMIM के साथ 'खेला' हो जाएगा. दरअसल जिस प्रकार से 2020 के चुनाव के बाद नजारा दिखा उसके बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चा काफी तेजी से चल रही है.
AIMIM विधायकों पर नजर : वैसे भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि 14 जनवरी यानी खरमास के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इसमें AIMIM के विधायक भी तो नहीं होंगे? BSP विधायक की बात तो पुरानी हो चुकी है, अब सबकी नजर एआईएमआईएम विधायकों के अगले कदम पर टिकी है.
अख्तरुल ईमान की सफाई : एआईएमआईएम के नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लगातार तारीफ कर रहे हैं. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी विकास के मुद्दे पर नीतीश कुमार का समर्थन करने की घोषणा की है. अभी दो दिन पहले प्रदेश अध्यक्ष और अमौर के विधायक अख्तरुल ईमान के नेतृत्व में तीन विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जाकर मुलाकात भी की थी.
'नैतिक समर्थन दिया है' : एक अणे मार्ग में हुई मुलाकात के कारण सियासी हलको में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान पार्टी को लेकर हो रही चर्चा पर आश्चर्य जताते हुए कह रहे हैं कि हम लोग तो क्षेत्र की समस्याओं को लेकर मिलने गए थे. अख्तरुल इमान ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की बात नहीं कही है, बल्कि नैतिक समर्थन दिया है. अच्छा काम करेंगे तो हमारे विधायक आपका समर्थन करेंगे.
''विधानसभा में मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो पाई थी. कोचाधामन और बहादुरगंज जो मुस्लिम बहुल इलाका है, वहां मिलिट्री बेस के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण की जा रही है. देश की सुरक्षा का मामला है तो मिलिट्री बेस बने, लेकिन हम लोग मुख्यमंत्री से कहने गए थे आबादी से दूर मिलिट्री बेस बनाया जाए. ऐसा देखा भी गया है की मिलिट्री बेस आबादी से दूर ही बनाया जाता है.''- अख्तरुल ईमान, प्रदेश अध्यक्ष, एआईएमआईएम
आगे आप लोगों की रणनीति क्या होगी? इस पर अख्तरुल इमान ने कहा कि रणनीति हम लोगों की यही है हम लोगों के लोग अटूट हैं. हम लोग सीमांचल के साथ पूरे बिहार के गरीबों, शोषितों के आवाज हैं. सिर्फ इंसाफ का नारा नहीं हो, जो दावा न्याय के साथ इंसाफ और विकास का हो रहा है उस पर काम भी हो. अख्तरुल इमान ने कहा कि सीमांचल का इलाका बिहार का सबसे पिछड़ा इलाका है तो हम लोग उसकी लड़ाई लड़ रहे हैं.

नीतीश कुमार पर इस बार आपको विश्वास है? अख्तरुल इमान ने कहा कि 20 सालों से देख रहा हूं. सीमांचल की हकमारी पहले भी हो रही थी आज भी हो रही है, लेकिन हम लोग प्रयास कर रहे हैं और आगे भी करेंगे.
'भविष्य को किसने देखा' : आपके विधायक जो चुनाव जीतकर आए हैं कह रहे हैं कि नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हो जाएं तो हम लोग साथ देंगे? इस पर अख्तरुल ईमान का कहना है कि भविष्य को किसने देखा है, लेकिन यह कल्पना भी लोग कैसे कर रहे हैं कि नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हो जाएंगे.
बिहार में एनडीए को प्रचंड जीत मिली है ऐसे में विपक्ष के लिए क्या ऑप्शन बचा है. अख्तरुल ईमान ने कहा कि यह जीत सरकारी मशीनरी और सरकारी धन का दुरुपयोग के कारण मिला है. अख्तरुल ईमान बिजली फ्री करने पर भी सवाल खड़ा कर रहे हैं. कह रहे हैं कि गरीबों का बिजली फ्री करना चाहिए था. जीविका दीदी को भी ₹10000 देने पर निशाना साध रहे हैं. वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने को सही कदम भी बता रहे हैं.
RJD-JDU से क्यों नहीं पूछते? : 2020 में भी आप लोग कह रहे थे कि हम लोग यूनाइट हैं, लेकिन आपके चार विधायक टूट कर आरजेडी में चले गए. इस बार भी नीतीश कुमार ने 9 मंत्री पद अभी तक खाली रखा है और चर्चा इसी के कारण हो रही है? इस पर अख्तरुल ईमान ने कहा कि यह बात राजद-जदयू के लोगों से क्यों नहीं पूछते हैं, उनके लोग भी कहां से कहां चले गए?
''आखिर गरीब की बीवी कब तक सब की भाभी बनी रहेगी? दूसरे लोगों से क्यों नहीं पूछते हैं कि उनके लोग कब भागेंगे. सबकी नजर हम ही लोगों पर क्यों है? इस बार हमारे लोग वैचारिक रूप से बहुत मजबूत हैं और अटूट हैं. जो तोड़ने की कोशिश करेंगे वही टूट जाएंगे.''- अख्तरुल ईमान, प्रदेश अध्यक्ष, एआईएमआईएम
'पूरे बिहार पर हमारी नजर' : विपक्ष की ओर से लगातार भाजपा की बी टीम होने के सवाल पर अख्तरूल ईमान ने कहा कि परेशानी उनको है जो बीजेपी का भय दिखाकर अब तक मुसलमान का वोट लेते रहे हैं. सीमांचल में इस बार 5 सीटों पर जीत मिली है. मगध क्षेत्र में भी हमारा अच्छा प्रदर्शन हुआ है. सीट नहीं आई है लेकिन पूरे बिहार में आगे हम लोग चुनाव लड़ेंगे.
5 सीटों पर कब्जा : दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल में ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है. 2020 की तरह इस बार भी पांच सीटों पर जीत हासिल की है. यही नहीं कई सीटों पर महागठबंधन को झटका भी दिया है. एक सीट पर तो एआईएमआईएम केवल 389 वोट से ही चुनाव हार गई.

2020 में टूटी थी AIMIM : 2020 के चुनाव में भी AIMIM ने सीमांचल इलाके में 5 सीट जीतकर सबको चौंकाया था. उस समय भी चर्चा थी कि एआईएमआईएम के विधायक जदयू के साथ ही जाना चाहते हैं, लेकिन नीतीश कुमार के कहने पर ही एआईएमआईएम के चार विधायक राजद में शामिल हुए. नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद बिहार में महागठबंधन की सरकार 2022 में बनी. उसमें पाला बदलने वाले एआईएमआईएम के एक विधायक को मंत्री भी बनाया गया.
'नीतीश कुमार की कोशिश नं. 1 पार्टी बनने की' : राजनीतिक विशेषज्ञ सुनील पांडेय का कहना है कि नीतीश कुमार अपना कुनवा बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते रहे हैं. उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि इस बार जो छोटे दल हैं उसके विधायकों को अपने साथ मिला लें. वैसे तो आरजेडी और कांग्रेस पर भी उनकी नजर होगी. नीतीश कुमार की यह भी कोशिश होगी दूसरे दलों को तोड़ कर जदयू को एक नंबर की पार्टी बना दें.
''जहां बीजेपी ने 14 मंत्री बनाए हैं तो वहीं नीतीश कुमार ने केवल 8 मंत्री बनाया है. अभी भी 6 मंत्री पद नीतीश कुमार ने जदयू कोटे से खाली रखा है.''- सुनील पांडेय, राजनीतिक विशेषज्ञ
ये भी पढ़ें :-
बिहार में AIMIM के तीन विधायकों ने सीएम नीतीश कुमार से की मुलाकात, चर्चाओं का बाजार गर्म
'गरीब की बीवी सबकी भाभी हो जाती है', AIMIM के अख्तरुल ईमान ने ऐसा क्यों कहा?

