बिहार के 100% स्ट्राइक रेट वाले BJP नेता की नितिन नबीन की नई टीम में हो सकती है एंट्री
यूपी के आगामी सियासी दंगल में क्या एक बार फिर मंगल पांडेय 'संकटमोचक' की भूमिका में होंगे? ब्यूरो चीफ बृजम पांडे ने एक्सक्लूसिव बातचीत की.

Published : July 3, 2026 at 11:49 AM IST
पटना: उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बीजेपी के अंदर संगठनात्मक बदलावों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में बीजेपी बिहार के कद्दावर नेता मंगल पांडेय को कोई बड़ी अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. यूपी के सियासी दंगल को देखते हुए पार्टी उनके बेहतरीन सांगठनिक अनुभव का फायदा उठाने का मन बना रही है.
मंगल पांडेय को अहम जिम्मेदारी?: BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में कितने महामंत्री होंगे और उन्हें किन राज्यों से चुना जाएगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि वर्तमान महामंत्रियों में से बिहार बीजेपी के कद्दावर नेता मंगल पांडेय को नई टीम में अहम जगह मिल सकती है. प्रभारी के रूप में बिहार बीजेपी नेता मंगल पांडेय का 'स्ट्राइक रेट' बेहद शानदार और लगभग 100% रहा है.
100% रहा मंगल पांडेय का 'स्ट्राइक रेट': हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में उन्होंने पार्टी के प्रदेश प्रभारी के रूप में अहम भूमिका निभाई, जहां बीजेपी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए शानदार सफलता हासिल की. बतौर प्रदेश प्रभारी उनका ट्रैक रिकॉर्ड लगभग शत-प्रतिशत सफलता का गवाह है.
यूपी से लेकर झारखंड तक शानदार प्रदर्शन: इससे पहले भी उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (2017 और 2022) और हिमाचल प्रदेश चुनाव में अहम भूमिका निभाई. यही नहीं, 2019 लोकसभा चुनाव में झारखंड बीजेपी के प्रभारी रहते हुए मंगल पांडेय ने सूबे की 14 में से 12 सीटों पर भाजपा सांसदों को जीत तय कराई थी.

हर आदमी अपने क्षेत्र में करता है काम- मंगल पांडेय: हालांकि मंगल पांडेय में यूपी चुनाव में नई जिम्मेदारी मिलने को लेकर कुछ भी साफ-साफ नहीं कहा है. लेकिन बीजेपी नेता मंगल पांडे से जब ईटीवी भारत ने पूछा कि क्या स्ट्राइक रेट राजनीति में भी होती तो उन्होंने कहा कि सभी को जो जिम्मेवारी मिलती है, सब कोई काम करते हैं. चाहे वह खेल की दुनिया में करें या समाज के विभिन्न क्षेत्रों में करें और मानव जीवन में हर आदमी किसी न किसी क्षेत्र में काम कर रहा है.
"कोई भी व्यक्ति जिस क्षेत्र में काम करता है तो हर किसी की कोशिश होती है की स्ट्राइक रेट हंड्रेड परसेंट रहे. हमको भी जो काम पार्टी से कार्यकर्ता के रूप में मिलती है, प्रयास रहता है कि अधिकतम परिणाम प्राप्त किया जाए."- मंगल पांडेय, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, बिहार सरकार
नए दायित्व पर क्या बोले मंगल पांडेय?: आने वाले समय में नए दायित्व को लेकर मंगल पांडे ने कहा कि हमेशा पार्टी नेतृत्व तय करता है कि किसको कहां क्या काम देना है. किस कार्यकर्ता की कहां पर अधिक अच्छी उपयोगिता है. जिस भी कार्यकर्ता को जो काम दिया जाता है हर कार्यकर्ता प्रयास पूर्वक बेहतर परिणाम देने की कोशिश करता है.

पूरी निष्ठा से निभाता हूं अपना फर्ज: बीजेपी में अपनी जिम्मेदारियों को लेकर मंगल पांडेय ने कहा, जब से उन्होंने एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम करना शुरू किया, तभी से हर जिम्मेदारी को पूरी ताकत और पूरी निष्ठा के साथ निभाना उनकी आदत में शुमार हो चुका है.
उन्होंने आगे कहा, "चाहे युवा मोर्चा के दिनों की बात हो, प्रखंड स्तर की कोई जिम्मेदारी रही हो या फिर बाद में प्रदेश संगठन और मुख्य पार्टी के पदाधिकारी के रूप में मिला काम, हर दायित्व का अपना एक दायरा और एक लक्ष्य होता है. मैंने हमेशा अपने वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन में टीम के साथ मिलकर काम को बखूबी अंजाम देने की कोशिश की है. समय के साथ पार्टी का मुझपर विश्वास बढ़ता गया और नेतृत्व मुझे लगातार नई-नई जिम्मेदारियां सौंपता रहा."
भारतीय जनता पार्टी के भरोसे पर खरा उतरने पर मंगल पांडे ने कहा कि इससे उन्हें लगा कि वह जो काम करते हैं, पार्टी का विश्वास और भरोसा उन पर है. इसलिए वह सदैव जितना अधिकतम कर सकते हैं उतना करने का प्रयास करते हैं. शुरू से संगठन के दायित्व का निर्वहन करते हुए सामाजिक जीवन में अपने काम को उन्होंने आगे बढ़ाया है.

विपक्ष में भी संभाला मोर्चा: उन्होंने आगे कहा, "समाज में जो भी पहचान बनी वह राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में संगठन के माध्यम से बना. संगठन का अलग-अलग जो दायित्व मिला उस दायित्व में समाज के अलग-अलग क्षेत्र से जुड़कर काम किया और जब पार्टी विपक्ष में लंबे समय तक रही तो विपक्ष के कार्यकर्ता के रूप में जनता की आवाज को सड़कों पर ले जाकर बुलंद करने का काम किया. सत्ता पक्ष में आने के बाद भी पार्टी ने जो भी जिम्मेदारी दी उन जिम्मेवारियों का निर्वहन किया."
वरिष्ठ नेताओं का मिला पूरा सहयोग: बड़े नेताओं का मंगल पांडेय का साथ मिला है, इसपर मंगल पांडेय ने कहा कि निश्चित रूप से जब तक अपने वरिष्ठ नेताओं का सहयोग मार्गदर्शन सानिध्य स्नेह नहीं रहेगा तो कार्यकर्ता कोई आगे नहीं बढ़ पाता है. सहयोग मिलता है तो कार्यकर्ता पूरी ताकत से काम करता है. वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन रहता है तो कार्यकर्ता अच्छा परिणाम देता है. इसलिए उनका भी लंबे समय तक संगठन में काम करने का जो अनुभव रहा है, उसमें उनके सभी वरिष्ठ नेताओं का पूरा सहयोग और सानिध्य मिला है.
स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर निभायी जिम्मेदारी: उन्होंने कहा कि पहले वह हिमाचल प्रदेश के प्रभारी बने. फिर उसके बाद कुछ ही महीने बाद राज्य में मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली. दोनों जिम्मेदारी का अपना-अलग महत्व है. स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मिली तो इतने बड़े आबादी के स्वास्थ्य की चिंता करना और हिमाचल प्रदेश में चुनाव था तो वहां चुनाव लड़के सरकार में पार्टी आए और जनता को सेवा करने का मौका मिले, इसके लिए पूरा वातावरण तैयार करने पर फोकस रहा.

मंगल पाडेय ने कहा, इसके अलावा भी अन्य कई राज्यों में पार्टी ने चुनाव के समय जिम्मेदारियां दी. झारखंड में भी लोकसभा चुनाव प्रभारी के रूप में काम किया. उत्तर प्रदेश में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और काशी और अवध क्षेत्र का प्रभारी रहा. मध्य कर्नाटक का प्रभारी रहे और अभी पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं.
"ऐसे कई राज्यों में काम करने का अवसर पार्टी की तरफ से मिला. जब जहां का काम मिला पूरे समर्पण के साथ किया. निश्चित रूप से जो सरकार की जिम्मेदारी थी मंत्री के नाते तो समानांतर दोनों तरफ ध्यान रहता था. कहीं भी कोई चूक ना हो जाए और कहीं कोई कमी ना रह जाए, इसका सदैव प्रयास किया."- मंगल पांडेय, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, बिहार सरकार
भाजपा की कार्य पद्धति एक जैसी: बिहार की राजनीति दूसरे राज्य की राजनीति में कैसे तालमेल बैठाते थे, इसपर मंगल पांडेय ने कहा कि बात सही है कि हर राज्यों की सामाजिक परिवेश भौगोलिक परिवेश बोलचाल और वहां की सांस्कृतिक गतिविधि सब कुछ थोड़ा अलग होता है. लेकिन एक चीज समान होता है वह है भारतीय जनता पार्टी की कार्य पद्धति. भाजपा की कार्य संस्कृति और कार्य पद्धति पूरे देश में एक जैसी होती है.

"इसलिए पार्टी के अंदर संगठन में काम करने में कुछ नया चीज नहीं होता है. पार्टी के भीतर जितना भी काम करने का ढंग पैमाना और व्यवस्था है, वह सारे देश में एक जैसा है. बस अंतर यही होता है कि थोड़ी भाषा अलग होती है. सामाजिक परिवेश थोड़ा अलग होता है. उन चीजों को वहां के स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समझ कर संगठन के काम को आगे बढ़ाने के लिए आदमी काम करता है."-मंगल पांडेय, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, बिहार सरकार
सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी अवसर देती है- मंगल पांडेय: पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी देश के अधिकतम राज्यों में जनता की सेवा कर सके, इसके लिए सभी कार्यकर्ता काम करते हैं. पार्टी में उनके जैसे बहुततेरे कार्यकर्ता हैं और पार्टी जिस किसी को जो भी जिम्मेदारी देती है वह उसे बखूबी निभाते हैं. सभी का लक्ष्य है कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को सशक्त किया जाए और दुनिया का नेतृत्व करने में देश सक्षम हो. सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी अवसर देती है और सभी जिम्मेदारी के अनुरूप काम करते हैं.
संगठन चलाने का लंब अनुभव: यूपी के आगामी चुनाव को देखते हुए नितिन नबीन की नई टीम में बिहार के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की अटकलों को कई लोग तार्किक भी मानते हैं. राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि यूपी जैसे अहम राज्य के सियासी समीकरणों को साधने के लिए बीजेपी को एक अनुभवी चेहरे की जरूरत है, जिसके पास जमीनी राजनीति और संगठन चलाने का लंबा अनुभव हो. मंगल पांडेय का चार दशकों का राजनीति सफरनामा इस बात की गवाही देता है कि वह जमीन से उठकर शीर्ष तक पहुंचे हैं.
मंगल पांडेय का राजनीति सफर: मंगल पांडेय की सांगठनिक क्षमता की नींव साल 1987 में एबीवीपी से जुड़ने के साथ ही पड़ गई थी. इसके बाद 1989 में वे बीजेपी में शामिल हुए और पार्टी के लिए समर्पित सिपाही के तौर पर काम शुरू किया. 1992 में बीजेपी सिवाल जिला इकाई की कार्यसमति का सदस्य बनाया गया. 1994 में राज्य कार्यसमिति में शामिल हुए, 1995 में सारण के प्रभारी बने और 1997 में युवा मोर्चा के प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी मिली.
पार्टी के प्रति उनके समर्पण का नतीजा था कि साल 2000 में वे भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष चुने गए. इसके बाद बिहार बीजेपी के मुख्य संगठन में उनका कद तेजी से बढ़ा और उन्होंने साल 2005 से 2013 तक लगातार चार बार प्रदेश महासचिव के रूप में संगठन को मजबूती दी. उनकी बेदाग और मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए 2013 में उन्हें बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया. बतौर अध्यक्ष उनकी सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सामने आई. उनके कुशल नेतृत्व में एनडीए ने बिहार की 40 में से रिकॉर्ड 31 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की.
मंगल पांडेय के नेतृत्व का शानदार प्रभाव: मंगल पांडेय 2012 में बिहार विधान परिषद के सदस्य बने. 2012 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पश्चिम क्षेत्र के प्रभारी बनाए गए. 84 सीटों में से BJP के खाते में आईं 12 सीटें आई. 2017 में ही एनडीए सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनाये गए. 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश अवध क्षेत्र के प्रभारी रहे और 68 सीटों में से 44 सीटें जीतकर BJP सत्ता में आई.
मंगल पांडेय 2017 में हिमाचल प्रदेश के बीजेपी प्रभारी रहे. प्रभारी रहते हिमाचल प्रदेश में जीत दिलाई. 2018 में मध्य कर्नाटक के विधानसभा चुनाव के वक्त प्रभारी रहे और 224 में से 104 पर जीत मिली. 2019 में झारखंड में बीजेपी के लोकसभा चुनाव प्रभारी रहे और 14 में 12 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली.
2022 में पश्चिम बंगाल के प्रदेश प्रभारी बनाये गए और 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत मिली. 294 में से 208 सीटों पर जीत मिली. शुभेंदु अधिकारी ने दो सीटों नंदीग्राम और भवानीपुर सीट पर जीत दर्ज की. उन्होंने नंदीग्राम सीट छोटी दी, जो अब भी खाली है. 2025 में मंगल पांडेय सिवान सदर से विधायक बने और स्वास्थ्य मंत्री भी बने. 2026 में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में मंत्रीमंडल में शामिल नहीं हैं. ऐसे में अटकलें तेज हैं कि सियासी मोहरों को चलने के लिए एक बार फिर से मंगल पांडेय को यूपी भेजने की तैयारी हो रही है.
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