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क्यों बदल रही गंगा-जमुना तहजीब? कहीं नाम पूछकर मारपीट, कहीं विवादित नारे, उत्तराखंड में माइनॉरिटीज के साथ बढ़ रही हिंसा, जानें वजह

हाल में उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ मारपीट के कई मामले सामने आ रहे हैं, इससे चिंताएं बढ़ने लगी हैं.

UTTARAKHAND MINORITIES VIOLENCE
माइनॉरिटीज के साथ बढ़ रही हिंसा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 27, 2026 at 6:36 PM IST

10 Min Read
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किरनकांत शर्मा

देहरादून: उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ मारपीट, आपत्तिजनक टिप्पणियां, विवाद की घटनाएं सामने आ रही हैं. ये घटनाएं प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सामने आ रही हैं. इन घटनाओं से प्रदेश का माहौल संवेदनशील होता जा रहा है. देहरादून से लेकर ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और चमोली तक फैली इन घटनाओं ने कानून व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, पुलिस और प्रशासन हर मामले में जांच की बात कह रहा है, मगर घटनाओं की आवृत्ति ने अल्पसंख्यक समुदाय में असुरक्षा की भावना को बढ़ा दिया है.

दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड पर आपत्तिजनक संदेश का मामला: ताजा मामला दिल्ली देहरादून एलिवेटेड रोड का है. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कुछ महिलाएं कथित तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द लिखते हुए दिखाई दे रही हैं. वीडियो रात के अंधेरे में बनाया गया. वीडियो वायरल होते ही सहारनपुर और देहरादून में हलचल मच गई. पुलिस का कहना है कि अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि वीडियो में दिखाई देने वाली महिलाएं कौन हैं? उनका उद्देश्य क्या था? घटना को गंभीर मानते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने सहारनपुर के बिहारीगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई है.

ईटीवी भारत से बातचीत में बिहारीगढ़ थाना प्रभारी अक्षय शर्मा ने बताया नेशनल हाईवे अथॉरिटी की ओर से मिली शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. उन्होंने कहा संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.

वीडियो की सत्यता व इसमें शामिल लोगों की पहचान की जा रही है. देहरादून पुलिस भी इस घटनाक्रम के बाद सतर्क हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की निगरानी की जा रही है. जिससे किसी भी प्रकार की अफवाह या तनाव को रोका जा सके.
- अक्षय शर्मा, बिहारीगढ़ थाना प्रभारी -

रुद्रपुर में नमाज पढ़ते मजदूर से मारपीट: इससे पहले ऊधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में 24 फरवरी को मंदिर के पास नमाज पढ़ते मजदूर से मारपीट की गई. यहां एक विशेष समुदाय का राज मिस्त्री मंदिर के पास एक खाली मैदान में नमाज पढ़ रहा था. इसी बीच एक व्यक्ति राज मिस्त्री के साथ मारपीट करता है. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. इस मामले में पीड़ित मोहम्मद शाहिद ने शिकायत दर्ज कराई. वो पिछले कई वर्षों से मिस्त्री का काम कर रहे हैं. इन दिनों अटरिया देवी मंदिर के पास निर्माणाधीन भवन में काम कर रहे थे. उनका कहना है कि वे पिछले कुछ दिनों से पास के मैदान में नमाज अदा कर रहे थे. उन्हें लगा कि इससे किसी को आपत्ति नहीं होगी.

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रुद्रपुर में नमाज पढ़ते मजदूर से मारपीट मामला (ETV Bharat)

इस घटना को लेकर उधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने बताया शाहिद की शिकायत पर अरविंद शर्मा नामक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. जांच की जा रही है. पुलिस के अनुसार मेडिकल परीक्षण में शाहिद के हाथ और पसलियों में चोट की पुष्टि हुई है. आरोपी अरविंद शर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है. उनका कहना है कि संबंधित व्यक्ति को पहले भी वहां नमाज पढ़ने से रोका गया था. उनका तर्क है कि किसी भी धार्मिक स्थल के निकट बिना अनुमति धार्मिक गतिविधि करना उचित नहीं है.

हरिद्वार में ट्रक ड्राइवर से मारपीट: हरिद्वार में भी एक घटना ने तूल पकड़ा. यहां 25 फरवरी को एक ट्रक ड्राइवर ने आरोप लगाया कि उसे धर्म पूछकर पीटा गया. उसका कहना था कि ढाबे पर रुकने के दौरान कुछ लोगों ने पहले उनका नाम पूछा और फिर मारपीट की. हालांकि, हरिद्वार पुलिस ने धर्म के आधार पर मारपीट के आरोपों से इनकार किया है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत भुल्लर ने कहा जांच में सामने आया है कि विवाद ट्रक के पास लघुशंका करने को लेकर हुआ था. दोनों पक्ष एकदूसरे को पहले से नहीं जानते थे. पुलिस के अनुसार दोनों पक्षों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया है. मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है.

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मुस्लिम सेवा संगठन ने डीजीपी को सौंपा पत्र (ETV Bharat)

कनखल में फेरीवाले से अभद्रता: हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में विशेष समुदाय से संबंध रखने वाले फेरीवाले के साथ कथित अभद्रता का मामला भी सामने आया है. पीड़ित का कहना है कि एक युवक ने उनका नाम पूछने के बाद उन्हें क्षेत्र से जाने की धमकी दी. खुद वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया. घटना के बाद समुदाय के कई लोग थाने पहुंचे और शिकायत दी. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. इंस्पेक्टर कनखल देवेंद्र रावत ने कहा तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है. तथ्यों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. इस घटना ने स्थानीय स्तर पर बहस को जन्म दिया खासकर तब जब हाल के दिनों में हरकी पैड़ी क्षेत्र में गैर हिंदुओं के प्रवेश से जुड़े पोस्टर भी चर्चा में रहे थे.

ज्योतिर्मठ में नमाज का मुद्दा और राजनीतिक हलचल: चमोली जिले के ज्योतिर्मठ में नगर पालिका सभागार में 20 फरवरी को नमाज पढ़ने का मामला राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया. इस मामले पर स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि सीमांत क्षेत्रों में बाहरी लोगों की संख्या बढ़ रही है. धार्मिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नीति की आवश्यकता है. मुख्यमंत्री ने मामले को संज्ञान में लेने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया. यह मुद्दा केवल एक स्थानीय घटना तक सीमित नहीं रहा बल्कि धार्मिक पहचान जनसंख्या संतुलन और सार्वजनिक स्थलों के उपयोग जैसे व्यापक प्रश्नों से जुड़ गया. उधर चमोली एसपी सुरजीत सिंह पंवार का कहना है कि ये मामला सामने आते ही दोनों पक्षों को समझा दिया गया था. दोनों के ही मामूली चालान किये गए हैं.

कश्मीरी शॉल विक्रेताओं से मारपीट: इससे पहले जनवरी महीने में विकासनगर बाजार के डाकपत्थर में भी कश्मीरी शॉल विक्रेताओं से मारपीट का मामला सामने आया था. आरोप है कि दुकान पर मौजूद लोगों ने उनके साथ धार्मिक और जातिगत टिप्पणियां कीं. पीड़ितों का कहना है कि इसके बाद पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ते हुए आपत्तिजनक बयान दिए गए और विरोध करने पर दोनों युवकों पर जानलेवा हमला किया. इसके बाद मामले में मुस्लिमों ने विकासनगर चौकी का घेराव भी किया था.

इससे पहले 24 दिसंबर को भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कश्मीरी शॉल विक्रेता से मारपीट का वीडियो वायरल हुआ. ये वीडियो काशीपुर का था. इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए पुलिस ने एक्शन लिया. साथ ही पुलिस ने सोशल मीडिया से वीडियो को हटाने के निर्देश भी दिये थे.

सोशल मीडिया की भूमिका, बढ़ती संवेदनशीलता: इन सभी घटनाओं में एक समान तत्व है. वीडियो का वायरल होना, चाहे एलिवेटेड रोड पर लिखा गया संदेश हो, रुद्रपुर की मारपीट या कनखल का विवाद, हर घटना सोशल मीडिया के जरिए व्यापक स्तर तक फैली. सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री अक्सर आंशिक होती है. जिससे एकतरफा धारणा बन जाती है. इससे समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव बढ़ सकता है. प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि वह तथ्यों की पुष्टि कर समय पर स्पष्ट जानकारी दे, ताकि अफवाहों को रोका जा सके.

क्या बोले उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स: उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स कहते हैं प्रदेश में जो कुछ भी हो रहा है वह ना काबिले बर्दाश्त है. यह सभी जिम्मेदारी अधिकारियों की है जिन्होंने संविधान की शपथ ली है.

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उत्तराखंड बफ्क बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स (ETV Bharat)

वे इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर बातचीत करेंगे. अगर ऐसा ही चलता रहा तो यह राज्य के लिए सही नहीं होगा. हम यहां पर गंगा जमुना तहजीब की बात करते हैं, अगर इस तरह की घटना यहां पर घटेंगी तो स्वाभाविक है अल्पसंख्यक समुदाय में एक डर का माहौल पैदा होगा.
- शादाब शम्स, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड अध्यक्ष -

उत्तरखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ़्ती शमून क़ासमी कहते हैं ऐसा करने वाले समाज में कुछ लोग होते हैं. उन्होंने कहा हमारी सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही कर रही है. ये होता रहता है, समाज है, हर एक जैसा नहीं होता है. पुलिस लगातार ऐसे लोगों के खिलाफ एक्शन ले रही हैं.

वरिष्ट पत्रकार आदेश त्यागी ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल करके ये बताया जा रहा है. कोई कुछ नहीं कर सकता है. सब नेता बनने की होड़ है. उन्होंने कहा ये प्रदेश के लिए ठीक नहीं है. पुलिस को ठोस संदेश देना होगा, नहीं तो ये बुखार की तरह समाज में फैलता जाएगा.

वहीं, इस मामले में बीजेपी विधायक और प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा-

होली का समय है, हम पहले भी और अभी यह नहीं चाहते कि राज्य का माहौल किसी भी तरह से खराब हो या कोई खराब करने की कोशिश करे. हम किसी तरह का कोई अलगाववाद नहीं चाहते हैं, अगर कोई इस तरह की हरकत कर रहा है तो कानून उस पर कार्रवाई करें. धर्म के आधार पर किसी को परेशान करने की इजाजत किसी को नहीं है.

विनोद चमोली , बीजेपी विधायक और प्रदेश प्रवक्ता

सीएम बोले हम सब के लिए काम कर रहे हैं: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने लगातार इस तरह के सवाल आते रहे हैं कि प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय को टारगेट किया जा रहा है. हाल ही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा उनसे कई बार इस तरह की बात की जाती है, लेकिन वह कह देना चाहते हैं कि हम वसुधैव कुटुंबकम को मानते हैं. हमारे लिए सब समान हैं. हम उत्तराखंड की धार्मिकता के डेमोग्राफी चेंज को बर्दाश्त नहीं करेंगे. हम सबके लिए काम कर रहे हैं. आगे भी करते रहेंगे.

सामाजिक सौहार्द की परीक्षा: उत्तराखंड अपनी शांति के लिए पहचान रखता आया है. यहां विभिन्न समुदायों के लोग साथ रहते हैं. हालिया घटनाएं इस सौहार्द की परीक्षा ले रही हैं. ऐसे मामलों में प्रशासन त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करे. समाज के सभी वर्ग संयम बरतें.

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