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आखिर क्या है गोची उत्सव? जिसमें तीर चलाकर होती है बेटों के जन्म की भविष्यवाणी

गोची उत्सव के दौरान पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल होता है. लोग पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं, लोक गीत गाते हैं और नृत्य करते हैं.

WHAT IS GOCHI UTSAV
आखिर क्या है गोची उत्सव? (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 10, 2026 at 10:27 PM IST

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कुल्लू: हिमाचल प्रदेश का जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति सिर्फ अपने ऊंचे पहाड़ों, बर्फीले मौसम और कठिन जीवनशैली के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी और रहस्यमयी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है. यहां की संस्कृति आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी सैकड़ों साल पहले हुआ करती थी. इन्हीं परंपराओं में से एक है गोची उत्सव, जो बेटे के जन्म की खुशी में मनाया जाता है. इस उत्सव की सबसे खास बात यह है कि यहां धनुष-बाण चलाकर यह भविष्यवाणी की जाती है कि अगले साल गांव में कितने बेटे पैदा होंगे. माइनस तापमान, बर्फ से ढके रास्ते और कठिन हालात के बावजूद लोग आज भी इस परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं.

क्या है गोची उत्सव?

गोची उत्सव लाहौल घाटी का एक पारंपरिक त्योहार है, जो मुख्य रूप से संतान के जन्म, खासकर बेटे के जन्म की खुशी में मनाया जाता है. हालांकि स्थानीय लोग यह भी साफ कहते हैं कि यहां बेटा और बेटी में कोई भेदभाव नहीं किया जाता. यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सामाजिक एकजुटता और परंपरा का प्रतीक माना जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, गोची उत्सव केवल एक रस्म नहीं बल्कि देवताओं के प्रति आभार जताने का तरीका है. मान्यता है कि संतान प्राप्ति देवताओं की कृपा से होती है और इसी कृपा के लिए गोची उत्सव में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

लाहौल घाटी में धूमधाम से मनाया गया गोची उत्सव (ETV BHARAT)

कहां से हुई शुरुआत?

लाहौल-स्पीति की गाहर घाटी को गोची उत्सव की जन्मस्थली माना जाता है. हर साल सबसे पहले बिलिंग गांव में इस उत्सव की शुरुआत होती है, जिसके बाद घाटी के अन्य गांवों में अलग-अलग तिथियों पर गोची मनाई जाती है. गाहर घाटी के बिलिंग, ग्वाजांग, कारदंग, लोअर केलांग और अपर केलांग जैसे गांवों में यह उत्सव आज भी पूरे विधि-विधान के साथ मनाया जाता है. खास बात यह है कि हर गांव अपने तय दिन पर ही गोची उत्सव आयोजित करता है.

इस साल क्यों खास है गोची उत्सव?

पिछले एक साल के दौरान बिलिंग गांव के चार परिवारों में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है. इनमें लारजे जायलत्से नोरबू, स्वाची के जिगमेद उरज्ञान, पांस जितसेन नमसेल और गुमलिंगपा के जिगमेद तोबदन के परिवार शामिल हैं. इन सभी परिवारों के घरों में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं, जिसमें पूरे गांव को आमंत्रित किया जाता है. ग्रामीण एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देते हैं और पारंपरिक पकवानों के साथ इस खुशी को साझा करते हैं.

WHAT IS GOCHI UTSAV
लाहौल घाटी में धूमधाम से मनाया गया गोची उत्सव (ETV BHARAT)

गोची उत्सव के दौरान पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल होता है. लोग पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं, लोक गीत गाते हैं और नृत्य करते हैं. घर-घर जाकर भोज दिया जाता है, जिसमें स्थानीय व्यंजन, छांग (स्थानीय पेय), मक्खन से बने पकवान और आटे से बनी पारंपरिक आकृतियां परोसी जाती हैं. यह उत्सव केवल उस परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक खुशी बन जाता है.

तीर चलाने की परंपरा

गोची उत्सव की सबसे खास और चर्चित परंपरा है धनुष-बाण चलाकर भविष्यवाणी करना. इस रस्म में गांव के पुजारी द्वारा सबसे पहले तीर चलाया जाता है. अलग-अलग गांवों में इसके लिए अलग-अलग प्रतीक बनाए जाते हैं. कहीं कपड़े का याक बनाया जाता है, कहीं मक्खन से बकरी की आकृति, तो कहीं बर्फ से शिवलिंग तैयार किया जाता है.

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गोची उत्सव लाहौल घाटी का एक पारंपरिक त्योहार है (ETV BHARAT)

कैसे होती है भविष्यवाणी?

  • सबसे पहले देव स्थान पर पूजा-अर्चना होती है.
  • पुजारी बाणों की संख्या तय करता है.
  • बकरी की खाल या प्रतीकात्मक मूर्ति को लक्ष्य बनाया जाता है.
  • जितने तीर लक्ष्य पर लगते हैं.
  • उतने ही पुत्र जन्म की भविष्यवाणी अगले वर्ष के लिए की जाती है.
  • मान्यता है कि यह भविष्यवाणी देवताओं के संकेत के आधार पर होती है.

किन्हें मिलता है इसमें हिस्सा लेने का अधिकार

इस उत्सव में केवल वही परिवार भाग लेते हैं, जिनके घर हाल ही या पिछले एक साल में पुत्र का जन्म हुआ हो. वही परिवार पूजा सामग्री, पुतले, पकवान और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च उठाते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि यह जिम्मेदारी सौभाग्य का प्रतीक होती है और इसे गर्व के साथ निभाया जाता है.

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गाहर घाटी को गोची उत्सव की जन्मस्थली माना जाता है (ETV BHARAT)

पूर्व जिला परिषद सदस्य कुंगा बोध बताते हैं, "गोची उत्सव सदियों से घाटी की पहचान रहा है. यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक जुड़ाव का माध्यम भी है. हर साल बिलिंग गांव से शुरुआत होना और फिर अन्य गांवों में उत्सव मनाना घाटी की सामूहिक परंपरा को दर्शाता है."

क्या कहती है इस साल की भविष्यवाणी?

कुंगा बोध के अनुसार, इस बार पुजारी ने करीब 15 तीर चलाए, जिनमें से तीन तीर कपड़े से बनाए गए याक के चित्र पर लगे. इसके आधार पर अगले वर्ष घाटी में तीन बेटों के जन्म की भविष्यवाणी की गई है. बीते वर्षों में भी कई बार यह भविष्यवाणी सही साबित हुई है, जिससे लोगों का विश्वास और गहरा हुआ है.

स्थानीय निवासी कुंदन शर्मा ने बताया, "पिछले साल चार तीर बकरी की खाल पर लगे थे और उसी के अनुसार इलाके में पुत्र जन्म हुआ. इसी विश्वास के चलते लोग आज भी पूरी श्रद्धा से इस उत्सव में शामिल होते हैं." उन्होंने यह भी कहा कि लाहौल घाटी में बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं है और बेटियों को भी बराबर सम्मान दिया जाता है.

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गोची उत्सव में तीर चलाने की परंपरा (ETV BHARAT)

हालांकि गोची उत्सव को पुत्र जन्म से जोड़ा जाता है, लेकिन स्थानीय समाज में बेटियों को भी उतना ही सम्मान दिया जाता है. शिक्षा, संपत्ति और सामाजिक अधिकारों में यहां बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं किया जाता. स्थानीय लोग मानते हैं कि यह परंपरा प्रतीकात्मक है, न कि भेदभाव का आधार.

लाहौल-स्पीति के प्रसिद्ध साहित्यकार मोहन लाल रेलिंगपा के अनुसार, "प्राचीन काल में गोची उत्सव के दौरान मानव और पशु बलि की प्रथा भी थी. यह बलि इलाके की खुशहाली के लिए दी जाती थी. यूल्सा देवता को खुश करने के लिए यह परंपरा निभाई जाती थी, लेकिन बाद में इसमें बड़ा बदलाव आया."

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गोची उत्सव के दौरान पूजा-अर्चना करते स्थानीय लोग (ETV BHARAT)

कहानी के अनुसार, एक बौद्ध लामा ने मानव बलि का विरोध किया और स्वयं बलि देने को तैयार हो गए. चमत्कारिक रूप से वे सुरक्षित रहे, जिसके बाद यूल्सा देवता ने मानव बलि के स्थान पर आटे से बनी आकृति स्वीकार करने का संदेश दिया. इसके बाद से बलि प्रथा समाप्त हो गई और गोची उत्सव प्रतीकात्मक रूप में मनाया जाने लगा. आज गोची उत्सव हिंसा नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुका है. आधुनिक शिक्षा और तकनीक के बावजूद लोग इस परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं. गोची उत्सव केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि लाहौल-स्पीति की आत्मा है. यह परंपरा दिखाती है कि कैसे कठिन मौसम और आधुनिकता के बावजूद संस्कृति जिंदा रह सकती है.

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