अब थाने के चक्कर नहीं, किन मामलों में और कैसे घर बैठे दर्ज करा सकते हैं e-FIR?
आखिर ई-एफआईआर क्या है और किन मामलों में ई-एफआईआर दर्ज की जा सकती है?

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 8, 2026 at 7:28 PM IST
शिमला: जब किसी के साथ चोरी, ठगी या किसी तरह की अनहोनी हो जाती है, तो परेशानी सिर्फ घटना तक ही सीमित नहीं रहती. असली दिक्कत तब शुरू होती है, जब पीड़ित व्यक्ति को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने के लिए थाने जाना पड़ता है. कई बार थाना दूर होता है, कई बार कामकाज या मौसम आड़े आ जाता है. कई बार लोग सिर्फ इस डर से पीछे हट जाते हैं कि प्रक्रिया बहुत लंबी और मुश्किल होगी. इसी समस्या को देखते हुए पुलिस विभाग ने ई-एफआईआर की सुविधा शुरू की है, ताकि लोग घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज कर सकें.
संदीप शर्मा, (SDPO) कहते हैं, "आज भी बहुत कम लोग ई-एफआईआर सुविधा के बारे में जानते हैं. कई गांव आज भी पुलिस थानों से काफी दूरी पर हैं. ऐसे में छोटी-छोटी शिकायतों के लिए पूरा दिन खराब हो जाता है. ई-एफआईआर का मकसद आम लोगों को राहत देना है, ताकि उन्हें हर छोटी शिकायत के लिए थाने न आना पड़े और समय की बचत हो सके."
ई-एफआईआर क्या है?
ई-एफआईआर का मतलब है, इलेक्ट्रॉनिक फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट. यानी वही एफआईआर, जो पहले थाने जाकर लिखवाई जाती थी, अब उसे ऑनलाइन दर्ज किया जा सकता है. इसके लिए सिर्फ मोबाइल या कंप्यूटर और इंटरनेट की जरूरत होती है. इस सुविधा से लोगों को लाइन में लगने, बार-बार थाने जाने और कागजी झंझट से राहत मिलती है. खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह सुविधा बहुत उपयोगी है.

किन मामलों में ई-एफआईआर दर्ज की जा सकती है?
ई-एफआईआर उन मामलों के लिए है, जिनमें तुरंत पुलिस मौके पर पहुंचने की जरूरत नहीं होती. जैसे- साधारण चोरी यानी घर, दुकान, गोदाम या खेत से सामान चोरी होने पर ई-एफआईआर दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा बाइक, स्कूटी, कार या अन्य वाहन चोरी होने पर भी ई-एफआईआर दर्ज करा सकते हैं. आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या बैंक पासबुक का गुम होने पर भी घर बैठे ई-एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं. अक्सर सिम कार्ड या बैंक खाता दोबारा चालू कराने के लिए पुलिस रिपोर्ट अनिवार्य होती है.

आज के दौर में मोबाइल चोरी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, जिसकी रिपोर्ट आप तुरंत ऑनलाइन कर सकते हैं. साइबर अपराध से जुड़े मामले जैसे- बैंक से पैसे कट जाना, ऑनलाइन ठगी या सोशल मीडिया पर फर्जीवाड़ा होने पर ई-एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं. इसके अलावा किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना आप ई-एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, "हत्या, दुष्कर्म, अपहरण, गंभीर मारपीट या जानलेवा हमले जैसे मामलों में ई-एफआईआर नहीं करनी चाहिए. ऐसे मामलों में सीधे पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सके और जरूरी सबूत जुटाए जा सकें."
ई-एफआईआर कैसे दर्ज करें?
SDPO संदीप शर्मा कहते हैं कि, "ई-एफआईआर दर्ज करने के लिए सबसे पहले अपने राज्य की पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है. वहां 'नागरिक सेवाएं' या 'ई-एफआईआर' से जुड़ा विकल्प मिलता है. सबसे पहले मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी डालकर रजिस्ट्रेशन करना होता है. मोबाइल पर आए ओटीपी से लॉगिन पूरा होता है."

OTP से लॉगिन करने के बाद शिकायत से जुड़ी जानकारी भरनी होती है. जैसे- शिकायतकर्ता का नाम और पता. इसके साथ ही घटना कब और कहां हुई साथ ही क्या नुकसान हुआ? ई-एफआईआर में चोरी या गुमशुदगी का पूरा विवरण भरना होता है. सारी जानकारी भरने के बाद फॉर्म सबमिट कर दिया जाता है.

E-FIR के लिए कौन-से दस्तावेज जरूरी होते हैं?
ई-एफआईआर दर्ज करते समय कुछ जरूरी जानकारी देनी होती है. पहचान प्रमाण जैसे आधार कार्ड, वोटर कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत होती है. मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी की भी जरूरत पड़ती है. चोरी या गुमशुदगी से जुड़े कागजात और वाहन चोरी में आरसी की जरूरत पड़ती है. साइबर ठगी के मामले में बैंक ट्रांजैक्शन, स्क्रीनशॉट या मैसेज का प्रमाण होना जरूरी है. यह सब जानकारी सही और साफ होनी चाहिए, ताकि जांच में कोई परेशानी न आए.

एफआईआर दर्ज होने के बाद क्या होता है?
- फॉर्म सबमिट होते ही आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है.
- रजिस्ट्रेशन नंबर बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इसी के जरिए आप अपनी शिकायत की स्थिति देख सकते हैं.
- पुलिस शिकायत की जांच करती है. जानकारी सही पाए जाने पर ई-एफआईआर को आधिकारिक रूप से दर्ज कर लिया जाता है.
- इसके बाद एफआईआर की कॉपी ऑनलाइन ही मिल जाती है.
शिकायत की स्थिति कैसे देखें?
आपको अपनी शिकायत की स्थिति जानने के लिए थाने जाने या फोन करने की जरूरत नहीं है. पोर्टल पर लॉग इन करके 'Track Complaint' के विकल्प पर जाएं. यहां आप देख सकते हैं कि आपकी जांच किस अधिकारी के पास है और उस पर क्या कार्रवाई हुई है. E- FIR के अलावा हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन 1100 पर विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं. यह एक टोल-फ्री सेवा है, जो सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक कार्य करती है. इसके माध्यम से नागरिक अवैध कब्जों, जनसमस्याओं और अन्य विभागीय मामलों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

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