क्या हैं सेब के फेदर प्लांट? जिससे 14 महीने में उग जाएगा एप्पल, बागवान होंगे मालामाल!
हिमाचल बागवानी विभाग पहली बार बागवानों को 40 हजार फेदर प्लांट उपलब्ध कराएगा. विभाग ने इनकी कीमत 500 रुपये प्रति पौधा तय की है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 24, 2025 at 7:22 PM IST
कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती अब एक नई दिशा लेने जा रही है. जिस सेब के लिए बागवानों को अब तक तीन से पांच साल तक इंतजार करना पड़ता था, वही सेब अब सिर्फ 14 से 16 महीने में पेड़ों पर नजर आने लगेगा. बागवानी विभाग पहली बार प्रदेश के बागवानों को फेदर प्लांट उपलब्ध कराने जा रहा है, जो नई वैज्ञानिक तकनीक से तैयार किए गए हैं. इन पौधों से न केवल उत्पादन जल्दी शुरू होगा, बल्कि सेब की पैदावार और बागवानों की आमदनी दोनों बढ़ने की उम्मीद है.
फेदर प्लांट क्या है?
फेदर प्लांट ऐसे सेब के पौधे होते हैं, जिनमें रोपण से पहले ही कई टहनियां वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर दी जाती हैं. आमतौर पर सेब के पौधों में एक ही टहनी होती है, लेकिन फेदर प्लांट में शुरुआत से ही कई शाखाएं मौजूद रहती हैं. इससे पौधा जल्दी विकसित होता है और कम समय में फल देना शुरू कर देता है.

कम समय में मिलेगा उत्पादन
बागवानी विभाग के अनुसार फेदर प्लांट 14 से 16 महीने में फल देना शुरू कर देते हैं, जबकि पारंपरिक सेब के पौधों में फल आने में आमतौर पर 3 से 6 साल तक का समय लग जाता है. यही कारण है कि यह तकनीक बागवानों के लिए ज्यादा फायदेमंद मानी जा रही है.
कौन-कौन सी किस्मों के फेदर प्लांट?
बागवानी विभाग ने रूट स्टॉक पर चार उन्नत किस्मों के फेदर प्लांट तैयार किए हैं. इनमें नेरिसिमो गाला, किंग राट, डार्क बैरन गाला और गाला श्निको शामिल हैं. ये सभी अर्ली वैरायटी हैं और बाजार में इनकी अच्छी मांग रहती है. विभाग ने इन किस्मों को सफल परीक्षण के बाद बागवानों को उपलब्ध कराने का फैसला लिया है.

कितने पौधे मिलेंगे और कीमत क्या होगी?
बागवानी विभाग इस साल प्रदेश में बागवानों को 40 हजार फेदर प्लांट उपलब्ध करवाएगा. इन पौधों की कीमत 500 रुपये प्रति पौधा तय की गई है. विभाग का कहना है कि शुरुआती सफलता के बाद भविष्य में इन पौधों की संख्या और बढ़ाई जाएगी.
बागवानी विशेषज्ञ डॉ. उत्तम पराशर ने बताया, "हिमाचल में सेब के गिरते उत्पादन को बढ़ाने में फेदर प्लांट अहम भूमिका निभाएंगे. रूट स्टॉक पर तैयार इन पौधों से कम समय में बेहतर उत्पादन मिलेगा और बागवानों को आर्थिक रूप से फायदा होगा."
हिमाचल में सेब का गिरता उत्पादन
बागवानी विभाग के अनुसार वर्ष 2015 में 3 करोड़ 88 लाख सेब पेटी का उत्पादन हुआ था. 2016 में 2 करोड़ 34 लाख, 2017 में 2 करोड़ 75 लाख, 2018 में 1 करोड़ 84 लाख, 2019 में 3 करोड़ 57 लाख, 2020 में 2 करोड़ 41 लाख, 2021 में 3 करोड़ 5 लाख, 2022 में 3 करोड़ 40 लाख, 2023 में 1 करोड़ 82 लाख, 2024 में 2 करोड़ 40 लाख और 2025 में 2 करोड़ 80 लाख पेटी सेब का उत्पादन दर्ज किया गया है. एक पेटी में 20 किलो सेब होता है.

कहां मिलेंगे फेदर प्लांट?
बागवानी विभाग के सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट सुरेश नेगी ने बताया कि फेदर प्लांट विशेष तकनीक से तैयार किए जाते हैं, जिनमें पहले से कई शाखाएं होती हैं. इससे पौधे की ग्रोथ तेज होती है और कम समय में बेहतर उत्पादन मिलता है. बागवान इन फेदर प्लांट को अपने नजदीकी बागवानी केंद्र से प्राप्त कर सकते हैं.
"प्रदेश में पहली बार बागवानों को 40 हजार फेदर प्लांट उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. इन पौधों की सफलता के बाद भविष्य में इन्हें बड़े स्तर पर बागवानों को दिया जाएगा, जिससे प्रदेश में सेब उत्पादन बढ़ेगा और बागवानों को सीधा लाभ मिलेगा."- सीपाल रासु, सचिव, बागवानी विभाग.

फेदर तकनीक से तैयार सेब के पौधे हिमाचल प्रदेश की सेब बागवानी के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आए हैं. कम समय में फल, उन्नत किस्में और बेहतर उत्पादन के चलते यह तकनीक आने वाले वर्षों में प्रदेश की बागवानी की तस्वीर बदल सकती है.
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