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भारत-अमेरिका ट्रेड डील; क्या सबकुछ वैसा ही होने जा रहा जैसा ट्रंप कर रहे दावा?

पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को धन्यवाद दिया है. लेकिन, उनके दावों पर अभी न सहमति जताई है और ना ही असहसति.

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भारत-अमेरिका में ट्रेड डील फाइनल. (Photo Credit; Getty Images)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 3, 2026 at 12:06 PM IST

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Updated : February 4, 2026 at 12:31 PM IST

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हैदराबाद: भारत और अमेरिका के बीच सोमवार को ट्रेड डील हो गई. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगा भारी-भरकम टैरिफ (टैक्स) 50% से घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. साथ ही 500 बिलियन डॉलर से ज्यादा के अमेरिकी उत्पाद खरीदने और भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर को जीरो करने का भी दावा किया गया है.

पीएम नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करके ट्रंप को धन्यवाद दिया है. लेकिन, ट्रंप के दावों पर अभी न सहमति जताई है और ना ही असहसति. इस पर जियोपॉलिटिक्स के जानकारों का मानना है कि ट्रंप और मोदी के बयानों में काफी फर्क है.

इससे एक सवाल उठ रहा है कि क्या इस डील के तहत सबकुछ वैसा ही होने जा रहा जैसा ट्रंप दावा कर रहे? आईए, इस रिपोर्ट में समझते हैं कि अमेरिका क्या-क्या दावे कर रहा है, भारत का इस पर क्या कहना है. इसके साथ ही ये भी समझते हैं कि अमेरिका अभी किस देश पर कितना ट्रैरिफ लगा रहा है.

डील को लेकर ट्रंप ने क्या कहा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात करके बहुत अच्छा लगा...वह रूसी तेल खरीदना बंद करने और यूनाइटेड स्टेट्स और शायद, वेनेजुएला से बहुत ज्यादा तेल खरीदने के लिए सहमत हो गए हैं. इससे यूक्रेन में युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी.

अमेरिका से डील को लेकर मोदी ने क्या कहा: ट्रंप के दावों के जवाब में पीएम मोदी ने X पर लिखा, अपने प्यारे दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके बहुत अच्छा लगा. खुशी है कि अब मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स पर टैरिफ 18% कम हो जाएगा. इस शानदार घोषणा के लिए भारत के 1.4 अरब लोगों की तरफ से राष्ट्रपति ट्रंप को बहुत-बहुत धन्यवाद.

जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को फायदा होता है और आपसी फायदे वाले सहयोग के लिए बहुत सारे मौके खुलते हैं. वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का नेतृत्व बहुत जरूरी है. भारत शांति के लिए उनके प्रयासों का पूरा समर्थन करता है. मैं अपनी पार्टनरशिप को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं.

ट्रंप-मोदी के बयानों के क्या मायने: अब ट्रंप और मोदी के बयानों के अंतर को समझते हैं. सबसे पहले ट्रंप कहते हैं कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदेगा. लेकिन, मोदी ने अपनी पोस्ट में ऐसी कोई घोषणा नहीं की और ना ही सरकार के किसी अधिकारी की ओर से इसे लेकर कुछ कहा गया. वास्तविकता पर जाएं तो भारत ने पिछले साल अमेरिका से केवल 41.5 अरब डॉलर का सामान खरीदा था.

इसलिए इसका 500 अरब डॉलर तक पहुंचना संभव नहीं है. क्योंकि, ट्रंप केवल कमोडिटी व्यापार की बात कर रहे हैं. यही नहीं अमेरिका के विदेश मंत्रालय में सलाहकार रहे ईवान ए फेइजेनबौम ने X पर पोस्ट करते हुए खुद ही इस पर संदेह जताया है. उन्होंने लिखा है, भारत भविष्य में शायद ही 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीद पाएगा.

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क्या वाकई रूस से तेल डील तोड़ देगा भारत: ट्रंप दावा कर रहे हैं कि मोदी ने रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताई है. लेकिन, मोदी के बयानों में ये सहमति नहीं दिखती है. ट्रंप का कहना है कि रूस से तेल खरीद बंद करके भारत अमेरिका और वेनेजुएला से खरीदेगा. इससे यूक्रेन में युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी. जबकि, सच्चाई ये है कि 2022 में यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद भारत सस्ते रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था.

जियोपॉलिटिक्स के जानकारों का मानना है कि नवंबर में रूस पर अमेरिका के नए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल के आयात में कमी की है. लेकिन रूस के साथ उसके संबंधों को देखते हुए इसे पूरी तरह समाप्त किया जाना मुश्किल है.

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अब भारत पर अमेरिका लगाएगा सिर्फ 18 फीसदी टैरिफ: डील के अनुसार भारत पर 50 फीसदी की जगह अब केवल 18 फीसदी टैरिफ लगेगा. भारत पर लगने वाला दंडात्मक अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ बिल्कुल खत्म कर दिया गया है. यानी भारत पर अब 50% टैरिफ की जगह केवल 18% ही लगेगा. हालांकि भारत को अभी यूरोपियन यूनियन, जापान और दक्षिण कोरिया के मुकाबले थोड़ा अतिरिक्त टैरिफ झेलना पड़ेगा.

किस देश पर अमेरिका का कितना टैरिफ: अमेरिका ने ब्राजील, म्यांमार, लाओस, चीन और दक्षिण अफ्रीका पर सबसे अधिक टैरिफ लगा रखा है. ब्राजील पर 50 फीसदी, म्यांमार पर 40 फीसदी, लाओस पर 40 फीसदी, चीन पर 37 फीसदी और दक्षिण अफ्रीका पर 30 फीसदी टैरिफ वर्तमान में लगा रहा है.

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भारत पर पाकिस्तान-बांग्लादेश से कम ट्रैरिफ: ट्रंप ने वियतनाम पर 20%, बांग्लादेश पर 20%, पाकिस्तान पर 19%, मलेशिया पर 19%, कंबोडिया पर 19% और थाईलैंड पर 19% टैरिफ लगाया हुआ है. भारत इन देशों से अब बेहतर स्थिति में है. लेकिन कुछ देशों पर अमेरिका ने बेहद कम टैरिफ भी लगाया है. यूनाइटेड किंगडम पर 10 फीसदी, यूरोपियन यूनियन, स्विट्जरलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया पर 15 फीसदी ट्रैरिफ अमेरिका ने लगा रखा है.

अमेरिकी डील से भारत को कितना फायदा: भारत की जिन कंपनियों का अमेरिका में बड़ा कारोबार है, उन्हें इस डील से मार्जिन में राहत और बेहतर बेहतर ऑर्डर मिलने की उम्मीद है. टैरिफ में कटौती टेक्सटाइल और कपड़ों, सीफूड, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान, केमिकल्स, रत्न और आभूषण, कंज्यूमर एक्सपोर्टर्स सहित कई सेक्टर्स को इस डील से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है.

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फ्री ट्रेड डील के पीछे भारत की क्या है रणनीति: भारत की इकोनॉमी मुख्य रूप से घरेलू मांग पर निर्भर है, जिसमें प्राइवेट और सरकारी खपत GDP में 70% से ज्यादा का योगदान देती है. 2024 में घरेलू और विदेशी व्यापार का भारत की GDP में 45% हिस्सा था, जिसमें एक्सपोर्ट कुल 21% था. भारत का इतिहास संरक्षणवाद का रहा है.

1991 से अपनी इकोनॉमी को लिबरलाइज करने के बावजूद, अभी भी दुनिया भर में सबसे ज्यादा इंपोर्ट टैरिफ हैं. 2024 में औसत मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) टैरिफ 15.9% था. 2021 से भारत ने कई तरह के ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए इंपोर्ट में आने वाली रुकावटों को कम करने पर ध्यान दिया है.

इसमें कुछ खास चीजों पर टैरिफ कम करने वाले लिमिटेड प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) FTA, जो मौजूदा टैरिफ को कम या खत्म करते हैं और कॉम्प्रिहेंसिव एग्रीमेंट शामिल हैं, जिनमें नॉन-टैरिफ रुकावटें, इन्वेस्टमेंट, स्किल्ड प्रोफेशनल्स की मोबिलिटी और रोजगार पैदा करने जैसे बड़े आर्थिक सहयोग शामिल हैं.

37 साल में 8 FTA: वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के एक बयान के अनुसार, भारत ने पिछले कुछ सालों में 37 विकसित देशों के साथ 8 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप दिया है. 2014 से भारत ने इन ट्रेड पैक्ट को अंतिम रूप दिया है, जिसमें मॉरीशस (अप्रैल 2021 में लागू), ऑस्ट्रेलिया (दिसंबर 2022), UAE (मई 2022), ओमान (दिसंबर 2025 में साइन), UK (जुलाई 2025 में साइन), यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) - जिसमें स्विट्जरलैंड, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे शामिल हैं - (अक्टूबर 2025 में लागू), न्यूजीलैंड (दिसंबर 2025 में बातचीत पूरी हुई) और यूरोपियन यूनियन, जो 27 देशों का एक ग्रुप है, के साथ एग्रीमेंट शामिल हैं.

India-US ट्रेड को फाइनल होने में कैसे लग गए 20 साल

  • 2006-08 के आसपास रणनीतिक और कॉमर्शियल संबंधों को मजबूत करने की व्यापक बातचीत के बीच पहली बार भारत-अमेरिका FTA का विचार सामने आया. हालांकि, बड़े मतभेदों के कारण कोई औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई. दरअसल, अमेरिका भारतीय बाजारों में, खासकर रिटेल, कृषि और IPR पर ज्यादा पहुंच चाहता था. लेकिन, भारत सहमत नहीं था.
  • 2017 तक, ओबामा के कार्यकाल में व्यापार वार्ता की गति धीमी रही. फोकस पूरे FTA के बजाय सेक्टर-विशिष्ट सहयोग पर चला गया. भारत बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), निवेशक-राज्य विवाद निपटान (ISDS), मल्टी-ब्रांड रिटेल और ई-कॉमर्स में बाजार पहुंच पर अमेरिकी मांगों को लेकर सतर्क रहा.
  • ट्रम्प का पहला राष्ट्रपति कार्यकाल: ट्रम्प के पहले कार्यकाल, 2017-2020 में अमेरिकी प्रशासन ने ज्यादा आक्रामक रुख अपनाया और 2019 में भारत के जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के फायदे (भारतीय निर्यात के लिए ड्यूटी-फ्री एक्सेस) वापस ले लिए गए. अमेरिका ने आपसी पहुंच की कमी और ऊंचे टैरिफ का तर्क दिया. इसके बाद तब बातचीत अचानक खत्म हो गई, जब USTR ने अचानक भारत का अपना दौरा रद कर दिया.
  • जो बाइडेन का राष्ट्रपति कार्यकाल: 2020 में राष्ट्रपति जो बाइडेन के सत्ता संभालने के बाद, भारत-अमेरिका संबंधों ने एक रणनीतिक दिशा ली और इंडो-पैसिफिक, क्वाड और टेक गठबंधनों पर विकास हुए. व्यापार के मुद्दों को धीरे-धीरे सुलझाया जा रहा था. लेकिन, यह सब बिना FTA के हो रहा था.
  • 13 फरवरी 2025: एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों को और गहरा करने पर सहमत हुए हैं. इसके लिए, दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 बिलियन अमेरिकी डॉलर से दोगुना करके 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा करने का एक बड़ा नया लक्ष्य तय किया. उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले हिस्से पर बातचीत शुरू करने की योजनाओं की घोषणा की.
  • 04-06 मार्च 2025: वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल वाशिंगटन डीसी गए. उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं.
  • 02 अप्रैल 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 26 प्रतिशत (10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ और 16 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ) अतिरिक्त आयात शुल्क की घोषणा की.
  • 09 अप्रैल 2025: अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 26 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ को 90 दिनों के लिए (9 जुलाई, 2025 तक) सस्पेंड कर दिया.
  • 23-29 अप्रैल 2025: भारतीय मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल (अब वाणिज्य सचिव) प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए अमेरिकी समकक्षों के साथ बैठक के लिए वाशिंगटन गए. उन्होंने टैरिफ, नॉन-टैरिफ बाधाओं और कस्टम्स सुविधा सहित 19 चैप्टरों को कवर करने वाली शर्तों पर चर्चा की.
  • 4-10 जून, 2025: अतिरिक्त अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक हफ्ते की बातचीत के लिए भारत आया. मार्केट एक्सेस, डिजिटल ट्रेड, कस्टम्स सुविधा, सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधाएं और कानूनी ढांचे पर विस्तार से बातचीत की गई.
  • 26 जून 2025: अग्रवाल के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले मतभेदों को खत्म करने के लिए बातचीत के अगले दौर के लिए फिर से वाशिंगटन गया.
  • 27 जून 2025: डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ एक "बहुत बड़ा" व्यापार समझौता करने जा रहा है.
  • 31 जुलाई 2025: अमेरिका ने 25 प्रतिशत ड्यूटी की घोषणा की जो 7 अगस्त, 2025 (सुबह 9.30 बजे IST) से प्रभावी रही.
  • 06 अगस्त 2025: ट्रंप ने रूसी तेल की लगातार खरीद के लिए दंड के तौर पर भारत से आने वाले सामानों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया. इस आदेश के बाद भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया.
  • 16 सितंबर 2025: यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के अधिकारियों ने भारत में व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और इस संबंध में प्रयासों को तेज करने का फैसला किया गया.
  • 22 सितंबर 2025: पीयूष गोयल ट्रेड बातचीत के लिए न्यूयॉर्क गए, उनके साथ अग्रवाल भी थे.
  • 02 फरवरी 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं, जिसके तहत वाशिंगटन भारतीय सामानों पर पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा.

अमेरिका और भारत के व्यापारिक संबंध: भारत और अमेरिका के बीच तेजी से बढ़ते व्यापार और कॉमर्शियल संबंध दोनों देशों के बीच बहुआयामी साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. वित्त वर्ष 2025 में भारत और अमेरिका के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार (सामान और सेवाएं) रिकॉर्ड 132.2 बिलियन डॉलर (11,941 अरब रुपए) तक पहुंच गया. अमेरिका भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने अप्रैल 2000 से मार्च 2025 तक 70.65 बिलियन डॉलर (6,332 अरब रुपए) का कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया है.

भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील (FTA) के फायदे

  • केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, इससे भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादों का निर्यात कर पाएगा और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को आकर्षित कर पाएगा, जो घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन को तेजी से बढ़ाएगा.
  • एक्सपोर्टर्स की लॉबी, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ में 18% की कटौती से टेक्सटाइल-कपड़े, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, जूते, आभूषण और झींगा के निर्यात में लाभ होगा.
  • मैक्रोइकोनॉमिक नजरिए से, टैरिफ में कमी से भारत की GDP ग्रोथ को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है. साथ ही इक्विटी बाजारों, खासकर निर्यात-उन्मुख और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े शेयरों को भी बढ़ावा मिलेगा.
  • मार्केट एक्सपर्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडस्ट्रियल सामान और डाउनस्ट्रीम सेवाओं में फायदों की ओर इशारा कर रहे हैं. कर्ज देने वालों के लिए, बेहतर व्यापार स्थितियों का मतलब बेहतर कॉर्पोरेट बैलेंस शीट, वर्किंग कैपिटल की मजबूत मांग और लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग में बढ़ती दिलचस्पी हो सकती है.

कौन से सामान सस्ते होंगे

  • दालें, डेयरी उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड की कीमतें कम हो सकती हैं, क्योंकि इंपोर्ट टैक्स कम हो जाएंगे.
  • लैपटॉप, गैजेट और अन्य टेक कंपोनेंट्स की कीमतें ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं.
  • पैकेटबंद खाद्य पदार्थ, घरेलू उपकरण और अन्य आयातित वस्तुएं कम लागत के कारण ज्यादा सुलभ हो सकती हैं.
  • भारत कई अमेरिकी चिकित्सा उपकरण और दवाएं आयात करता है, जिसमें चिकित्सा उपकरण, डायग्नोस्टिक उपकरण और जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं.
  • भारत विभिन्न रक्षा संबंधी उत्पाद आयात करता है, जैसे रक्षा और सुरक्षा उपकरण जिसमें सैन्य उपकरण, निगरानी प्रणाली और हथियार शामिल हैं.

USA को फायदे: अमेरिकी एनर्जी, डिफेंस, टेक खरीद को बढ़ावा मिलेगा. भारत अमेरिका से पेट्रोलियम, डिफेंस इक्विपमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेलीकॉम प्रोडक्ट्स और एयरक्राफ्ट की खरीद बढ़ाएगा. साथ ही कुछ कृषि मार्केट एक्सेस भी दिया जाएगा.

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Last Updated : February 4, 2026 at 12:31 PM IST