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प.बंगाल: भांगर ब्लास्ट केस में NIA की TMC के पूर्व विधायक के घर समेत नौ जगहों पर छापेमारी

गृह मंत्रालय के आदेश के बाद जांच एजेंसी ने केस में नई एफआईआर दर्ज की. विस्तार से पढ़ें.

BHANGAR BLAST CASE
भांगर ब्लास्ट केस में NIA की नौ जगहों पर छापेमारी (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : June 4, 2026 at 10:32 AM IST

5 Min Read
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दक्षिण 24 परगना (पश्चिम बंगाल): नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने विधानसभा चुनाव 2026 के बाद हुई हिंसा और चुनाव पूर्व हुए धमाके की जांच के सिलसिले में आज गुरुवार तृणमूल नेता और पूर्व विधायक साओकत मोल्ला की तलाश में कैनिंग पहुंची. पूरे इलाके को पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस ने घेर लिया है. वहीं, जांच एजेंसी की एक स्पेशल टीम ने साउथ 24 परगना के जिबनताला इलाके में उनके घर पर छापा मारा.

मिली खबर के मुताबिक एनआईए (NIA) की दो अलग-अलग टीमें आज सुबह साओकत मोल्ला के जिबनताला इलाके में उनके घर पहुंचीं. जांच करने वालों ने परिवार वालों से काफी देर तक बात की और साओकत मोल्ला के बारे में पूछा. परिवार का कहना है कि वह अभी घर पर नहीं है. इसके बाद, टीम ने उसके एक बेटे को कस्टडी में लिया और अपने साथ ले गए. हालांकि उसे अभी तक आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन उसे सिर्फ पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. जांच टीम ने साओकत मोल्ला के एक होटल के साथ-साथ उसके कई दूसरे ठिकानों पर भी तलाशी ली.

जांच एजेंसी को सूत्रों से खबर मिली थी कि इस साल 18 मार्च को भांगर के चल्ताबेरिया-बामुनिया इलाके में हुए धमाके की जांच के दौरान साओकत मोल्ला का नाम सामने आया था, साथ ही चुनाव के बाद हुई हिंसा की कई घटनाओं के सिलसिले में भी वह शामिल था. इसके लिए एक सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है. जांच एजेंसी को शक है कि वह अभी कोलकाता या उसके आस-पास के इलाकों में कहीं रह रहा है. आज उसे ढूंढने में नाकाम रहने पर, NIA टीम ने उसके बेटे को कस्टडी में ले लिया.

उसको ढूंढने के लिए इलाके में कई जगहों पर तलाशी ली गई. साओकत मोल्ला का विधानसभा चुनाव के बाद हुए अलग-अलग झगड़ों और हिंसक घटनाओं में उनका नाम बार-बार चर्चा में आया है. हालांकि, तृणमूल पार्टी ने उन पर लगे सभी आरोपों को लगातार नकारा है.

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है; सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI)—एक और सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी—ने पहले भी कोयला स्मगलिंग केस की जांच के सिलसिले में कई बार साओकत मोल्ला को बुलाया था. उस समय भी उनसे लंबी पूछताछ हुई थी, हालांकि उस खास केस के सिलसिले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी. अब, चुनाव के बाद हुई हिंसा और धमाकों से जुड़े मामलों की जांच में NIA की नई एक्टिविटी ने एक बार फिर पॉलिटिकल अटकलों को हवा दे दी है. सूत्रों का दावा है कि जांच के हित में साओकत मोल्ला को जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है.

हालांकि, NIA ने अभी तक इस मामले में कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया है. स्थानीय लोगों के एक संगठन के मुताबिक, जिबनताला इलाके में आज सुबह से ही काफी हंगामा हुआ. सेंट्रल फोर्स की मौजूदगी और इन्वेस्टिगेटर्स की तेज एक्टिविटी की वजह से इलाके में उत्सुक लोगों की भीड़ जमा हो गई. घटना के बाद से, यह मामला जोरदार चर्चा का विषय बन गया है. जांच टीम साओकत मोल्ला के ठिकाने के बारे में पक्की जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश कर रही है. साथ ही, वे यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या धमाकों और चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटनाओं में उसका कोई रोल था.

गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, एनआईए (NIA) ने कोलकाता पुलिस ने 79 क्रूड बम और दूसरे आपत्तिजनक सामान की बरामदगी से जुड़ा केस अपने हाथ में लेकर रजिस्टर किया था. बता दें, 25 अप्रैल का यह केस शुरू में कोलकाता के भांगर डिवीजन के उत्तर काशीपुर पुलिस स्टेशन में रजिस्टर किया गया था. क्रूड बम और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान के स्टोरेज के बारे में इनपुट मिलने के बाद ही एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी.

जानकारी मिलने पर, बंगाल पुलिस ने जूट की रस्सियों से बंधी 79 गोल चीजे और दूसरी आपत्तिजनक सामना बरामद किए थे. इन सामानों को लेकर शक था कि वे देसी बम हैं. ये विस्फोटक कथित तौर पर दक्षिण 24 परगना जिले के उत्तर काशीपुर पुलिस स्टेशन के तहत माझेरहाट (पोइलेपारा) गांव में एक कब्रिस्तान के पास एक खाली घर के अंदर अज्ञात लोगों ने रखे थे.

गृह मंत्रालय के मुताबिक यह मामला नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एक्ट, 2008 के तहत एक 'सुनियोजित अपराथ' है. अधिकारियों ने बताया कि एक्सप्लोसिव्स का गैर-कानूनी स्टोरेज और हैंडलिंग पब्लिक सेफ्टी और प्रॉपर्टी के लिए गंभीर खतरा है, जिसका मकसद लोगों में डर और आतंक फैलाना हो सकता है. मामले की गंभीरता, इसके राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले असर और बड़ी साजिश का पता लगाने की जरूरत को देखते हुए, होम मिनिस्ट्री ने NIA को जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया था.

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