ईरान और इजराइल संघर्ष से उमराह तीर्थयात्रा प्रभावित, आयोजकों को भारी नुकसान होने की संभावना
ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष के कारण खाड़ी देशों में भारी संख्या में लोग फंसे हुए हैं.

Published : March 4, 2026 at 6:22 PM IST
|Updated : March 4, 2026 at 9:36 PM IST
श्रीनगर: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बाद मुसलमानों द्वारा सऊदी अरब के पवित्र शहरों की यात्रा रद्द करने के कारण भारतीय तीर्थयात्रा संचालकों को भारी नुकसान होने की आशंका है.
रमजान की शुरुआत में, पिछले महीने मक्का में उमराह करने वाले 9,04,000 से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे. उम्मीद थी कि इस महीने में तीर्थयात्रा करने के इच्छुक मुसलमानों की संख्या को देखते हुए यह संख्या और बढ़ेगी.
लेकिन शनिवार को इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद, यह संघर्ष सऊदी अरब सहित मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले चुका है. इससे कई खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र बंद हो गया है, जिससे विमानन नेटवर्क बाधित हो गया है.
सऊदी अरब के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत 2024 में 18 लाख से अधिक उमराह तीर्थयात्रियों को भेजने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है, जो 2023 की तुलना में 32 प्रतिशत अधिक है. 2025 के रमजान के दौरान 122 करोड़ से अधिक तीर्थयात्रियों ने उमराह किया.
ऑल इंडिया हज उमराह टूर ऑर्गेनाइजर्स एसोसिएशन के जनसंपर्क अधिकारी गुलाम मोहम्मद ने बताया कि भारत से लगभग एक लाख मुसलमान रमजान में उमराह करते हैं क्योंकि इस महीने में तीर्थयात्रा करना अधिक पुण्य का कार्य माना जाता है.
गुलाम मोहम्मद ने कहा कि, उड़ानों के रद्द होने से तीर्थयात्रा बाधित हो गई है. उन्होंने कहा कि, कई भारतीय सऊदी अरब में फंसे हुए हैं. इससे आर्थिक नुकसान हुआ है क्योंकि तीर्थयात्री अब अपनी योजनाओं पर पुनर्विचार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने तीर्थयात्रियों को निकालने के लिए 2 मार्च को विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा है.
हज इस्लाम के प्रमुख स्तंभों में से एक है और मुसलमान इसे हर साल अदा करते हैं, इसके विपरीत उमराह साल के किसी भी समय किया जा सकता है. इसमें सऊदी अरब के मक्का और मदीना में स्थित पवित्र मस्जिदों की यात्रा शामिल है. उमराह की लागत सुविधाओं के आधार पर अलग-अलग होती है, जिसमें होटल और अन्य सुविधाएं शामिल हैं. इसमें 15-20 दिन के पैकेज की कीमत लगभग 1.25 से लेकर 1.30 लाख रुपये प्रति व्यक्ति है. लेकिन रमजान के दौरान मांग बढ़ने से कीमतें बढ़कर 2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति तक पहुंच जाती हैं.
कश्मीर में, हाल के वर्षों में तीर्थयात्रा में वृद्धि हुई है क्योंकि मुस्लिम बहुल क्षेत्र से हजारों लोग इन दो पवित्र स्थलों पर दर्शन के लिए आते थे. श्रीनगर हवाई अड्डे पर सफेद वस्त्र पहने तीर्थयात्री आम दृश्य थे. लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष से पहले के महीने की तुलना में इन दिनों तीर्थयात्रियों की संख्या में 2000 की कमी आई है. श्रीनगर स्थित एक निजी उमराह टूर ऑपरेटर बशीर अहमद ने बताया कि उन्हें 2 मार्च को 32 तीर्थयात्रियों के एक समूह की यात्रा रद्द करनी पड़ी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ.
उनके समकक्ष सैयद इकबाल, जो पिछले 25 वर्षों से इस व्यवसाय में हैं, ने कहा कि संघर्ष से पैदा हुआ डर आगामी हज यात्रा को भी प्रभावित कर सकता है. कोविड महामारी के कारण हुई बाधाओं के बाद, पिछले वर्ष दुनिया भर के लगभग 20 लाख मुसलमानों में से 17 लाख भारतीय तीर्थयात्रियों के साथ हज यात्रा में वृद्धि देखी गई है. उन्होंने कहा, "डर के कारण लोग यात्रा करने से हिचकिचाएंगे, जिससे नुकसान होगा." दोनों एयरलाइनों के 250 से अधिक तीर्थयात्री सऊदी अरब में फंसे हुए हैं, क्योंकि उड़ानें रद्द होने के कारण उनका प्रवास बढ़ा दिया गया था.
सऊदी अरब में, कश्मीर के एक तीर्थयात्री ने बताया कि पैकेज की अवधि समाप्त होने के बाद वे आवास और भोजन जैसी व्यवस्था स्वयं कर रहे हैं. सैयद ने कहा, "इंडिगो द्वारा उड़ानें फिर से शुरू करने के बाद उनमें से कई कल लौट रहे हैं. लेकिन कई अभी भी फंसे रहेंगे क्योंकि एयर इंडिया ने अभी तक कोई अपडेट नहीं दिया है."
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