पूरे देश में जोर पकड़ रहा है मॉनसून, इन राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन का खतरा
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम में हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में इस हफ्ते बारिश होने की संभावना है. पढ़ें अंकिता कुमारी की रिपोर्ट ...

Published : September 1, 2026 at 12:00 PM IST
नई दिल्ली: नेपाल में बाढ़ के असर के बाद, हिमाचल प्रदेश, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे कुछ अन्य राज्यों में भी बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं. सितंबर का महीना मॉनसून के साथ शुरू हो रहा है और इन इलाकों में भारी बारिश की उम्मीद है.
हिमाचल प्रदेश और शिमला में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जो 4 सितंबर तक जारी रहेगी. हिमाचल प्रदेश में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के सीनियर साइंटिस्ट संदीप कुमार शर्मा ने बताया कि जिन जिलों में अगले चार दिनों तक भारी बारिश होगी, उनके लिए येलो वॉर्निंग जारी की गई है.
हिमाचल प्रदेश में पानी का बढ़ता स्तर और झीलों का तेजी से फैलना बड़ी चिंता का विषय है. इससे 'ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOFs) यानी ग्लेशियर वाली झील के अचानक फटने से आने वाली बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. किन्नौर में सांगला ग्लेशियर झील में लगभग 15.27 लाख क्यूबिक मीटर पानी है और यह झील करीब 15.73 हेक्टेयर में फैली हुई है.
पिछले कुछ सालों में इस झील का दायरा बढ़ा है और अगर यह झील अचानक फटती है, तो जेएसडब्ल्यू बास्पा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को खतरा हो सकता है. वहीं, लाहौल-स्पीति की घेपांग घाट झील का आकार 33 सालों में 178 फीसदी बढ़ गया है, जिससे निचले इलाकों के लिए चिंता बढ़ गई है.
इन खतरों से निपटने के लिए अधिकारियों ने सी-डीएसी की मदद से झीलों पर नजर रखने और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में लोगों को चेतावनी देने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग और अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम शुरू किए हैं.
हिमाचल प्रदेश में मौजूदा मॉनसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. हमीरपुर में सामान्य से 35 फीसदी ज़्यादा बारिश हुई है, जबकि कांगड़ा में 6 फीसदी कम, किन्नौर में 5 फीसदी कम, मंडी में 18 फीसदी कम और लाहौल-स्पीति में 59 फीसदी कम बारिश हुई है.
वहीं, बिलासपुर में सामान्य से 3 फीसदी ज़्यादा बारिश दर्ज की गई है, चंबा में सामान्य बारिश हुई है, जबकि शिमला में 14 फीसदी ज़्यादा और सिरमौर में सामान्य से 3 फीसदी ज़्यादा बारिश हुई है.
उत्तराखंड में भूस्खलन से सड़कें बाधित
उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण आज स्कूल बंद कर दिए गए हैं. कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों की एक दिन की छुट्टी रहेगी और देहरादून ज़िले में आंगनवाड़ी केंद्र भी बंद कर दिए गए हैं. हरिद्वार के निवासियों को आने-जाने में जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ सकता है.
देहरादून और टिहरी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इन इलाकों में भूस्खलन हुआ है, जिससे बचाव कार्य मुश्किल हो गया है. 80 से ज़्यादा सड़कें बंद हैं और लोगों को इन इलाकों में यात्रा न करने की सलाह दी गई है. मौसम की स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है.
ओडिशा में 214% बारिश दर्ज की गई
ओडिशा में 214 फीसदी बारिश दर्ज की गई है. कम दबाव का क्षेत्र मजबूत होने के कारण मौसम विभाग ने ओडिशा में तीन दिनों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. कुछ इलाकों में बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान और तेज हवा चल सकती है. मौसम विभाग के अनुसार 1 सितंबर को ओडिशा में हवा की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटा हो सकती है, जो 50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. लोगों को घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है.
मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश में अलर्ट
बिहार और मध्य प्रदेश में कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिससे उत्तर प्रदेश में नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. पुल ढह गए हैं. कुछ पर्यटक फंस गए हैं. मध्य प्रदेश में 'मदाकनी' तूफान का असर देखा जा सकता है. कई जिलों में बांध ओवरफ्लो हो रहे हैं और कई गांवों में बाढ़ आ गई है. इसके चलते स्कूल बंद कर दिए गए हैं. बिहार में 14 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि नदियों का बढ़ता जलस्तर आवाजाही में बाधा डाल सकता है. मौसम विभाग के अनुसार इन इलाकों में पूरे हफ़्ते भारी बारिश जारी रहेगी.
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरणविद हिशमी हुसैन का कहना है कि बिहार को बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय, बाढ़ आने से पहले ही उसकी तैयारी कर लेनी चाहिए. चूंकि बिहार में बहने वाली कई नदियां नेपाल से निकलती हैं, इसलिए नेपाल और भारत को भारी बारिश, नदियों के बढ़ते जलस्तर और पानी छोड़े जाने के बारे में तुरंत जानकारी साझा करनी चाहिए.
बिहार को तटबंधों में कमजोर जगहों की नियमित जांच करनी चाहिए, लोगों को सुरक्षित निकालने के रास्ते तैयार करने चाहिए और बाढ़ आश्रय स्थलों को तैयार रखना चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाढ़ की चेतावनी केवल सरकारी अधिकारियों तक ही सीमित न रहकर, सीधे खतरे वाले गांवों तक सायरन, लाउडस्पीकर, एसएमएस, स्थानीय स्वयंसेवकों और पंचायतों के माध्यम से पहुंचनी चाहिए. इसका उद्देश्य ग्रामीणों को सुरक्षित रूप से बाहर निकलने के लिए पर्याप्त समय देना है.
नेपाल में बाढ़ आने से बिहार में समस्याएं क्यों होती हैं?
कोसी, गंडक और बागमती समेत नेपाल की नदियां बहकर बिहार में आती हैं. भारी बारिश, भूस्खलन या ऊपरी इलाकों से अचानक पानी छोड़े जाने से बिहार में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जहाँ मैदानी इलाका होने के कारण पानी की निकासी मुश्किल होती है.
नेपाल के मौसम से बुरी तरह प्रभावित हो सकने वाले भारतीय राज्य
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार और उत्तर प्रदेश को नदियों में नीचे की ओर आने वाली बाढ़ का खतरा रहता है. सिक्किम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और असम को भी अचानक बाढ़ (flash floods), भूस्खलन और नदियों में नीचे की ओर आने वाली बाढ़ जैसे खतरों का सामना करना पड़ सकता है.
इन घटनाओं के पीछे कई कारण
इनमें मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन, भारी बारिश, ग्लेशियर और बर्फ का पिघलना, भूस्खलन, तलछट का जमाव, वनों की कटाई, बुनियादी ढांचे का विकास और जोखिम वाले इलाकों में बसावट शामिल है.
हिमालय के ग्लेशियर क्यों पिघल रहे हैं?
इसका मुख्य कारण तापमान में वृद्धि है. बढ़ता तापमान, बर्फबारी के बदलते पैटर्न, ब्लैक-कार्बन का जमाव और बारिश के बदलते तरीके इस नुकसान को तेजी से बढ़ा रहे हैं. ग्लेशियरों के पिघलने से झीलें बड़ी हो सकती हैं और 'ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOF) यानी ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है.
नेपाल-बिहार की स्थिति दिखाती है कि जलवायु से जुड़ी आपदाएं आपस में जुड़ी हुई है. हिमालय में होने वाली घटनाओं का असर मैदानी इलाकों में बाढ़, पानी, खेती और आजीविका के संकट के रूप में तेज़ी से फैल सकता है.
इन इलाकों में कुल बारिश
उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत
उत्तर-पश्चिम में हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में इस हफ़्ते बारिश होने की संभावना है. मध्य क्षेत्र पर भी एक मौसम प्रणाली का असर रहने की उम्मीद है. छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में बारिश हो सकती है.
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत
इस इलाके में कई दिनों तक मौसम गीला रहने की संभावना है. अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा जैसी जगहों पर बारिश हो सकती है.
पश्चिमी और दक्षिणी भारत
भारत के कई हिस्सों और पश्चिमी भारत में जिसमें तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं, 5 सितंबर तक छिटपुट बारिश हो सकती है. पश्चिमी भारत में कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में इस हफ़्ते बारिश हो सकती है.
मौसम का हाल
पूर्वी भारत में मॉनसून ने जोर पकड़ लिया है. सोमवार को कई जगहों पर आंधी-तूफ़ान और भारी बारिश देखी गई. बंगाल की खाड़ी से कम दबाव का एक क्षेत्र मैदानी इलाके की ओर बढ़ गया है. मॉनसून की रेखा पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में फैली हुई है, जिससे पूर्वी, मध्य और पश्चिमी इलाकों में भारी बारिश हो रही है.

