इन राज्यों में भारी बारिश और भूस्खलन को लेकर अलर्ट, जानें आज का मौसम
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव वाले सिस्टम से मौसम प्रभावित हो रहा है.

Published : August 31, 2026 at 1:39 PM IST
नई दिल्ली: मौसम विभाग के अनुसार भारत के कई हिस्सों में मॉनसून सक्रिय रहेगा, पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से जलभराव और भूस्खलन हो सकता है. 31 अगस्त को भारत के कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के सक्रिय रहने और कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.
अभी मौसम उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने एक कम दबाव वाले सिस्टम से प्रभावित हो रहा है. मॉनसून ट्रफ और अरब सागर से आने वाली नमी वाली हवाएं भी इसमें अहम भूमिका निभा रही हैं. ये सिस्टम देश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में बादल बनने में मदद कर रहे हैं. पश्चिमी घाट भी पश्चिमी तट पर बारिश में योगदान दे रहे हैं.
Extremely heavy rainfall observed at isolated places over Chhattisgarh; Very heavy rainfall over Assam & Meghalaya, Bihar, East Uttar Pradesh, Jharkhand, West Uttar Pradesh and Odisha; Heavy rainfall over Gangetic West Bengal, Himachal Pradesh, Nagaland, Manipur, Mizoram &… pic.twitter.com/I3myJdjRS9
— India Meteorological Department (@Indiametdept) August 31, 2026
उत्तर-पश्चिम भारत : पहाड़ी इलाकों में बारिश और भूस्खलन का खतरा
पहाड़ी इलाकों में बारिश और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है. हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच कहीं-कहीं बारिश हो सकती है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 से 5 सितंबर के बीच काफी ज़्यादा बारिश होने की उम्मीद है. पश्चिमी राजस्थान में भी 3 से 5 सितंबर के बीच बारिश हो सकती है.
पहाड़ी इलाकों में बारिश और भूस्खलन हो सकता है. उत्तराखंड में अल्मोड़ा, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और नैनीताल जैसे इलाके प्रभावित हो सकते हैं. 31 अगस्त से 2 सितंबर तक तूफ़ान और बारिश देखी जा रही है. हिमाचल प्रदेश में भी जिसमें शिमला शामिल है, ऐसे ही हालात बने हुए हैं.
शिमला मौसम विभाग ने 3 सितंबर तक कुछ इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. बिलासपुर, कुल्लू और मंडी जैसे इलाके खास तौर पर प्रभावित हैं. इसके कारण सड़कें बंद हो गई हैं. इन इलाकों में बारिश जारी रहेगी. जम्मू-कश्मीर में राजौरी, बारामूला और कुपवाड़ा जैसे इलाकों में तेज हवा चलने और बारिश होने की संभावना है.
*Under the influence of Well Marked low pressure area over Gangetic West Bengal & adjoining areas of north coastal Odisha and northwest Bay of Bengal*
— India Meteorological Department (@Indiametdept) August 31, 2026
*Heavy rainfall Warnings*
*Gangetic West Bengal*: Light to moderate rainfall at most places with heavy rainfall at isolated… pic.twitter.com/lwYnlN4sXs
पहाड़ों में बारिश मुख्य रूप से नमी वाली मॉनसून हवाओं के पहाड़ी इलाकों से टकराने के कारण होती है. लगातार बारिश से ढलान कमजोर हो सकते हैं, जिससे भूस्खलन, सड़कें बंद होने और अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाता है.
मध्य भारत: बारिश का नया सिस्टम बाढ़ ला सकता है
मध्य भारत में भी मौसम का एक सक्रिय सिस्टम बना रहेगा. पश्चिमी मध्य प्रदेश में 5 सितंबर तक बारिश हो सकती है. इस दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में भी बारिश होने की संभावना है. छत्तीसगढ़ में बहुत भारी बारिश का खतरा बना हुआ है. इस इलाके के कुछ हिस्सों में हालात पहले से ही गंभीर हैं. सिंगरौली में भी भारी बारिश हुई है और मंडला तथा सतना के चित्रकूट जैसे इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं.
पूर्वी भारत: बाढ़ से प्रभावित इलाकों में ज़ोरदार बारिश जारी रह सकती है
पूर्वी भारत में भारी बारिश होने की संभावना है. 31 अगस्त को ओडिशा में भारी बारिश हो सकती है, जबकि झारखंड में 2 सितंबर तक व्यापक बारिश हो सकती है. इसके साथ ही, 1 से 5 सितंबर के बीच बिहार में भी बारिश (जिसमें तेज़ बारिश भी शामिल है) हो सकती है.
गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल में 30 अगस्त से 5 सितंबर तक बारिश होने की उम्मीद है, जबकि उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 2 सितंबर तक बारिश हो सकती है. इसका मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र और समुद्र से लगातार आने वाली नमी है.
पूर्वोत्तर भारत: सितंबर तक बड़े पैमाने पर बारिश की संभावना
पूर्वोत्तर इलाके में कई दिनों तक बारिश का मौसम बने रहने की संभावना है. अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे इलाकों में अच्छी-खासी बारिश हो सकती है. 31 अगस्त से 3 सितंबर के बीच इन जगहों पर आंधी-तूफान और बिजली गिरने की भी आशंका है.
पश्चिम भारत: तटीय क्षेत्र गीला रहेगा, गुजरात को एक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है
पश्चिमी क्षेत्र में भी सक्रिय मानसून की स्थिति देखने की उम्मीद है जैसे कोंकण और गोवा में 31 अगस्त से 5 सितंबर तक काफी व्यापक वर्षा हो सकती है. मध्य महाराष्ट्र में 2 से 5 सितंबर के बीच बारिश हो सकती है. मराठवाड़ा, सौराष्ट्र, कच्छ और मध्य महाराष्ट्र में इस अवधि के दौरान अलग-अलग समय पर छिटपुट बारिश हो सकती है.
क्षेत्र के कुछ हिस्सों में गरज के साथ बारिश संभव है. इस बीच, गुजरात में जारी मानसून के बावजूद एक तस्वीर सामने आई है. एसईओसी आंकड़ों के अनुसार राज्य के 34 जिलों में से 11 में लगभग 50- 51 फीसदी वर्षा की कमी दर्ज की गई. अगस्त में 96.5 मिमी बारिश हुई.
यह चार मानसून महीनों में सबसे अधिक था. अभी भी हाल के वर्षों में अगस्त के सबसे कम योगों में से एक है. वर्षा का असमान वितरण कृषि और जल उपलब्धता के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. तट पर अरब सागर से नमी भरी हवाएं और पश्चिमी घाट के प्रभाव से बारिश हो रही है.
दक्षिण भारत: तटीय इलाकों में बारिश, आंधी और तेज हवा
भारत के कई हिस्सों में बारिश होने की उम्मीद है, जिनमें तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, उत्तरी अंदरूनी कर्नाटक, रायलसीमा, दक्षिणी अंदरूनी कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल शामिल हैं. तेलंगाना में 5 सितंबर तक कहीं-कहीं बारिश हो सकती है. केरल, माहे और लक्षद्वीप में पूरे हफ़्ते अच्छी-खासी बारिश होने की संभावना है.
मछुआरों को समुद्र में खराब मौसम से बचने की सलाह
मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के कुछ हिस्सों में समुद्र में हालात खराब रहने की आशंका है. इसमें तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी, श्रीलंका, अंडमान सागर और पश्चिम बंगाल के तटों के पास के इलाके शामिल हैं.
कुल मिलाकर, मौसम के हालात बताते हैं कि सितंबर की शुरुआत में भारत के कुछ हिस्सों में मॉनसून सक्रिय रहेगा. हालांकि बारिश से कुछ इलाकों को राहत मिल सकती है, लेकिन जिन इलाकों में पहले से ही बाढ़, जलभराव और भूस्खलन की समस्या है, वहां लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. बारिश का एक और दौर शुरू हो रहा है, इसलिए लोगों को सावधान रहना चाहिए.

