कुरुक्षेत्र के इंजीनियर का अनोखा स्टार्टअप, कचरे से किया लाखों का कारोबार, जानिए गौरव की "वेस्ट टू वेल्थ" जर्नी
कुरुक्षेत्र के इंजीनियर गौरव काजल ने कचरे से बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग बनाकर स्टार्टअप शुरू किया. आज उनका 80 लाख का टर्नओवर है.

Published : April 15, 2026 at 2:45 PM IST
कुरुक्षेत्र: कहते हैं कि अगर कुछ करने का जज्बा हो तो कचरा भी कमाई का जरिया बन सकता है. इस बात को सच कर दिखाया है कुरुक्षेत्र के युवा इंजीनियर गौरव काजल ने. दरअसल, गौरव ने अपने स्टार्टअप के जरिए साबित कर दिया है कि वेस्ट को वेल्थ में बदला जा सकता है. कभी दिल्ली की भीड़भाड़ और प्रदूषण के बीच ₹12,000 की नौकरी करने वाले गौरव ने कचरे के ढेर में अपनी किस्मत तलाशी. आज वह वेस्ट को वेल्थ में बदलकर सालाना 80 लाख का टर्नओवर कर रहे हैं.
कचरे से कारोबार की सोच:आज के समय में जहां दुनिया प्लास्टिक और प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है.वहीं, कुरुक्षेत्र के एक युवा गौरव काजल ने कचरे को ही अपना हथियार बना लिया है. इंजीनियर गौरव काजल ने एनसीआर की कंपनी में अपनी नौकरी छोड़कर कूड़े के ढेर को पर्यावरण के अनुकूल "बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग" में बदलने का साहसिक फैसला लिया. आज उनका स्टार्टअप "बालाजी फाइबर प्रोडक्ट" न केवल थर्माकोल को चुनौती दे रहा है, बल्कि सात समंदर पार तक भारत का नाम रोशन कर रहा है.

ऐसे की शुरुआत:कुरुक्षेत्र के छारपुरा गांव के रहने वाले गौरव काजल ने ईटीवी भारत को बताया कि, "मैंने 2 साल से ज्यादा समय तक एनसीआर में एक बड़ी कंपनी में नौकरी की है, लेकिन मेरी तनख्वाह वहां काफी कम थी. इस दौरान मैंने दिल्ली में प्रदूषण सहित वहां कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ बने हुए देखे. इस दृश्य ने मेरी सोच ही बदल दी. मैंने नौकरी छोड़कर कचरे का प्रबंधन कर खुद का स्टार्टअप शुरू करने की ठान ली. बस इसी तरह मेरी 'वेस्ट टू वेल्थ' की जर्नी शुरू हुई. साल 2022 में मैंने इस नए स्टार्टअप की शुरुआत की."
कचरे में फेंके गए पेपर को ऐसे करते हैं कलेक्ट: गौरव बताते हैं कि घरों का कचरा, जिसे लोग फेंक देते हैं, उसमें से वेस्टेज पेपर को कचरा वाले कबाड़ी वाले को बेच देते हैं. वही वेस्टेज कागज गौरव कबाड़ी वाले से खरीदते हैं और उससे बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग तैयार करते हैं. इस तरह गौरव कचरे से वेस्टेज पेपर को कलेक्ट कर बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग बनाते हैं.

12,000 से 80 लाख तक का टर्नओवर:गौरव ने अपनी आय के बारे में बताया कि, "जब मैं एक कंपनी में काम करता था, तब मुझे महज 12,000 रुपये तनख्वाह मिलती थी. लेकिन अब मेरे स्टार्टअप का 80 लाख का टर्नओवर है. मुझे अपने स्टार्टअप से न सिर्फ पैसा और सम्मान मिला, बल्कि धरती को प्लास्टिक मुक्त करने की एक बड़ी मुहिम भी शुरू की है."

पर्यावरण संरक्षण पर किया काम:गौरव काजल ने न केवल अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री का सही उपयोग किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ एक सफल बिजनेस मॉडल भी खड़ा किया. उन्होंने कहा कि, "मैं एक किसान का बेटा हूं. मेरे पिता खेती-बाड़ी करते थे. मैं अपने इस काम के जरिए पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहा हूं ताकि पर्यावरण सुरक्षित और स्वच्छ रहे."

प्लास्टिक का विकल्प:गौरव ने आगे ईटीवी भारत को बताया कि, "यह पैकेजिंग ट्रे थर्माकोल और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का एक सशक्त विकल्प है. इसे इस्तेमाल के बाद आसानी से रीसायकल किया जा सकता है. ये मिट्टी में भी मिल जाती हैं. घरों और ऑफिसों से निकलने वाले रद्दी कागज को हम डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए इकट्ठा करते हैं, जिससे कचरा कम होता है." अपने इस स्टार्टअप से गौरव ने साबित कर दिया कि सही विजन के साथ छोटा स्टार्टअप भी बड़ा बन सकता है. मात्र 12,000 रुपये महीने की नौकरी से शुरू हुआ यह सफर आज 80 लाख सालाना टर्नओवर तक पहुंच गया है.

विदेश में भी डिमांड:गौरव के बनाए प्रोडक्ट हरियाणा या भारत के राज्यों तक ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं. इस बारे में गौरव कहते हैं कि, "भारत के लगभग हर राज्य से हमारे पास ऑर्डर आ रहे हैं, क्योंकि जो स्टार्टअप मैंने शुरू किया है, उस पर भारत में बहुत कम लोग काम कर रहे हैं. अब विदेश से भी ऑर्डर आने लगे हैं. हमारे बनाए पैकेजिंग ट्रे यूके, यूएसए और जर्मनी जैसे देशों में सप्लाई हो रहे हैं. हम कई प्रकार की पैकेजिंग ट्रे बनाते हैं, जो लगभग हर प्रकार के सामान को भेजने के लिए प्रयोग की जाती हैं, जैसे मेडिकल प्रोडक्ट, इलेक्ट्रॉनिक, खाद्य सामग्री और अन्य कई प्रकार के प्रोडक्ट."

कई लोगों को दिया रोजगार: गौरव कहते हैं कि, "हमने अपने स्टार्टअप के जरिए कई लोगों को रोजगार भी दिया है. कई लोग हमसे जुड़े हैं, जो यहां काम करके अपना घर चला रहे हैं." गौरव के यहां काम कर रहे कमलेश यादव ने कहा कि, "मैं 7-8 सालों से यहां काम कर रहा हूं. हमारे यहां कई प्रकार की पैकेजिंग ट्रे बनती हैं. हमारे और भी साथी हैं, जो मेरे साथ यहां सालों से काम कर रहे हैं."

कुरुक्षेत्र के गौरव काजल की यह पहल मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत अभियान दोनों को मजबूती देने का काम कर रही है. उन्होंने कचरे को पैकेजिंग ट्रे में बदलकर न केवल अपना भविष्य संवारा, बल्कि देश को प्लास्टिक मुक्त बनाने में भी अपना योगदान दिया है.
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