पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान, जानिए कौन किस सीट पर मजबूत
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान होगा. इस रिपोर्ट में जानिए कौन कहां मजबूत है?

Published : November 1, 2025 at 8:49 PM IST
रिपोर्ट: आदित्य कुमार झा
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव पहले चरण के पहले चरण का चुनाव 6 नवंबर को होना है. पहले चरण में बिहार के 18 जिलों की 121 सीटों के लिए इस चरण में वोट डाले जाने हैं. पहले चरण में 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी. मिथिलांचल, कोसी और मुंगेर डिवीजन की कई ऐसी सीटें हैं जिन पर इस बार लोगों की नजर बनी हुई है. 2020 विधानसभा चुनाव में इन तीनों क्षेत्र में एनडीए का पलड़ा भारी था.
पहले चरण की वोटिंग: पहले चरण में जिन 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों के लिए मतदान होने हैं, उनमें पटना, भोजपुर, बक्सर, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, बेगूसराय, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा और नालंदा जिले की विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी.
दरभंगा में NDA का बोलबाला: दरभंगा जिले में 10 विधानसभा की सीटें हैं. 2020 में इनमें से एनडीए ने 9 सीटों पर तो महागठबंधन को केवल एक सीट पर संतोष करना पड़ा. जदयू को कुशेश्वरस्थान, बहादुरपुर, बेनीपुर जबकि बीजेपी को दरभंगा, हायाघाट, केवटी और जाले सीट पर जीत हासिल हुई. वहीं वीआईपी को गौरा बौराम, अलीनगर पर जीत मिली. बाद में दोनों सीट के विधायक बीजेपी में शामिल हो गए.
समस्तीपुर में दोनों गठबंधन बराबर: समस्तीपुर जिले में 10 विधानसभा की सीटें हैं, जिसमें से एनडीए और महागठबंधन को 5-5 सीटों पर जीत मिली थी. जदयू को कल्याणपुर, वारिसनगर, सरायरंजन, बीजेपी को रोसड़ा और मोहिउद्दीननगर में और राजद को उजियारपुर, मोरवा और समस्तीपुर के साथ हसनपुर में भी जीत मिली थी. वहीं सीपीएम ने विभूतिपुर पर कब्जा किया.
कई सीटों पर रहेगी नजर: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में दरभंगा प्रमंडल के दो जिलों दरभंगा एवं समस्तीपुर में वोटिंग होगी. इन दो जिलों में 20 विधानसभा के क्षेत्र हैं. 2020 विधानसभा चुनाव में इन सीटों में 14 सीट पर एनडीए की जीत हुई थी. इन दोनों जिला में कई ऐसी विधानसभा की सीट है जो हाई प्रोफाइल सीट के रूप में जाना जाता है.

"दरभंगा की चार सीट इस बार के चुनाव में हॉट सीट बनी हुई है. समस्तीपुर में भी दो सीट पर सबकी नजर रहेगी. दरभंगा की जाले सीट पर नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा चुनाव लड़ रहे हैं, उनके खिलाफ कांग्रेस ने ललित नारायण मिश्र के पोते ऋषि मिश्रा को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं अलीनगर सीट पर लोक गायिका मैथिली ठाकुर के चुनाव लड़ने से यह सीट अपने आप हाई प्रोफाइल हो गई है. इस सीट पर राजद ने विनोद मिश्रा को अपना उम्मीदवार बनाया है."— रवि उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार

रवि उपाध्याय कहते हैं कि दरभंगा शहरी सीट से बिहार सरकार के मंत्री संजय सरावगी चुनाव लड़ रहे हैं. उनके मुकाबले जन सुराज ने पूर्व आईपीएस आरके मिश्रा और मुकेश साहनी की पार्टी ने उमेश साहनी को अपना उम्मीदवार बनाया है. बहादुरपुर से बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी चुनाव लड़ रहे हैं, उनके मुकाबले राजद ने लालू यादव की करीबी भोला यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है. इन सभी सीटों पर सबकी नजर है.
समस्तीपुर की 2 सीट पर नजर: समस्तीपुर जिले की दो विधानसभा की सीट पर इस बार सबकी नजर होगी. सरायरंजन सीट से बिहार सरकार के मंत्री और जदयू की कद्दावर नेता विजय चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं. विजय चौधरी के खिलाफ राजद ने अरविंद साहनी को अपना उम्मीदवार बनाया है. राजद ने तो उजियारपुर सीट से राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आलोक कुमार मेहता चुनावी मैदान में हैं. आलोक मेहता के खिलाफ राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने प्रशांत कुमार पंकज को अपना उम्मीदवार बनाया है. इन दोनों सीटों पर इस बार कड़ा मुकाबला है.
रवि उपाध्याय का कहना है कि मुकेश सहनी के महागठबंधन में शामिल होने के बाद मल्लाह वोटरों का झुकाव महागठबंधन की तरफ हुआ है. इसलिए विजय चौधरी की लड़ाई इस बार मुश्किल होती दिखाई दे रही है. लेकिन ओवरऑल अगर दरभंगा और समस्तीपुर के चुनाव को देखें तो पलड़ा एनडीए का भारी होगा. इसका कारण यह है कि बिहार सरकार के चार मंत्री संजय सरावगी, विजय चौधरी, जीवेश मिश्रा और मदन सहनी चुनावी मैदान में हैं. महिला वोटर नीतीश कुमार की चुप्पी समर्थक हैं, और इस बार भी महिला वोटरों का झुकाव एनडीए की तरफ दिख रहा है, जिसका लाभ एनडीए को होता दिख रहा है.

मधेपुरा में कांटे की टक्कर: मधेपुरा जिले में चार विधानसभा की सीटें हैं. जिनमें दो सीट एनडीए के पास और दो महागठबंधन के पास है. जदयू के पास आलमनगर और बिहारीगंज सीट है, जबकि राजद के पास सिंहेश्वर और मधेपुरा की सीट है. मधेपुरा में यादव वोट बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
सहरसा में किसका दबदबा: सहरसा जिले में चार विधानसभा की सीटें हैं. तीन पर एनडीए का कब्जा है और एक सीट महागठबंधन के पास है. बीजेपी के पास सहरसा और जदयू के पास सोनबरसा (एससी) और महिषी की सीट है, जबकि राजद के पास सिमरी बख्तियारपुर की सीट है.
कोसी में कांटे की टक्कर: वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय का मानना है कि कोसी के दो जिलों सहरसा और मधेपुरा में पहले चरण का मतदान है. इन दोनों जिलों के आठ सीटों में 2020 में 5 सीट पर एनडीए की तो तीन सीट पर महागठबंधन की जीत हुई थी. इस विधानसभा चुनाव में तीन सीट सबकी नजर होगी. आलमनगर से पूर्व मंत्री नरेंद्र नारायण यादव जदयू से फिर से मैदान में हैं, उनके खिलाफ वीआईपी ने नवीन कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है.

"मधेपुरा सीट से पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर को राजद ने अपना उम्मीदवार बनाया है और उनके खिलाफ जदयू ने कविता कुमारी शाह को अपना उम्मीदवार बनाया है. सहरसा सीट से आलोक रंजन झा को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है जो पूर्व में मंत्री रह चुके हैं. उनके खिलाफ महागठबंधन ने आई.पी. गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है. इन तीनों सीटों पर सबकी नजर होगी. सुनील पांडेय का मानना है कि सहरसा और आलमनगर सीट पर फिर से एनडीए का पलड़ा भारी दिख रहा है वहीं मधेपुरा सीट पर चंद्रशेखर को इसलिए भी परेशानी हो सकती है क्योंकि शरद यादव का इस इलाके में एक समय में प्रभाव था और उनका बेटा इस बार राजद से नाराज चल रहा है."— सुनील पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार

मुंगेर में NDA को बढ़त: मुंगेर जिले में तीन विधानसभा की सीटें हैं, जिसमें से एनडीए का दो और महागठबंधन का एक सीट पर कब्जा है. बीजेपी के खाते में मुंगेर, जदयू के खाते में तारापुर और कांग्रेस के हिस्से में जमालपुर सीट आई. मुंगेर जिले में यादव और कुशवाहा के साथ भूमिहार जाति के लोगों की संख्या अच्छी खासी है.

खगड़िया में बराबर का मुकाबला: मुंगेर प्रमंडल के खगड़िया जिले में चार विधानसभा की सीट हैं. जिसमें से एनडीए को दो और महागठबंधन का भी दो सीटों पर कब्जा हुआ. जदयू का परबत्ता और बेलदौर और राजद का अलौली पर कब्जा था, वहीं कांग्रेस का खगड़िया पर.
लखीसराय में दोनों गठबंधन बराबर: लखीसराय जिले में दो विधानसभा की सीटें हैं. एनडीए के पास एक सीट और महागठबंधन के पास भी एक सीट है. हालांकि महागठबंधन की तरफ से राजद के विधायक अब एनडीए में आ गए. बीजेपी का लखीसराय सीट पर और राजद को सूर्यगढ़ा में जीत मिली थी.
शेखपुरा में बराबर की टक्कर: शेखपुरा जिले में भी दो विधानसभा की सीटें हैं. एनडीए और महागठबंधन का एक-एक सीट पर कब्जा है. जदयू के पास बरबीघा तो राजद के पास शेखपुरा विधानसभा की सीट थी.
नालंदा में एनडीए का दबदबा: नालंदा जिले में सात विधानसभा की सीटें हैं. जिनमें एनडीए के पास 6 और महागठबंधन के पास एक सीट है. बीजेपी ने बिहार शरीफ और जदयू ने अस्थावां, राजगीर, हिलसा, नालंदा और हरनौत सीट पर जीत हासिल की थी. वहीं इस्लामपुर सीट पर राजद को जीत मिली थी.
मुंगेर प्रमंडल की हॉट सीट: विधानसभा चुनाव में इस बार मुंगेर प्रमंडल की दो सीटों पर सबकी नजर रहेगी. क्योंकि इसी प्रमंडल से बीजेपी के दोनों डिप्टी सीएम चुनावी मैदान में हैं. तारापुर से सम्राट चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं, उनके खिलाफ राजद ने अरुण कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है. तो वहीं लखीसराय से विजय कुमार सिन्हा चुनाव लड़ रहे हैं. विजय सिन्हा के खिलाफ कांग्रेस ने अमरेश कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है.
वरिष्ठ पत्रकार कौशलेंद्र प्रियदर्शी का कहना है कि मुंगेर कमिश्नरी की दो सीट इस बार एनडीए के लिए प्रतिष्ठा की सीट बनी हुई है. सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा इस बार चुनाव लड़ रहे हैं. सम्राट चौधरी विधान परिषद के सदस्य हैं, लेकिन इस बार चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि विजय सिन्हा लगातार लखीसराय से चुनाव जीतते रहे हैं.

"मुंगेर प्रमंडल में 2020 के चुनाव में महागठबंधन और एनडीए के बीच कांटे की टक्कर हुई थी हालांकि आगे एनडीए को बढ़त मिली थी. शाहाबाद एवं मगध के इलाके में एनडीए को बुरी तरीके से हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन मिथिला और मुंगेर के इलाके ने एनडीए को बढ़त बना दी थी. पहले चरण में जहां चुनाव हो रहा है उसमें नालंदा भी एक जिला है जहां पर 2020 के चुनाव में एनडीए को जबरदस्त सफलता मिली थी सात में से 6 सीटों पर एनडीए को जीत मिली थी."— कौशलेंद्र प्रियदर्शी, वरिष्ठ पत्रकार
राजद की रणनीति: कौशलेंद्र कहते हैं 2025 के चुनाव में राजद ने मुंगेर इलाके के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है. इस इलाके में भूमिहारों की संख्या निर्णायक होती है. इसीलिए राजद ने भूमिहारों को भी टिकट दिया है. शेखपुरा सीट कांग्रेस को दिया गया है, जबकि अन्य सीटों पर राजद ने एमवाई समीकरण के बावजूद भूमिहारों को अपना उम्मीदवार बनाया है.
"जाति के आधार पर बिहार में लोग वोट डालते हैं, लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग है नीतीश फैक्टर भी काम कर रहा है दूसरी तरफ महिलाओं को ₹10000 दिया जा रहा है उसका भी कुछ असर विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा. जहां महागठबंधन एकजुट अपने आप को दिखा रही है वहीं एनडीए के पाले में चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा आए हैं इसलिए इन इलाकों में एनडीए का पलड़ा कुछ भारी दिख रहा है."— कौशलेंद्र प्रियदर्शी, वरिष्ठ पत्रकार
2020 के पैटर्न से देखें तो पहले चरण में एनडीए को 70 से अधिक सीटें मिली थीं. इस बार महिला वोट (लगभग 48% मतदाता), नीतीश की लोकप्रियता और गठबंधन विस्तार (चिराग, कुशवाहा) फायदेमंद हैं. महागठबंधन में तेजस्वी यादव की युवा अपील है, लेकिन आंतरिक कलह और टिकट वितरण में असंतोष बाधा है. जातीय गणित में यादव-मुस्लिम (एमवाई) महागठबंधन का आधार, लेकिन ईबीसी और दलित एनडीए की ओर.
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