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उपराष्ट्रपति का उत्तराखंड दौरा, मसूरी में ट्रेनी IAS को दिये 'गुरुमंत्र', एक क्लिक में पढ़ें

उपराष्ट्रपति ने कहा देश के भावी प्रशासक सेवाभाव और कर्तव्यबोध को जीवन का आधार बनाएं.

VICE PRESIDENT MUSSOORIE VISIT
मसूरी में उप राष्ट्रपति (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 20, 2026 at 7:34 PM IST

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मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी से देश की भावी प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवा आईएएस अधिकारियों को जनसेवा और सुशासन का संदेश दिया. लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में वर्ष 2024 बैच के आईएएस अधिकारी प्रशिक्षुओं के द्वितीय चरण के प्रशिक्षण के समापन समारोह में उन्होंने कहा कि ‘सेवाभाव और कर्तव्यबोध’ को अपने कार्य का मार्गदर्शक मंत्र बनाएं.

उपराष्ट्रपति ने कहा सिविल सेवक सरकार की नीतियों और उनके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं. ऐसे में उनकी जिम्मेदारी केवल फाइलों और दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.


‘अधिकारी की पहचान कुर्सी से नहीं, फैसलों से होगी’: सीपी राधाकृष्णन ने प्रशिक्षु अधिकारियों को नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण कसौटी बताया. उन्होंने कहा अधिकारी की पहचान उसके पद या अधिकार से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लिए गए उसके फैसलों से होती है. उन्होंने कहा प्रशासनिक जीवन में ऐसे कई मौके आएंगे, जब अधिकारियों को दबाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच निर्णय लेने होंगे. ऐसे समय में ईमानदारी, नैतिकता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान होगी.


व्यक्तिगत सफलता नहीं, टीम की जीत जरूरी: उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को टीम भावना के साथ काम करने की सीख दी. उन्होंने कहा प्रशासन किसी एक व्यक्ति की क्षमता से नहीं, बल्कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयास से बेहतर परिणाम देता है. उन्होंने प्रशिक्षुओं से व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय टीम की उत्कृष्टता को प्राथमिकता देने का आह्वान किया. साथ ही सहयोगियों को प्रेरित करने, बेहतर कार्य वातावरण तैयार करने और पूर्व अधिकारियों द्वारा विकसित अच्छी कार्यप्रणालियों को आगे बढ़ाने की सलाह दी.


विकसित भारत का मतलब अंतिम व्यक्ति तक विकास: विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की प्रगति तभी सार्थक होगी, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. विकास की प्रक्रिया समावेशी होनी चाहिए और प्रशासन को उन लोगों तक पहुंचना होगा, जो व्यवस्था के सबसे दूर छोर पर हैं. उन्होंने अधिकारियों से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को समझने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देने को कहा.

41 प्रतिशत महिला अधिकारी, बदलते भारत की तस्वीर: वर्ष 2024 बैच में महिला अधिकारियों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने बताया कि इस बैच में करीब 41 प्रतिशत अधिकारी महिलाएं हैं. उन्होंने इसे नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका का उदाहरण बताया. उनके अनुसार प्रतिभा अब रूढ़ियों की सीमाओं में बंधी नहीं है और दृढ़ संकल्प के साथ महिलाएं प्रशासन सहित हर क्षेत्र में नई पहचान बना रही हैं.

एआई से लेकर ब्लॉकचेन तक, तकनीक समझना जरूरी: उपराष्ट्रपति ने भावी प्रशासकों को तकनीकी बदलावों के साथ चलने की सलाह भी दी. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रशासन को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक केंद्रित बनाने में नई तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों को समझने और उनका उपयोग नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करने पर जोर दिया.

सीपी राधाकृष्णन ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने का मतलब सीखने की प्रक्रिया समाप्त होना नहीं है. सिविल सेवा में लगातार बदलती परिस्थितियों के साथ खुद को ढालना और नई जानकारी हासिल करना जरूरी है. उन्होंने अधिकारियों से निरंतर सीखने, नई तकनीक समझने और बदलते सामाजिक परिवेश के अनुरूप खुद को तैयार रखने का आह्वान किया.

मसूरी से निकलेगा सुशासन का नया अध्याय: लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे ये युवा अधिकारी आने वाले समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालेंगे. ऐसे में मसूरी में दिया गया उपराष्ट्रपति का संदेश उनके लिए एक तरह से प्रशासनिक जीवन की दिशा तय करने वाला संदेश रहा. सेवा, ईमानदारी, टीम भावना, तकनीक और नैतिक नेतृत्व—उपराष्ट्रपति ने इन्हीं पांच आधारों पर भावी प्रशासन की तस्वीर सामने रखी.

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