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प्रख्यात पारिस्थितिकीविद् एवं पर्यावरण वैज्ञानिक माधव गाडगिल का निधन

प्रख्यात पर्यावरणविद व लेखक डॉ. माधव गाडगिल का 83 साल की उम्र में पुणे में निधन हो गया.

Eminent ecologist Madhav Gadgil passed away
प्रख्यात पारिस्थितिकीविद् माधव गाडगिल का निधन हो गया (file photo-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 8, 2026 at 1:29 PM IST

2 Min Read
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पुणे (महाराष्ट्र): दुनिया भर में मशहूर भारतीय पर्यावरणविद, लेखक और रिसर्चर डॉ. माधव गाडगिल का 83 साल की उम्र में निधन हो गया. गाडगिल के पारिवारिक सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गाडगिल पिछले कुछ वक्त से बीमार थे और बुधवार देर रात पुणे के एक अस्पताल में रात 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.

डॉ. गाडगिल का पार्थिव शरीर दोपहर तक उनके घर 'A-18, स्प्रिंग फ्लावर अपार्टमेंट, पंचवटी, पाषाण' में आखिरी दर्शन के लिए रखा जाएगा. उनका अंतिम संस्कार शाम 4 बजे पुणे के वैकुंठ श्मशान घाट में होगा.

डॉ. माधव गाडगिल को पद्म श्री और पद्म भूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. वरिष्ठ पर्यावरणविद् , पश्चिमी घाटों के एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन और प्रकृति प्रेमी डॉ. माधव गाडगिल का जन्म 24 मई, 1942 को पुणे में हुआ था.

उन्होंने पुणे यूनिवर्सिटी, फिर मुंबई यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और बाद में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई की, जहां उन्होंने मैथमेटिकल इकोलॉजी में पीएचडी की डिग्री हासिल की. 1973 से 2004 तक वे इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, बैंगलोर में प्रोफेसर रहे. प्रोफेसर के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 'सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज' की स्थापना की.

उन्होंने कई नेशनल कमेटियों में काम किया. खास तौर पर, पश्चिमी घाटों पर उनके काम के लिए, उन्हें यूनाइटेड नेशंस ने 2024 चैंपियंस ऑफ़ द अर्थ लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया. उन्होंने वेस्टर्न घाट इकोलॉजी एक्सपर्ट पैनल को लीड किया, जिसे 'गाडगिल कमीशन' के नाम से जाना जाता है. उन्होंने पर्यावरण सुरक्षा में अहम योगदान दिया.

उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण की सुरक्षा सिर्फ कानून से नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है. उनके जाने का दुख एक ऐसे जानकार गाइड के जाने के तौर पर मनाया जा रहा है जो पर्यावरण के मुद्दों को सपोर्ट करते थे.

गाडगिल के योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री (1981), पद्म भूषण (2006), शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, वोल्वो पर्यावरण पुरस्कार और पर्यावरण संबंधी उपलब्धियों के लिए टायलर पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए.

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