राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फाइटर हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' में भरी उड़ान, शाम में ‘वायु शक्ति-2026’ में रहेंगी मुख्य अतिथि
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को इतिहास रचते हुए स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ में बतौर को-पायलट उड़ान भरीं.

Published : February 27, 2026 at 11:26 AM IST
|Updated : February 27, 2026 at 12:37 PM IST
जैसलमेर : देश की राष्ट्रपति एवं सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को इतिहास रचते हुए स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ में बतौर को-पायलट उड़ान भरी. वे इस अत्याधुनिक लड़ाकू हेलिकॉप्टर में को-पायलट के रूप में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं. राष्ट्रपति ने सुबह करीब 9:15 बजे जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पहुंचने के बाद अधिकारियों से ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर की क्षमताओं और मिशन प्रोफाइल के बारे में विस्तृत जानकारी ली. इसके बाद वे पायलट यूनिफॉर्म में कॉकपिट में बैठीं और सुबह लगभग 10:15 बजे ग्रुप कैप्टन एन.एस. बहुआ के साथ उड़ान भरी. करीब 25 मिनट की इस उड़ान के दौरान उन्होंने पाकिस्तान सीमा से सटे क्षेत्रों पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज तथा ऐतिहासिक ‘शक्ति स्थल’ का हवाई निरीक्षण किया.
उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने किया सैल्यूट : हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित इस आधुनिक कॉम्बैट हेलीकॉप्टर से उन्होंने युद्धाभ्यास क्षेत्र, देश की सबसे बड़ी फील्ड फायरिंग रेंज तथा परमाणु परीक्षण स्थल का हवाई मुआयना किया. उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने हेलिकॉप्टर से सैल्यूट कर उपस्थित जवानों और अधिकारियों का अभिवादन स्वीकार किया. उनके साथ दूसरे हेलिकॉप्टर में वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह (एयर चीफ मार्शल) भी मौजूद रहे.
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President Droupadi Murmu undertook a sortie in the indigenous Light Combat Helicopter Prachand at Air Force Station Jaisalmer, Rajasthan. The President said that we are extremely proud of our country's brave air warriors. She described LCH Prachand as a powerful symbol of… pic.twitter.com/AbtCgBkLWi
— President of India (@rashtrapatibhvn) February 27, 2026
‘वायु शक्ति-2026’ में रहेंगी मुख्य अतिथि : शाम करीब 5 बजे राष्ट्रपति पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े युद्धाभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ की साक्षी बनेंगी. सीमावर्ती रेगिस्तानी इलाके में आयोजित इस लाइव फायर अभ्यास में वायुसेना के लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और अन्य युद्धक प्लेटफॉर्म अपनी मारक क्षमता, सटीक लक्ष्य भेदन और समन्वित ऑपरेशन का प्रदर्शन करेंगे. कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित सेना और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे.

पहले भी रच चुकी हैं इतिहास : राष्ट्रपति मुर्मू इससे पहले भी लड़ाकू विमानों में उड़ान भरकर इतिहास रच चुकी हैं. 8 अप्रैल 2023 को उन्होंने असम के तेजपुर एयरबेस से सुखोई-30 एमकेआई में लगभग 30 मिनट की उड़ान भरी थी. वे इस विमान में उड़ान भरने वाली देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बनी थीं. इसके बाद 29 अक्टूबर 2025 को उन्होंने अंबाला स्थित ‘गोल्डन एरोज’ स्क्वॉड्रन के राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर नया कीर्तिमान स्थापित किया था. लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई पर करीब 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरते हुए उन्होंने वायुसेना की ताकत और आधुनिक तकनीक का अनुभव किया था. वे सुखोई और राफेल दो अलग-अलग आधुनिक लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति हैं.
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पायलट यूनिफॉर्म में दिखीं राष्ट्रपति : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पायलट की विशेष यूनिफॉर्म में जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं. वहां वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने उनका स्वागत किया. उन्होंने ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और वायुसेना के अधिकारियों से संवाद भी किया. ग्रुप कैप्टन एन.एस. बहुआ ने हेलिकॉप्टर का संचालन किया, जबकि राष्ट्रपति को-पायलट सीट पर रहीं. उड़ान के दौरान उन्होंने रेडियो के माध्यम से देशवासियों के नाम संदेश भी दिया. राष्ट्रपति ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा, “मैं आज प्रचंड हेलीकॉप्टर में उड़ान भर रही हूं. यह हेलीकॉप्टर भारत की आत्मनिर्भरता का प्रबल प्रतीक है. इस समय मैं जैसलमेर के प्रसिद्ध किले के ऊपर से उड़ान भर रही हूं. मैं देश के वीर सैनिकों को गर्व के साथ धन्यवाद देती हूं. मेरा सभी को प्यार भरा नमस्कार, जय हिंद.” संदेश के उपरांत राष्ट्रपति पुनः जैसलमेर वायु सेना स्टेशन पहुंचीं, जहां अमरप्रीत सिंह ने उनका स्वागत किया और हेलीकॉप्टर यात्रा से जुड़ा एक स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया.

गुरुवार शाम पहुंचीं जैसलमेर : राष्ट्रपति मुर्मू गुरुवार शाम करीब 7:30 बजे जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं थीं. राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उनकी अगवानी की थी. इसके बाद वे आर्मी स्टेशन के लिए रवाना हुईं, जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया था.
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