1992 में चलाई थी गोली, अब 34 साल बाद बुजुर्ग को कोर्ट ने दी 3 साल की कैद पर अब मिली जमानत
बिहार में 85 वर्षीय बुजुर्ग को सजा सुनाई गई है. 34 साल पुराने मामले कोर्ट ने फैसला सुनाया है. पढ़ें पूरी खबर..

Published : June 2, 2026 at 6:38 PM IST
वैशाली: बिहार के वैशाली में कोर्ट ने 85 वर्षीय बुजुर्ग को सजा सुनाई है. हालांकि अदालत ने दीपा राय को उनकी उम्र को देखते हुए 3 साल की ही सजा दी है. सीआरपीसी के प्रावधान के तहत उनको प्रोविजनल बेल भी मिल गई है. जिस वजह वह जेल नहीं जाएंगे और उच्च कोर्ट में अपील भी कर सकते हैं. मंगलवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में इसको लेकर दिन भर भारी गहमागहमी रही.
दीपा राय को तीन साल की सजा: दीपा राय 85 वर्ष के हैं. ऐसे में अदालत ने उनकी उम्र को देखते हुए तीन साल की सजा सुनाई है. एडीजे-1 मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने इस मामले में दीपा राय के अलावे अन्य 4 अभियुक्तों को कोर्ट ने 10-10 साल की सजा सुनाई. साथ ही 25-25 हजार का अर्थदंड लगाते हुए सभी को जेल भेज दिया.
शरीर नहीं दे रहा बुजुर्ग का साथ: सजायाफ्ता दीपा राय की उम्र करीब 85 वर्ष है. वह काफी बूढ़े हो चुके हैं. वीडियो में शरीर से उनकी कमजोरी और लाचारी साफ देखी जा सकती है. वह बहुत मुश्किल से लोगों के सहारे से चल पा रहे हैं. जवानी में आपसी विवाद के कारण किए गए गुनाह के लिए उनको बुढ़ापे में अब सजा मिली है. राहत की बात है कि कोर्ट से जमानत मिल गई है.

26 मई को हुए थे दोषी करार: इस बारे में लोक अभियोजक ने बताया 1992 में घटित जानलेवा हमले के इस मामले में कुल 9 लोगो को अभियुक्त बनाया गया था, जिसमें से 4 आरोपियों की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी. 26 मई को ही वैशाली सिविल कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया था.
"1992 में घटित जानलेवा हमले के इस मामले में कुल 9 लोगो को अभियुक्त बनाया गया था. जिसमे से 4 की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी, जबकि दीपा राय सहित पांच लोगों के खिलाफ एडीजे-1 मनोज कुमार तिवारी ने आज सजा सुनाई है."- ख्वाजा हसन खान, लोक अभियोजक

क्या है मामला?: लोक अभियोजक के अनुसार साल 1992 में वैशाली जिले के राघोपुर के जुड़ावनपुर थाना क्षेत्र में आरोपियों ने 1992 में अदालत राय और उनकी पत्नी पर फायरिंग करते हुए 9 लोगों पर एक दंपति ने जानलेवा हमला कर दिया था. जिसमें से 4 की मौत हो गई, जबकि 5 अभी जिंदा हैं. पांच में से एक दीपा राय की उम्र करीब 85 वर्ष है.
10 मई 1992 को थाने में शिकायत: 10 मई 1992, मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से थाना में शिकायत दर्ज कराई गई थी. पीड़ित पक्ष ने कुल 9 लोगो को अभियुक्त बनाया था. शिकायत के अनुसार पीड़ित पक्ष का कहना था कि, दंपति घर के दरवाजे पर बैठे थे, तभी आपसी विवाद में 9 लोगों ने उनपर हमला कर दिया. इस दौरान फायरिंग भी की गई, जिसमें वो बच गए थे, हालांकि इस हमले में वे जख्मी हो गए थे.

1993 में चार्जशीट: इस मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने केस में साल 1993 में चार्जशीट दायर की थी. 34 साल बाद आखिरकार कोर्ट का फैसला आया और 85 साल के दीपा राय समेत 5 आरोपियों को सजा सुनाई. हालांकि मामले में दीपा राय को प्रोविजनल बेल मिल गई है, जिससे वह जेल नहीं जायेंगे.
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