अंकिता भंडारी हत्याकांड, पुलिस ने उठाया VIP के राज से पर्दा, बताया उस रात का सच
आखिरकार पुलिस ने भी अंकिता भंडारी हत्याकांड के उस राज से पर्दा उठा दिया, जिसको लेकर इन दिनों प्रदेश में हंगामा मचा हुआ है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 3, 2026 at 8:08 PM IST
|Updated : January 3, 2026 at 8:45 PM IST
देहरादून: उर्मिला सनावर के वीडियो के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिस तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं, उस पर मीडिया ने आज तीन जनवरी शनिवार को पौड़ी के पूर्व एएसपी और एसआईटी सदस्य रहे शेखर सुयाल से सवाल किए. उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड पर कई अहम जानकारी दी और उर्मिला सनावर द्वारा लगाए गए आरोपों का भी विस्तार से जवाब दिया. साथ ही वीआईपी का नाम भी खोला.
अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया गया था, जिसके सदस्य तत्कालीन पौड़ी के एएसपी शेखर सुयाल भी थे. शेखर सुयाल ने बताया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच एसआईटी ने की थी, उस जांच को हाईकोर्ट और सुप्रीम ने सही करार दिया था.
शेखर सुयाल का कहना है कि एसआईटी जांच सही दिशा में की गई थी, तभी तीनों आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था और उन्हें उम्रकैद की सजा हुई थी. आज भी तीनों दोषी जेल में बंद हैं. शेखर सुयाल की मानें तो एसआईटी ने वनंत्रा रिजॉर्ट में एक-एक सबूत जुटाए और उसे कोर्ट में पेश किया, जिसके बाद आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई और जांच सही दिशा में गई.
वीआईपी का सच भी बताया: उर्मिला सनावर के वीडियो के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में सबसे ज्यादा बात वीआईपी की हो रही है. वीआईपी का सच क्या है? इसको भी शेखर सुयाल ने विस्तार से बताया. शेखर सुयाल वर्तमान हरिद्वार के एसपी ग्रामीण हैं, लेकिन वो अंकिता भंडारी हत्याकांड केस में शुरुआत से जुड़े हुए हैं.
घटना से दो दिन पहले अंकिता का दोस्त उससे मिलने आया था: एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि यह घटना 18 सितंबर 2022 की है. जब तीनों आरोपियों ने एक प्लान बनाते हुए राजस्व चौकी में पटवारी के पास अंकिता की मिसिंग कंप्लेंट दर्ज कराई थी. यह भी सच है कि अंकिता का दोस्त जो जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है, वो भी घटना से दो दिन पहले यानी 15 और 16 सितंबर को अपने एक दोस्त के साथ रिजॉर्ट में आया था. इसलिए आरोपियों ने ऐसा बताने की कोशिश की थी कि अंकिता अपने दोस्त के साथ चली गई है. इस तरह अगले दिन अंकिता की गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज होता है.

आरोपियों ने बनाया था सिनेरियो: एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि जांच के दौरान वो जो समझ पाए, उसके अनुसार आरोपियों ने इस तरह का एक सिनेरियो बनाने की कोशिश कि की 18 सितंबर 2022 की रात को अंकिता रिजॉर्ट में उनके साथ वापस आई थी और 19 सितंबर सुबह को वो बिना बताए चली गई. आरोपी अपने स्टाफ और अंकिता के परिजनों को ऐसा दिखाने का प्रयास कर रहे थे कि अंकिता अपने उन दोस्तों के साथ चली गई है, जो दो दिन पहले उससे मिलने आए थे. शुरुआती जांच भी इस दिशा में की गई.
22 सितंबर को पुलिस के पास आया केस: अंकिता के उस दोस्त का नाम पुष्पदीप है. अंकिता की गुमशुदगी के बाद उसके माता-पिता और आशुतोष नेगी भी लगातार पुष्पदीप के संपर्क में थे. इसी तरह 20 से 21 सितंबर तक पुष्पदीप ने अंकिता के परिजनों को कुछ जानकारी दी और बताया कि उसके पास अंकिता की कुछ चेटिंग है. 22 सितंबर को ये केस पुलिस को हेडओवर हुआ.
एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि जब ये केस पुलिस को हैंडओवर हुआ, तब वो एएसपी पौड़ी थे और बाद में वो एसआईटी के भी सदस्य बने. इसके बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया. 18 सितंबर से लेकर 22 सितंबर तक आरोपियों ने पुलिस और मीडिया को यही बताया कि अंकिता लापता है.
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू की और उस बारे में जानकारी ली, जो उस समय एक्स्ट्रा सर्विस की बात कही जा रही थी. इसके अलावा सोशल मीडिया पर और भी कई बातें चल रही थी. वहीं कुछ जानकारियां पुष्पदीप ने भी पुलिस को दी थी.
18 सितंबर की रात को 9 बजे हुए अंकिता की हत्या: एसपी शेखर सुयाल के मुताबिक आखिर में आरोपियों ने कबूल किया कि वो अंकिता से एक्स्ट्रा सर्विस की मांग कर रहे थे, जिसके लिए वो तैयार नहीं थी. 18 सितंबर की रात को 9 बजे के करीब अंकिता का फोन परमानेंट बंद हो गया था, इसलिए माना जा रहा है कि वो ही घटना का टाइम है. इसके बाद आरोपियों ने बताया कि उन्होंने कैसे अंकिता को गंगा में धक्का देकर मारा. पुलिस की जांच में भी सभी बातें सही पाई गई यानि आरोपियों का प्लान फुलप्रूफ था.
तथ्यों से नहीं हुई छेड़छाड़, सबूत भी नहीं मिटे: एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि 22 सितंबर को ये केस पुलिस को हैंडओवर हुआ और उस दिन शाम को लक्ष्मण झूला थाने से आईओ (Investigating Officer) रिजॉर्ट गया और उस कमरे को सील कर दिया, जिसमें अंकिता रहती थी. 23 सितंबर को सुबह 9 बजे एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी) की टीम रिजॉर्ट पहुंची. एफएसएल टीम ने अंकिता के पूरे कमरे की वीडियो रिकॉर्डिग की. साथ ही वहां से सभी साक्ष्य और सबूत एकत्र किए.

एसपी शेखर सुयाल ने कहा कि ये बात इसलिए बताई जा रही है कि क्योंकि बार-बार कहा जा रहा है कि सबूतों को नष्ट किया गया है, ऐसा कुछ नहीं हुआ है. उन ही सबूतों और रिकॉर्डिग को ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया और हाईकोर्ट में जो याचिका लगाई गई थी, वहां भी दिखाया गया. आखिर में इस बेस पर तीनों आरोपी दोषी साबित हुए और ट्रायल कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा भी सुनाई.
आरोपियों की चैट में आया था वीआईपी का जिक्र: एसपी शेखर सुयाल ने बताया कि किस तरह उन्होंने इस केस में एसआईटी टीम में रहकर जांच की. जांच के दौरान ही गिरफ्तार आरोपियों में से दो दोस्तों के बीच एक चैट से वीआईपी का भी जिक्र आया, जिसके बाद एसआईटी टीम ने अंकिता के दोस्त से पूछा तो उसने भी बताया था कि 16 सितंबर को रिजॉर्ट में एक व्यक्ति सुरक्षाकर्मियों के साथ था, जिसका पूरा हुलिया भी दोस्त ने बताया.
इस बात को रिजॉर्ट के स्टाफ ने भी कंफर्म किया, जिसके आधार पर एसआईटी टीम में नोएडा में रहने वाले धर्मेंद्र उर्फ प्रधान नाम के व्यक्ति तक पहुंची, जिनसे एसआईटी टीम ने बातचीत की और उनके बयानों को पुलिस ने विवेचना में शामिल किया.
शेखर सुयाल ने जानकारी देते हुए बताया कि जब एसआईटी टीम ने जब धर्मेंद्र उर्फ प्रधान से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि वह किसी जमीन के सिलसिले में इस क्षेत्र में पहुंचे थे और कुछ देर के लिए रिजॉर्ट में खाना खाने के लिए रुके थे, जिस पर एसआईटी ने क्रॉस चेक किया. धर्मेंद्र उर्फ प्रधान द्वारा बताई गई सभी बातों को सही पाया गया.
शेखर सुयाल ने बताया कि इसके बाद भी डीआईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में जांच कर रही एसआईटी टीम ने रिजॉर्ट में घटना से पहले आने वाले लोगों को भी चेक किया कि वह किस दिन आए थे, किस लिए आए थे और कब तक रुके रहे. इस पर एसआईटी टीम ने पूरी जांच की, जिसमें यह पाया गया कि नोएडा में रहने वाला व्यक्ति एक जमीन के सिलसिले में किसी से मिलने पहुंचा था और उसे व्यक्ति के द्वारा रिजॉर्ट में खाने के लिए लाया गया था. उन्होंने कहा कि इसके अलावा सोशल मीडिया में जितने भी नाम आ रहे थे. उन पर भी एसआईटी टीम ने अपनी जांच की, लेकिन कुछ भी सामने नहीं आया.
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