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'यह वासना नहीं प्रेम था', उत्तराखंड हाईकोर्ट का यूनिक डिसिजन, फैसले से बसाया उजड़ा परिवार, जानिये कैसे

नैनीताल हाईकोर्ट ने पॉक्सो के मामले को रद्द करते हुए आरोपी को राहत दी. साथ ही यूनिक डिसिजन भी दिया.

NAINITAL HIGH COURT
नैनीताल हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By PTI

Published : February 25, 2026 at 1:44 PM IST

2 Min Read
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देहरादून: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चे के संरक्षण (पॉक्सो) के मामले में कार्यवाही रद्द कर दी. साथ ही इस बात पर गौर किया कि आरोपी और पीड़िता अब कानूनी रूप से विवाहित है. उनका एक बच्चा भी है. महिला उसके (आरोपी के) साथ रहना चाहती है. न्यायमूर्ति आलोक मेहरा ने कहा कि मुकदमे को जारी रखने या आरोपी को जेल भेजने की कार्रवाई परिवार को अस्त-व्यस्त कर देगी. ऐसी परिस्थितियों में, कार्यवाही जारी रखने की अनुमति देना न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करेगा.

अदालत ने पाया कि अपराध प्रेम से प्रेरित था, न कि वासना से, और पीड़िता अपने पति के साथ शांतिपूर्वक रहना चाहती थी. यह मामला चंपावत के विशेष सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित था. आरोपी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अपने खिलाफ जारी आरोपपत्र और समन को रद्द करने का अनुरोध किया था. याचिका में कहा गया था कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था. उन्होंने शादी कर ली थी. इसमें यह भी बताया गया कि अब उनका एक बच्चा भी है.

पीड़िता की ओर से यह प्रस्तुत किया गया कि वह बालिग है. आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि से भी इसकी पुष्टि हुई. याचिका में कहा गया कि पीड़िता ने 12 मई, 2023 को अपनी मर्जी से आरोपी से शादी की थी. 27 अक्टूबर, 2025 को एक बेटे का जन्म हुआ.

अभियोजन पक्ष ने समझौते की अर्जी का विरोध किया. हालांकि, न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकल पीठ ने करुणा और व्यावहारिकता की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा आरोपी और पीड़िता कानूनी रूप से विवाहित हैं. उनका एक बच्चा भी है. ऐसे में उच्च न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो का मामला रद्द कर दिया. कोर्ट ने इस दौरान टिप्पणी भी की.