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चेक बाउंस शिकायतों में व्हाट्सअप, ईमेल से समन भेजने की इजाजत, उत्तराखंड हाईकोर्ट का सर्कुलर

सर्कुलर के अनुसार सॉफ़्टवेयर में एक नया ड्राफ़्ट टेम्प्लेट जोड़ा गया है, जो 'कॉज ऑफ़ एक्शन' से संबंधित लिमिटेशन पीरियड की अपने आप गणना करेगा

UTTARAKHAND HC CIRCULAR
नैनीताल हाईकोर्ट (File Photo- ETV Bharat)
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By PTI

Published : January 6, 2026 at 10:30 AM IST

3 Min Read
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देहरादून/नैनीताल: नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में समन जारी करने को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है. उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि अब राज्य, चेक बाउंस मामलों में ईमेल और व्हाट्सअप (WhatsApp) के जरिए समन जारी कर सकता है.

चेक बाउंस मामले में हाईकोर्ट का सर्कुलर: रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी एक सर्कुलर के अनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि चेक बाउंस मामलों में अब समन सिर्फ पारंपरिक तरीकों से नहीं भेजे जाएंगे. उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स, 2025 के तहत, अब ईमेल, मोबाइल फोन और WhatsApp जैसे मैसेजिंग एप्लिकेशन के जरिए भी समन भेजे जा सकते हैं.

चेक बाउंस शिकायतों में व्हाट्सअप, ईमेल के ज़रिए समन भेजने की इजाजत: हाईकोर्ट के सर्कुलर के अनुसार शिकायत दर्ज करते समय, शिकायतकर्ता को आरोपी व्यक्ति का ईमेल और WhatsApp डिटेल्स देना होगा. साथ ही जानकारी की प्रमाणिकता को प्रमाणित करने वाला एक अनिवार्य हलफनामा भी देना होगा.

ये रहेगी समन भेजने की प्रक्रिया: हर शिकायत के साथ एक तय फॉर्मेट में एक सिनॉप्सिस अटैच करना होगा, जिसे कोर्ट स्टाफ द्वारा कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज किया जाएगा. आरोपी को समन जारी करने से पहले, BNNS की धारा 223 के तहत किसी अतिरिक्त प्रक्रिया की जरूरत नहीं होगी.

ऑनलाइन पेमेंट विकल्प भी शुरू: सर्कुलर में कहा गया है कि सॉफ़्टवेयर में एक नया ड्राफ़्ट टेम्प्लेट जोड़ा गया है, जो 'कॉज ऑफ़ एक्शन' से संबंधित लिमिटेशन पीरियड की अपने आप गणना करेगा. आरोपी को जल्द राहत देने के लिए, कोर्ट ने ऑनलाइन पेमेंट का विकल्प शुरू किया है. समन में अब पेमेंट लिंक के साथ ऑनलाइन पेमेंट सुविधा का साफ तौर पर जिक्र होगा.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पालन में जारी किया सर्कुलर: आरोपी CNR नंबर या केस क्रेडेंशियल डालकर सीधे चेक की रकम जमा कर सकेगा. अगर आरोपी इस सुविधा के जरिए पेमेंट करता है, तो कोर्ट कंपाउंडिंग के आधार पर केस बंद कर सकता है. ये निर्देश संजाबीज तुरी बनाम किशोर एस बरकर मामले में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पालन में जारी किए गए थे.

गलत जानकारी पर हो सकती है दंडात्मक कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि देश भर में लाखों चेक बाउंस मामले पेंडिंग हैं, जिससे न्यायपालिका पर भारी बोझ पड़ रहा है. हाईकोर्ट ने कहा कि गलत ईमेल या व्हाट्सअप (WhatsApp) जानकारी देने पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है.
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