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इजराइल-ईरान युद्ध पर पीएम मोदी के रूख से कांग्रेस नाराज, उठाए सवाल, कहा...पुरानी दोस्ती प्रभावित हुई

पीएम के इजराइल दौरे पर कांग्रेस सवाल उठा रही है और इसे इजराइल के हमलों को अप्रत्यक्ष समर्थन देने वाला बता रही है.

death of Iran's Supreme Leader and the resulting political situation in India
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे दूसरी तस्वीर में बेंजामिन नेतन्याहू और पीएम मोदी (फाइल फोटो) (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : March 2, 2026 at 7:23 PM IST

4 Min Read
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अनामिका रत्ना

नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में मौत ने मध्य पूर्व को युद्ध की आग में झोंक दिया है. ईरानी राज्य मीडिया ने 1 मार्च को उनकी मौत की पुष्टि की, जिसके बाद ईरान ने 40 दिनों का शोक घोषित किया है.

इस घटना का भारत में भी असर देखने को मिल रहा है, जहां शिया समुदाय ने बड़े पैमाने पर शोक सभाएं और विरोध प्रदर्शन किए. वहीं कांग्रेस ने भी इसका विरोध करते हुए कहा है कि युद्ध की औपचारिक घोषणा के बिना ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की लक्षित हत्या निंदनीय है.

इजराइल-ईरान युद्ध पर भारत की राजनीति पर ईटीवी भारत की रिपोर्ट (ETV Bharat)

जबकि सरकार इस मुद्दे पर तटस्थ रहते हुए खामेनेई की मौत पर न कोई खुशी और ना ही कोई समर्थन जताया है. मगर कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) ने रविवार शाम प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में पश्चिम एशिया में विकसित हो रही स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक की. उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे इन घटनाक्रमों से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक और संभव सभी उपाय करें.

मगर इस युद्ध को लेकर देश में उपजते हालात पर सरकार हाई अलर्ट पर जरूर है और वो इस कोशिश में है कि इसका असर देश की राजनीति में ना पड़े और इसका फायदा आनेवाले चुनावों में विपक्षी पार्टियां ना उठा पाएं.

एनडीए सरकार ने खामेनेई की मौत पर न कोई खुशी ना कोई समर्थन जताया है. मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के हालात पर "गंभीर चिंता" का विषय जरूर बताया है और संवाद-कूटनीति से विवाद सुलझाने पर जोर दिया है. सरकार ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है. इस संबंध पीएम ने यूएई के राष्ट्रपति और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात की, और सरकार ने शांति और भारतीयों की निकासी पर फोकस किया है.

जबकि कुछ ही दिन पहले पीएम के इजराइल दौरे पर कांग्रेस सवाल जरूर उठा रही है और इसे गलत समय पर बताते हुए इजराइल के हमलों को अप्रत्यक्ष समर्थन देने वाला बता रही है. कांग्रेस आरोप लगा रही है कि इससे भारत की ईरान के साथ पुरानी दोस्ती प्रभावित हुई है.जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अमेरिका और इजराइल द्वारा युद्ध की औपचारिक घोषणा के बिना ईरान के सर्वोच्च नेता अली हुसैनी खामेनेई की लक्षित हत्या की कड़ी निंदा करती है. यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है और सत्ता परिवर्तन की जबरदस्त कोशिश है."

वहीं कांग्रेस पार्टी ने खामेनेई के परिवार, ईरान के लोगों और वैश्विक शिया समुदाय को गहरी संवेदना व्यक्त की है. कांग्रेस ने भारत सरकार से मध्य पूर्व में संवाद और कूटनीति के जरिए शांति स्थापित करने की भी मांग की है.

वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के हालात को "गंभीर चिंता" का विषय बताते हुए और संवाद-कूटनीति से विवाद सुलझाने पर जोर दिया है. सरकार ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है. जबकि पीएम ने यूएई के राष्ट्रपति और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात की,और शांति और भारतीयों की निकासी संबंधित विषय पर भी बात की है.

भारत तटस्थ रुख अपनाते हुए शांति की अपील कर रहा है, जबकि देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है. स्थिति तेजी से बदल रही है और मध्य पूर्व में अस्थिरता जारी है. सूत्रों की माने तो 9 मार्च से शुरू होने वाले संसद सत्र के दूसरे भाग में सरकार की तरफ से पीएम के इजराइल दौरे पर कोई स्टेटमेंट भी आ सकता है जबकि विपक्ष सरकार पर इससे संबंधित सवाल उठाने और ईरान के समर्थन में सवाल उठाने पर भी तैयारी में हैं.

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