सूरजकुंड मेला 2026: UP पवेलियन में दिखा आस्था और संस्कृति का संगम, दर्शकों को मिल रहा उत्तर प्रदेश घूमने जैसा एहसास
सूरजकुंड मेले में उत्तर प्रदेश पवेलियन में रामलला दर्शन, संस्कृति, हस्तशिल्प और पर्यटन ने दर्शकों को आकर्षित किया.

Published : February 9, 2026 at 10:27 AM IST
फरीदाबाद: फरीदाबाद में आयोजित सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में इस बार उत्तर प्रदेश और मेघालय को थीम स्टेट के रूप में शामिल किया गया है. मेले में उत्तर प्रदेश की भागीदारी खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. प्रदेश ने यहां अपनी समृद्ध संस्कृति, कला, विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया है. उत्तर प्रदेश का भव्य पवेलियन दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, जहां कदम रखते ही लोग प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा पर निकल पड़ते हैं.
भव्य पवेलियन में दिखी UP की सांस्कृतिक झलक: सूरजकुंड मेले के ग्राउंड में उत्तर प्रदेश की ओर से एक भव्य और आकर्षक पवेलियन तैयार किया गया है. इस पवेलियन को पारंपरिक स्थापत्य शैली में सजाया गया है, जिसमें प्रदेश की विविध सांस्कृतिक पहचान झलकती है. दीवारों पर कलात्मक चित्रांकन, पारंपरिक डिज़ाइन और आधुनिक तकनीक का बेहतरीन संयोजन देखने को मिल रहा है. पवेलियन में प्रवेश करते ही दर्शकों को ऐसा अनुभव होता है जैसे वे उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरती पर आ पहुंचे हों.
रामलला की मूर्ति बनी आकर्षण का केंद्र: उत्तर प्रदेश पवेलियन में सबसे बड़ा आकर्षण रामलला की भव्य मूर्ति है. जिस तरह अयोध्या में रामलला विराजमान हैं, उसी स्वरूप की मूर्ति यहां भी स्थापित की गई है. इसके साथ ही गौतम बुद्ध की प्रतिमा भी पवेलियन में स्थापित की गई है. रामलला की मूर्ति के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. जो लोग अयोध्या नहीं जा पाए, वे यहां आकर रामलला के दर्शन कर भावुक नजर आ रहे हैं.

उत्तर प्रदेश टूरिज्म की रीजनल ऑफिसर ने दी जानकारी: ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश टूरिज्म की रीजनल ऑफिसर दीपिका सिंह ने कहा कि, "सूरजकुंड मेले में थीम स्टेट के रूप में शामिल होना प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है. इस बार उत्तर प्रदेश अपनी संस्कृति, विरासत और कला को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत कर रहा है. इसी उद्देश्य से यह पवेलियन तैयार किया गया है, जहां रामलला और गौतम बुद्ध की मूर्तियों के माध्यम से आध्यात्मिक विरासत को दर्शाया गया है."

यूपी के प्रसिद्ध उत्पादों की झलक: दीपिका सिंह ने आगे कहा कि, "उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के उत्पाद लाना संभव नहीं था, लेकिन प्रदेश के चुनिंदा प्रसिद्ध उत्पादों को यहां प्रदर्शित किया गया है. इनमें मुरादाबाद के पीतल के बर्तन, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, भदोही के कालीन सहित अन्य हस्तशिल्प उत्पाद शामिल हैं. ये उत्पाद उत्तर प्रदेश की कारीगरी और आत्मनिर्भर भारत की भावना को दर्शाते हैं."

एलईडी डिस्प्ले से टूरिज्म को मिल रहा बढ़ावा:पवेलियन में कई एलईडी डिस्प्ले लगाए गए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को दिखाया जा रहा है. अयोध्या, काशी, प्रयागराज, मथुरा, वृंदावन, बुंदेलखंड सहित अन्य पर्यटन स्थलों की जानकारी इन डिस्प्ले के माध्यम से दी जा रही है. इससे मेले में आए लोग उत्तर प्रदेश घूमने की योजना बनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं.

मेले में बनाए गए पांच भव्य द्वार: उत्तर प्रदेश पवेलियन के अंतर्गत मेले में पांच विशेष द्वार बनाए गए हैं. इनमें अयोध्या द्वार, प्रयागराज द्वार, काशी द्वार, बुंदेलखंड द्वार और उत्तर प्रदेश द्वार शामिल हैं. ये द्वार प्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को दर्शाते हैं. इसके साथ ही यहां 40 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें हस्तशिल्प और खानपान से जुड़े स्टॉल भी शामिल हैं.
सेल्फी प्वाइंट बने युवाओं की पसंद: पवेलियन में जगह-जगह आकर्षक सेल्फी प्वाइंट बनाए गए हैं. इनमें सुदर्शन चक्र, शंख और ‘आई लव यूपी’ लिखे सेल्फी प्वाइंट खास हैं. यहां युवा, परिवार और पर्यटक तस्वीरें खिंचवाते नजर आ रहे हैं. ये सेल्फी प्वाइंट सोशल मीडिया पर भी खासा चर्चित हो रहे हैं.
दर्शकों ने साझा किया अनुभव: दिल्ली से पवेलियन घूमने आई रेनू ने बताया कि, " यहां आकर उत्तर प्रदेश के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला. रामलला के दर्शन कर मन को शांति मिली." वहीं, एक अन्य दर्शक राजकुमारी ने कहा कि, " मैं अयोध्या नहीं जा पाई थीं, लेकिन यहां आकर रामलला के दर्शन हो गए. पवेलियन देखकर ऐसा लगा जैसे वे खुद उत्तर प्रदेश घूम रही हों.
15 फरवरी तक चलेगा सूरजकुंड मेला: बता दें किसूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट मेले की शुरुआत 31 जनवरी को हुई थी, जो 15 फरवरी तक चलेगा. इस मेले में 50 से अधिक देशों की भागीदारी है. स्टेट पार्टनर के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय शामिल हैं, जबकि कंट्री पार्टनर के रूप में मिस्र देश को चुना गया है. उत्तर प्रदेश का पवेलियन मेले में आस्था, संस्कृति और विरासत का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रहा है.
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