साहिबगंज में बन रहा अनोखा 'वेस्ट टू वंडर पार्क', कबाड़ से सजेगा पर्यावरण शिक्षा का केंद्र
साहिबगंज में कबाड़ को रिसाइकिल कर शानदार कलाकृति का रूप दिया जा रहा है. 3.25 करोड़ की लागत से पार्क तैयार किया जा रहा है.

Published : February 27, 2026 at 6:21 PM IST
रिपोर्ट: शिवशंकर कुमार
साहिबगंज: जिला के जज कॉलोनी के पीछे और भवन प्रमंडल के सामने खाली पड़ी जमीन पर एक अनोखा पार्क बनाया जा रहा है, जो पूरी तरह कबाड़ (स्क्रैप) सामग्री से तैयार किया जा रहा है. जिला प्रशासन की पहल पर थ्री-आर (रिड्यूस, रीयूज, रिसाइकिल) के सिद्धांत पर आधारित यह पार्क 'वेस्ट टू वंडर पार्क' के नाम से जाना जाएगा. यह झारखंड का पहला ऐसा पार्क होगा, जहां लोग न केवल मनोरंजन के लिए आएंगे, बल्कि कचरे के पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा भी ग्रहण करेंगे.
1000 टन से अधिक कबाड़ का उपयोग
पार्क के निर्माण में 1000 टन से अधिक कबाड़ सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है. यहां डायनासोर, मोर, हाथी, बाज जैसे आकर्षक जानवरों की विशाल कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं. इसके अलावा आदिवासी समाज की वेशभूषा, ताड़ के पेड़, सरहूल पर्व की झलकियां और आकर्षक तोरण द्वार भी कबाड़ से ही बनाए जा रहे हैं. पार्क की चारों ओर की दीवारों पर झारखंड की समृद्ध संस्कृति को दर्शाया जाएगा. पूरा प्रोजेक्ट लगभग 3.25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा है.
प्रसिद्ध कलाकार अमृत प्रकाश का कमाल
इस पार्क के निर्माण का जिम्मा मशहूर टेराकोटा और कलाकार अमृत प्रकाश को सौंपा गया है. पिछले छह माह से अधिक समय से कार्य चल रहा है और अभी दो-तीन माह में इसे पूरा करने की उम्मीद है. अमृत प्रकाश ने बताया कि यह पार्क पूरी तरह कबाड़ से बनी कलाकृतियों से तैयार किया जा रहा है. यहां आने वाले सैलानी और छात्र नया संदेश लेकर लौटेंगे. इससे पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझ आएगा. कबाड़ से भी खूबसूरत कलाकृति बनाई जा सकती हैं, यह सीख मिलेगी. यह झारखंड का वंडर पार्क होगा, जिसकी तर्ज पर बिहार, बंगाल या ओडिशा में ऐसा कोई अजूबा नहीं है.

शिक्षा केंद्र बनेगी गैलरी
पार्क में एक विशेष गैलरी भी बनाई जा रही है, जहां साहिबगंज की संस्कृति, वेशभूषा, भाषा, खान-पान, इतिहास, राजमहल की पहाड़ी का उद्गम, पहाड़ों पर जड़ी-बूटियों का महत्व, फॉसिल्स, डायनासोर काल और ज्वालामुखी से संबंधित जानकारी लेखन, चित्र और आवाज के माध्यम से दी जाएगी. यहां बच्चे और सैलानी कबाड़ से बनी कलाकृतियों को देखेंगे, छूकर महसूस करेंगे और सीखेंगे कि फेंकी गई वस्तुओं से कितना सुंदर कुछ बन सकता है.

उपायुक्त का बयान
इस पार्क के बारे में साहिबगंज के उपायुक्त हेमंत सती ने कहा कि कबाड़ से बना यह पार्क कई मायनों में समाज को संदेश देगा. बहुत जल्द इसका उद्घाटन कर आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा. पार्क की देखरेख के लिए एक कमिटी और चैनल बनाया जाएगा. यह शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति लाएगा. बच्चे मोबाइल छोड़कर जमीनी स्तर पर कलाकृतियों को देख अनुभव के साथ सीखेंगे. इससे पॉलीथीन के बजाय जूट के थैले के उपयोग और घरेलू बेकार चीजों के पुन:उपयोग की प्रेरणा मिलेगी.

साहिबगंज में बनाया जा रहा पार्क पर्यावरण संरक्षण, रिसाइक्लिंग और सांस्कृतिक जागरूकता का अनूठा उदाहरण है. जाहिर तौर पर जब बच्चे इस पार्क में आएंगे तो उनके कोमल मन में ये जरूर आएगा कि कैसे पर्यावरण को संरक्षित करना है और चीजों के कैसे रिसाइकिल किया जा सकता है.

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