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गुजराती नववर्ष के पहले दिन गायों को दौड़ाते हैं ग्रामीण, क्या है यह अनोखी परंपरा, जानिए

गुजराती नववर्ष के पहले दिन सुरेंद्रनगर जिले के अदारियाना गांव में गाय दौड़ाने की परंपरा है. गांव के विशिष्ट व्यक्ति का सम्मान किया जाता है.

unique tradition of running cows on first day of Gujarati New Year in Patdi Surendranagar
गुजराती नववर्ष के पहले दिन गायों को दौड़ाते हैं ग्रामीण, क्या है यह अनोखी परंपरा, जानिए (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : October 23, 2025 at 4:45 PM IST

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सुरेंद्रनगर: गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में अदारियाना गांव के ग्रामीण आज भी सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गुजराती नववर्ष के दिन गाय दौड़ाते हैं. इसके अलावा, गांव के सभी जातियों के लोग महादेवजी के मंदिर में इकट्ठा होकर गांव की समस्याओं पर चर्चा करते हैं.

गुजराती नववर्ष के पहले दिन यानी 22 अक्टूबर को, गांव के लोग सबसे पहले अपने-अपने इलाके में मिलते हैं और उस इलाके की मौजूदा समस्याओं पर चर्चा करते हैं. फिर ये सभी लोग गांव के शिव मंदिर में इकट्ठा होते हैं, जिसे गमेरा या दियारो कहते हैं. यह परंपरा अदारियाना गांव की स्थापना के समय से ही चली आ रही है. इस परंपरा के अनुसार, गांव के सभी जातियों के लोग गांव के महादेवजी के मंदिर में एकत्रित होते हैं और गांव की समस्याओं पर चर्चा करते हैं.

गांव के विशिष्ट व्यक्ति का सम्मान
इस बार पांड्या परिवार द्वारा गांव में भागवत सप्ताह का आयोजन किया गया और इस पर चर्चा की गई. साथ ही, चूंकि गांव का एक युवक बीएसएफ में भर्ती हुआ था, इसलिए देश सेवा के लिए गए इस युवक को इस गमेरा में गांव के प्रमुखों द्वारा सार्वजनिक रूप से साल पहनाकर सम्मानित किया गया. परंपरा है कि इस गमेरा में गांव के विशिष्ट व्यक्तियों का सम्मान किया जाता है.

गाय दौड़ाने की परंपरा
इसके बाद पूरा गांव चार ढोल बजाते हुए गांव के भादर में जाता है. वहां गांव के पशुपालक अपनी गायों को सजाते हैं, उनके सींगों पर रंग लगाते हैं और एक कोट में दुपट्टा बांधकर उन्हें गांव के भादर में लाते हैं. पूरे गांव के सभी पशुपालकों की गायों को इकट्ठा किया गया और फिर इन गायों को बार-बार दक्षिण से उत्तर और उत्तर से दक्षिण की ओर दौड़ाया गया.

गौरज पर आधारित शकुन-अपशकुन
ऐसी मान्यता है कि जब गायें दौड़ती हैं और उनकी ओस गांव पर पड़ती है, तो इससे गांव की समृद्धि, खुशहाली और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है. इसी मान्यता के अनुसार, इस बार भी गायों को धूमधाम से दौड़ाया गया और हवा का रुख और गौरज को उड़ते हुए देखकर गांव के बुजुर्गों ने गांव के लिए शुभ शकुनों की भविष्यवाणी की.

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