मैजिकल मशरूम से हो रही जादुई कमाई !, सड़ी-गली लकड़ी पर उगने वाले "गैनोडर्मा" से किसान की चमकी किस्मत
पंचकूला के मोरनी के किसान वीरेंद्र बाजवान गैनोडर्मा मशरूम की खेती कर जहां लाखों रुपए कमा रहे हैं तो वहीं कई अवॉर्ड जीत चुके हैं.

Published : November 22, 2025 at 10:52 PM IST
|Updated : November 22, 2025 at 10:58 PM IST
पंचकूला: हरियाणा के एकमात्र पहाड़ी क्षेत्र मोरनी से आगे 8 किलोमीटर की दूरी पर गांव बड़ियाल में लोगों का जीवन रोगमुक्त बनाने और मरीजों की इम्युनिटी-एनर्जी बढ़ाने के लिए एक किसान अपनी परंपरागत खेती छोड़कर मेडिसिनल मशरूम "गैनोडर्मा" तैयार कर रहे हैं.
सड़ी-गली लकड़ी पर उगने वाला मशरूम : गैनोडर्मा मशरूम को खूबियों के चलते मैजिकल मशरूम भी कहा जाता है. इसे लिंग्जी या रीशी मशरूम के नाम से भी जाना जाता है. इसका उपयोग सदियों से पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता रहा है. ये सड़ी-गली लकड़ी पर उगता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन डी और प्रोटीन सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं.
"गैनोडर्मा मशरूम" से फायदे : मूल रूप से हरियाणा के गोहाना निवासी एवं वर्तमान में मोरनी से आगे गांव बड़ियाल में रह रहे वीरेंद्र बाजवान इस मेडिसिनल "गैनोडर्मा मशरूम" को वैज्ञानिक तरीके से तैयार कर रहे हैं, जिससे वे ना सिर्फ मालामाल हो रहे हैं, बल्कि प्रदेश-देश और विदेश में भी खूब नाम कमा रहे हैं. "गैनोडर्मा मशरूम" को तैयार करने की प्रक्रिया में तापमान का विशेष ध्यान रखा जाता है. बाजवान जिस गैनोडर्मा मशरूम की खेती कर रहे हैं, उससे बने उत्पाद शुगर कंट्रोल करने, कैंसर, सूजन, अल्सर, बैक्टीरियल इंफेक्शन और त्वचा रोगों में लाभकारी माने जाते हैं.

15 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली: किसान वीरेंद्र बाजवान ने मशरूम अनुसंधान निदेशालय, सोलन से प्रशिक्षण हासिल किया है. इसके बाद उन्होंने लगातार कई अनुसंधान और प्रयोग किए और साथ ही कई उत्पादों को तैयार कर उन्हें बाजार में उतारा. चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के स्टार्टअप प्रोग्राम “सफल योजना” के तहत वीरेंद्र बाजवान ने 15 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और विशेष प्रशिक्षण भी हासिल किया.

गैनोडर्मा मशरूम के कंपाउंड्स: वीरेंद्र बाजवान जिस मेडिसिनल गैनोडर्मा मशरूम को तैयार कर रहे हैं, उसमें विभिन्न यौगिक हैं. इनमें गैनोडेरिक अम्ल (एसिड), ल्यूसिडेनिक अम्ल, गैनोल्यूसिडिक अम्ल, ट्राइटरपेनोइड्स, ट्राइटरपेन्स, पॉलीसेकेराइड्स, फेनोलिक घटक, स्टेरोल्स, लॉन्ग चेन फैटी अम्ल मौजूद है. शरीर को रोगमुक्त बनाने में प्रत्येक कंपाउंड की अपनी विशेषता होती है. इसके अलावा गैनोडर्मा में कई प्रकार के विटामिन होते हैं जैसे- ए, सी, डी, बी विटामिन और पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है.

मुख्यमंत्री से मिल चुका सम्मान : वीरेंद्र बाजवान ने गैनोडर्मा मशरूम तैयार करने के लिए करीब पांच साल पहले कोशिशें शुरू की जिसे उन्होंने अपने पारिवारिक सदस्यों की मदद से आगे बढ़ाया. नतीजतन वर्तमान में उनका नाम मशरूम उद्योग के अग्रणी किसानों की सूची में शामिल है. उन्होंने गैनोडर्मा और शिटाके जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों को तैयार कर उन्हें खुले बाजार में उतारा, इससे वे हरियाणा के बाकी किसानों के लिए भी प्रेरणा बने. इसके अलावा पिछले 21 अगस्त 2025 को उद्यमिता दिवस पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें सम्मानित भी किया. इससे पहले भी मुख्यमंत्री कईं बार काम की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित कर चुके हैं. इसके अलावा कालका से विधायक शक्ति रानी शर्मा भी उन्हें सम्मानित कर चुकी हैं.

राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार मिले: बाजवान ने खेती में वर्टिकल सिस्टम और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से एक उदाहरण पेश करते हुए साबित किया है कि सामान्य घरों, कमरों और छतों पर भी मशरूम की सफल खेती की जा सकती है. वे अपनी फार्मिंग के दम पर कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार हासिल कर चुके हैं. उनकी पत्नी दर्शन देवी, बेटा हरिज्ञान और इंजीनियर बेटी स्वाति भी उन्हें मशरूम फार्मिंग में मदद करती है जिसके चलते कई लोग इन्हें मशरूम फैमिली के नाम से भी बुलाने लगे हैं. 11वें मेगा सब्जी एक्सपो 2025 में मुख्यमंत्री, हरियाणा से सम्मान हासिल करने के बाद हाल ही में 79वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश सरकार और प्रशासन द्वारा मशरूम की खेती के प्रति समर्पण और लग्न को देखते हुए कालका, जिला पंचकूला से उन्होंने सम्मान और प्रशस्ति पत्र भी हासिल किया है. हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि यूनिवर्सिटी ने वीरेंद्र बाजवान को प्रगतिशील किसान का प्रथम पुरस्कार दिया है. उन्हें गैनोडर्मा से वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स विकसित करने और प्रचार-प्रसार के लिए सम्मानित किया गया.

“वीएमडब्लयू न्यूट्रासूटिकल” : वीरेंद्र बाजवान ने बताया कि वे "मशरूम माइसीलियम से मशरूम मेडिसिन" तक सभी प्रोडक्ट्स को विश्व स्तरीय बनाने का है. इसके लिए वे नई तकनीकों को अपनाकर बाजारों की मांग के अनुसार अधिकांश मशरूम उत्पाद आम से खास आदमी तक उपलब्ध करवाएंगे. वीरेंद्र बाजवान ने “वीएमडब्लयू न्यूट्रासूटिकल” नाम से कंपनी स्थापित की और फिर नवीन तकनीक और सफल प्रयोग कर औषधीय मशरूम की खेती शुरू की. उन्होंने बताया कि वे गैनोडर्मा, शिटाके और कीड़ा जड़ी से पूरी तरह हर्बल उत्पाद बना रहे हैं. उन्होंने एनर्जी बूस्टर गैनोडर्मा कॉफी के अलावा कई वैल्यू एडेड उत्पाद भी बाजार में उतारे हैं. उन्होंने छोटे स्तर से कारोबार शुरू कर सफल स्टार्टअप खड़ा किया है.

एक लाख छात्रों को दे रहे प्रशिक्षण: हरियाणा सरकार ने वीरेंद्र बाजवान को मशरूम प्रमोशन कमेटी का गैर सरकारी सदस्य नियुक्त किया है. उन्हें कौशल विभाग, हरियाणा की 190 राजकीय आईटीआई में जाकर एक लाख विधार्थियों को गैनोडर्मा मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वीरेंद्र बाजवान विभिन्न यूनिवर्सिटीज में गैनोडर्मा मशरूम पर लेक्चर देते हैं और पीएचडी छात्रों के साथ इसके औषधीय गुणों की जानकारी साझा करते हैं. वे हरियाणा के एक लाख से अधिक किसानों और विधार्थियों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दे चुके हैं. उनकी बेटी स्वाती बाजवान भी परिवार के साथ मिलकर यूनिवर्सिटीज में लेक्चर देती हैं. उनकी कोशिश युवाओं को कृषि उद्यमिता की ओर प्रेरित करना है.

लाखों का मुनाफा: वीरेंद्र बाजवान ने बताया कि उनका उनका लक्ष्य अपने उत्पादों को 28 देशों में निर्यात करने का हैं. इसके लिए कुछ देशों में एक्सपोर्ट प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और अन्यों में लाइसेंस प्रक्रिया जारी है. वे गैनोडर्मा मशरुम पाउडर एक्सट्राक्ट(इक्कीस हजार रुपये प्रति किलो) और अन्य उत्पाद बेचकर मासिक एक लाख रुपये से अधिक कमा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस मॉडल से यह साबित है कि मशरूम खेती से किसान लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं.

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