रिटायर्ड अफसर बने 'जागरूकता की मशाल': डॉ. नकुल कुमार की मुहिम बचा रही है लोगों की जान
अगर हीटर का इस्तेमाल लापरवाही से या गलत तरीके से किया जाए, तो यह फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है.

Published : January 6, 2026 at 9:53 AM IST
|Updated : January 6, 2026 at 10:08 AM IST
संवाददाता धनंजय वर्मा की रिपोर्ट
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की सर्द रातें जितनी ठिठुरन भरी होती हैं, उतनी ही खतरनाक भी होती हैं. खासकर उन लाखों मजदूरों के लिए जो खुले आसमान या तंग, बंद कमरों में दिनभर की मेहनत के बाद रात गुजारते हैं. सर्दी से बचने के लिए अंगीठी, कंडी या हीटर जलाकर सो जाना उनके लिए आम बात है, लेकिन यही आदत कई बार मौत का कारण भी बन जाती है. हर साल दिल्ली समेत देशभर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां आग लगने या धुएं से दम घुटने से मजदूरों की जान चली जाती है.
इसी खामोश खतरे के खिलाफ एक जागरूकता की मशाल लेकर आगे आए हैं डॉ. नकुल कुमार तरुण जो एक रिटायर्ड गवर्नमेंट ऑफिसर होने के बाद अब जोन फोर सॉल्यूशन नाम के संगठन के माध्यम से समाज सेवा में जुटे हैं. दिल्ली फायर सर्विस के साथ मिलकर वह मजदूर वर्ग को आग से बचाव के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाए हुए हैं.
इसलिए बनती है अंगीठी जानलेवा
डॉ. नकुल बताते हैं कि बंद कमरे में जलती आग ऑक्सीजन को खत्म कर देती है. कमरे में सिर्फ कार्बन डाइऑक्साइड व कार्बन मोनोऑक्साइड बचती है. इससे व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और वह नींद में ही दम तोड़ देता है. कई बार ढीले कपड़ों या कंबल में आग पकड़ लेती है अथवा हीटर को बिस्तर के पास रखने से धीरे-धीरे आग फैल जाती है. ये आग के हादसे सिर्फ लापरवाही ही नहीं, बल्कि जानकारी की कमी का नतीजा हैं.
लेबर चौकों से शुरू हुई जागरूकता
इस मुहिम के तहत सुबह-सुबह दिल्ली के लेबर चौकों, झुग्गी वाले इलाकों और अस्थायी मजदूर बस्तियों में जाकर लोगों को समझाया जा रहा है. अब तक करीब 1500 से 1700 स्पॉट्स पर पहुंचकर हजारों मजदूरों को सीधे तौर पर आग से बचाव के लिए जागरूक किया जा चुका है. वॉलंटियर्स सरल भाषा में बताते हैं कि क्या करना है और क्या नहीं करना है, जिससे बात सीधे समझ में आ जाए.

दिल्ली फायर सर्विस का तकनीकी सहयोग
दिल्ली फायर सर्विस जागरूकता के इस अभियान की रीढ़ है. फायर सर्विस के अनुभवी अधिकारी तकनीकी रूप से प्रमाणित जानकारी व सामग्री उपलब्ध कराते हैं. कहां ज्यादा हादसे हो रहे हैं, किस तरह की सावधानियां सबसे जरूरी हैं. उसी डेटा के आधार पर सबसे ज्यादा जोखिम वाली कम्युनिटी को जागरूकता के लिए टारगेट किया जा रहा है.

अब ये मुहिम बनेगी और बड़ी
डॉ. नकुल का लक्ष्य इस अभियान को लेकर यहीं रुकने का नहीं है. आने वाले समय में 2000 से 2500 और स्पॉट्स तक पहुंचने की योजना बनाई है. इसके लिए दिल्ली डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए), सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स और आपदा मित्र को भी जोड़ा जा रहा है. योजना ये है कि एक दिन, एक साथ, हजारों लोग दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में खड़े होकर आग से बचाव का संदेश दें, जिससे इसका असर एक साथ और ज्यादा हो.

जरूरी सावधानियां, जो बचा सकती हैं जान
- बंद कमरे में कभी भी अंगीठी, कंडी या हीटर जलाकर न सोएं.
- हीटर को बिस्तर से कम से कम तीन फीट दूर रखें.
- पर्दों, कंबलों व सिंथेटिक सामान से हीटर दूर रखें.
- एक ही प्लग में कई भारी इलेक्ट्रिक उपकरण न लगाएं.
- गाड़ी में हीटर ऑन कर न सोएं, इससे कार्बन मोनोऑक्साइड से मौत हो सकती है.
जागरूकता ही असली सुरक्षा
यह मुहिम सिर्फ आग से बचाव की ही नहीं है, बल्कि मजदूरों के जीवन को सम्मान व सुरक्षा देने की कोशिश है. जब जानकारी जमीन तक पहुंचती है तभी हादसे रुकते हैं. दिल्ली फायर सर्विस व समाजसेवियों की यह साझी पहल दिखाती है कि अगर इरादा मजबूत हो तो ठंड की रातों में भी जिंदगी की लौ बुझने से बचाई जा सकती है.

सावधानी से बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है
डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक का कहना है कि, “दिल्ली फायर सर्विस द्वारा जोन फोर सॉल्यूशन के साथ मिलकर सर्दियों में चलाया जा रहा यह जागरूकता अभियान लोगों को आग से जुड़ी दुर्घटनाओं से बचाने का उद्देश्य रखता है. ठंड के मौसम में लोग हीटर, अंगीठी या कंडी जैसे साधनों का उपयोग करते हैं जो कई बार जानलेवा साबित होते हैं. हम अपील करते हैं कि सभी लोग बंद कमरों में आग जलाकर न सोएं, विद्युत उपकरणों को सुरक्षित दूरी पर रखें व ओवरलोडिंग से बचें. थोड़ी-सी सावधानी से बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है.”

