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बजट 2026: आपके रसोई गैस और गाड़ियों के ईंधन पर क्या हुआ फैसला? यहां समझें सब कुछ

केंद्रीय बजट 2026-27 ने भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र के लिए एक नपा-तुला संदेश दिया है, एक्सपर्ट से समझिये.

Union Budget 2026
बजट का विश्लेषण. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 2, 2026 at 1:47 PM IST

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Updated : February 2, 2026 at 2:07 PM IST

8 Min Read
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सुरभि गुप्ता.

नई दिल्ली: बजट 2026-27 में पेट्रोलियम सेक्टर के लिए बड़े नीतिगत बदलावों के बजाय क्लीन फ्यूल और उपभोक्ता राहत पर ध्यान दिया गया है. सरकार ने पेट्रोल-डीजल को फिलहाल GST से बाहर रखा है और तेल कंपनियों के निजीकरण पर भी चुप्पी साधी है. हालांकि, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को बढ़ावा देने के लिए टैक्स में छूट दी गई है और तेल कंपनियों (OMCs) का घाटा कम करने के लिए बजट का प्रावधान किया गया है. जानकारों के अनुसार, यह बजट ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की एक कोशिश है.

कंप्रेस्ड बायोगैस मिश्रण को बढ़ावा

गैस क्षेत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक सीएनजी या एलपीजी में मिलाए जाने वाले कंप्रेस्ड बायोगैस हिस्से पर 'केंद्रीय उत्पाद शुल्क' से छूट देना है. वरिष्ठ ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. सुधीर बिष्ट के अनुसार, यह एक सार्थक प्रोत्साहन है जो सीधे तौर पर हरित गैस मिश्रण के आर्थिक लाभों में सुधार करता है.

UNION BUDGET 2026
ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. सुधीर बिष्ट. (ETV Bharat)

डॉ. बिष्ट ने ईटीवी भारत को बताया, "प्राकृतिक गैस पर इसके मूल्य का लगभग 14% उत्पाद शुल्क लगता है, जो मौजूदा उपभोक्ता कीमतों पर लगभग 15 रुपये प्रति किलोग्राम बैठता है. यदि किसी मिश्रण में 10% कंप्रेस्ड बायोगैस और 90% सीएनजी है, तो बायोगैस वाले हिस्से पर उत्पाद शुल्क नहीं लगाया जाएगा. यह एक बड़ा प्रोत्साहन है."

उन्होंने समझाया कि यह कदम ईंधन की लागत को प्रभावी ढंग से कम करता है और साथ ही उत्पादकों को 'सतत' ढांचे के तहत सीबीजी परियोजनाओं में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है.

सामान्य बायोगैस से अलग क्यों है CBG

डॉ. बिष्ट के अनुसार यह समझना महत्वपूर्ण है कि कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) वास्तव में क्या है और यह क्यों मायने रखती है. उन्होंने कहा, कंप्रेस्ड बायोगैस सामान्य बायोगैस के समान नहीं है, जहां कच्ची बायोगैस में आमतौर पर केवल 45-50% मीथेन होती है और इसका ऊर्जा घनत्व कम होता है. वहीं CBG एक उन्नत ईंधन है जिसमें लगभग 90% मीथेन होती है, जो इसे सीएनजी के बराबर बनाती है.

CBG का उत्पादन कृषि अवशेष, गोबर, गन्ने की प्रेस मड, सीवेज कीचड़ और नगर पालिकाओं के गीले कचरे जैसे जैविक कचरे से किया जाता है. इन कच्चे माल को कच्ची बायोगैस बनाने के लिए 'एनारोबिक डाइजेस्टर्स' में संसाधित किया जाता है, जिसे बाद में कार्बन डाइऑक्साइड और नमी हटाकर शुद्ध किया जाता है. इसके परिणामस्वरूप प्राप्त उच्च-मीथेन गैस को संकुचित (compress) किया जाता है और CNG की तरह ही उच्च दबाव पर संग्रहीत किया जाता है.

डॉ. बिष्ट ने कहा कि बचा हुआ कचरा पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसे जैविक उर्वरक के रूप में पुन: उपयोग किया जा सकता है. उन्होंने आगे कहा कि CBG स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन का दोहरा लाभ प्रदान करती है. उन्होंने उल्लेख किया कि CBG का उपयोग वाहनों, उद्योगों और घरों में किया जा सकता है. हालांकि शुरुआती वर्षों में मिश्रण का स्तर 2-3% के आसपास मामूली रह सकता है, लेकिन नीतिगत स्पष्टता एक मजबूत दीर्घकालिक संकेत देती है.

LPG मूल्य सीमा और तेल कंपनियों का घाटा

बजट में परिवारों को एलपीजी कीमतों के झटकों से बचाने की सरकार की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया गया है. IOC, BPCL और HPCL जैसी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा झेले जा रहे एलपीजी घाटे की आंशिक भरपाई के लिए 30,000 करोड़ का फंड सुरक्षित रखा गया है.

डॉ. बिष्ट ने समझाया कि एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेष रूप से 'सऊदी अरामको' की अनुबंध कीमतों से जुड़ी होती हैं. जिनमें हर महीने उतार-चढ़ाव होता है. आयातित एलपीजी की लागत में माल ढुलाई, बीमा, पोर्ट हैंडलिंग, बॉटलिंग, सिलेंडर लॉजिस्टिक्स, वितरक कमीशन और टैक्स भी शामिल होते हैं.

उन्होंने कहा, "वर्तमान में तेल कंपनियों के लिए 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की लागत लगभग 1,100–1,200 रुपये है, जबकि उपभोक्ता के लिए इसकी कीमत करीब 900 रुपये है. प्रति सिलेंडर 200-250 रुपये का यह अंतर अक्षमता या सब्सिडी की चोरी नहीं है, बल्कि कीमतों की अस्थिरता है.

सरकार वैश्विक झटकों का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ने से रोकने के लिए खुदरा कीमतों को सीमित रखती है, जिसके कारण तेल कंपनियों को घाटा होता है. हालांकि 30,000 करोड़ रुपये का आवंटन आंशिक राहत देता है. डॉ. बिष्ट ने नोट किया कि कुल घाटा 42,000 करोड़ से 53,000 करोड़ रुपये के बीच होने का अनुमान है. जिसका मतलब है कि कंपनियां अभी भी 10,000-20,000 करोड़ रुपये का नुकसान खुद उठाएंगी.

उन्होंने कहा, "यह तेल कंपनियों के लिए शुद्ध नुकसान है, लेकिन आप इसके लिए पूरी तरह सरकार को दोष नहीं दे सकते. अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतें बेहद अस्थिर हैं. कम से कम यह फंड नुकसान के एक हिस्से को कम करता है." उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में कीमतों में संशोधन, विशेष रूप से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के लिए, या वैश्विक कीमतों में नरमी इस अंतर को पाटने में मदद कर सकती है.

GST से बाहर रखे जाने पर निराशा

पेट्रोलियम उत्पादों को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे से बाहर रखा गया है. वर्तमान में, पेट्रोलियम उत्पाद केंद्रीय उत्पाद शुल्क (central excise duty), सीमा शुल्क (customs duty) और राज्य वैट (VAT) के एक जटिल मिश्रण के अधीन हैं, जिससे कीमतें बढ़ने पर केंद्र और राज्यों के बीच अक्सर एक-दूसरे पर दोषारोपण होता रहता है.

डॉ. बिष्ट ने कहा, "मुझे उम्मीद थी कि वित्त मंत्री कम से कम कोई संकेत देंगी." उन्होंने इस कमी को एक मामूली निराशा बताते हुए कहा, "GST से पारदर्शिता और स्पष्टता आएगी. अभी दोनों पक्ष एक-दूसरे को दोष देते हैं." BPCL या HPCL जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के निजीकरण की योजनाओं का भी कोई संकेत नहीं मिला, जिसकी कुछ विश्लेषकों ने उम्मीद की थी.

विनिर्माण आधारित ऊर्जा संक्रमण

जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) से हटकर, बजट ने विनिर्माण को केंद्र में रखते हुए भारत के व्यापक ऊर्जा संक्रमण के विजन को और मजबूत किया है. सोलेक्स एनर्जी लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. चेतन शाह ने कहा कि बजट ने बैटरी, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों, महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण और परमाणु बुनियादी ढांचे के लिए सीमा शुल्क में छूट बढ़ाकर दीर्घकालिक नीतिगत स्पष्टता प्रदान की है.

शाह ने कहा, "यह स्पष्ट रूप से विनिर्माण को भारत के ऊर्जा संक्रमण के केंद्र में रखता है." उन्होंने आगे कहा कि इन उपायों से घरेलू मूल्यवर्धन और वैश्विक स्तर के विनिर्माण में तेजी आएगी.

उन्होंने उल्लेख किया कि सौर ऊर्जा को स्टोरेज के साथ एकीकृत करने और उन्नत विनिर्माण एवं अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए समर्थन मिलने से "मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड" के भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलती है. शाह ने कहा, "यह बजट इस बात को स्वीकार करता है कि ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा का प्रसार और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं."

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का कहना है कि बजट 2026-27 पेट्रोलियम क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी भले न हो, लेकिन यह एक स्पष्ट नीतिगत दिशा प्रदान करता है. कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को दिया गया बढ़ावा भारत के स्वच्छ ईंधन रोडमैप को मजबूत करता है, जबकि एलपीजी (LPG) घाटे के लिए वित्तीय सहायता वैश्विक अनिश्चितता के दौर में उपभोक्ताओं की रक्षा करती है.

हालांकि जीएसटी (GST) में शामिल करने और संरचनात्मक पुनर्गठन जैसे गहरे सुधार अभी भी लंबित हैं, लेकिन यह बजट निरंतरता, व्यावहारिकता और एक अधिक टिकाऊ ऊर्जा मिश्रण की ओर निरंतर बदलाव का संकेत देता है.

जैसा कि डॉ. बिष्ट ने निष्कर्ष निकाला, "पेट्रोलियम क्षेत्र और देश के लिए यह एक अच्छा बजट है. यह स्वच्छ ईंधन का समर्थन करता है, कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रबंधन करता है और नीतिगत स्पष्टता देता है, भले ही कुछ बड़े सुधारों के लिए इंतजार करना पड़े."

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Last Updated : February 2, 2026 at 2:07 PM IST