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म्यांमार में उत्तराखंड के दो युवकों को बनाया बंधक, करवाई जा रही थी साइबर ठगी, दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज

उत्तरकाशी के दो युवकों को म्यांमार में बंधक बनाकर साइबर फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया गया. डंकी रूट से म्यांमार ले जाया गया था.

Uttarkashi young men held hostage
कॉन्सेप्ट इमेज (PHOTO- ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 10, 2026 at 9:46 PM IST

4 Min Read
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देहरादून (उत्तराखंड): उत्तरकाशी के दो युवकों को नौकरी का झांसा देकर म्यांमार में बंधक बनाने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि दोनों युवकों को डंकी रूट से म्यांमार ले जाया गया. इसके बाद साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए अलग-अलग फर्जी फेसबुक आईडी में उनकी फोटोग्राफ लगाने का काम करवाया गया. किसी तरह से युवक, ठगों के चंगुल भाग निकले और एनजीओ से संपर्क किया. इसके बाद दोनों सही सलामत अपने घर पहुंचे. पीड़ित की शिकायत के बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

दरअसल, उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ निवासी यशपाल बिष्ट ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दो शिकायत दर्ज कराई है. जिसमें उन्होंने बताया कि उनके परिवार की पारिवारिक स्थिति काफी समय से खराब चल रही थी. जून 2025 को उत्तरकाशी का रहने वाला उनका मित्र कन्हैया बिल्जवाण मिला. इस दौरान यशपाल ने अपनी पारिवारिक स्थिति के बारे में बताया तो उसने दिल्ली में रहने वाले उसके चाचा केशव बिल्जवाण के बारे में जानकारी. साथ ही कहा वे विदेशों में नौकरी दिलवाने का काम करते हैं.

यशपाल ने केशव से व्हाट्सएप पर संपर्क किया तो केशव ने बताया कि अगर पासपोर्ट बना हुआ है तो वो जल्द विदेश जा सकता है. उसके बाद केशव ने जूम एप का एक लिंक भेजा और कहा कि नौकरी की बात हो गई है और इस लिंक के माध्यम से इंटरव्यू लिया जाएगा. एप का लिंक खोला तो उस पर तीन लोग जुड़े हुए थे. जिसमें केशव के अलावा दो अन्य विदेशी लोगों ने अंग्रेजी में उनका इंटरव्यू लिया.

कुछ दिनों बाद केशव बिल्जवाण ने फिर फोन किया और बताया कि 26 जून 2025 को दिल्ली से बैंकाक जाना है. ये कहकर यशपाल को दिल्ली बुलाया गया. 25 जून 2025 को यशपाल अपने दोस्त मनीष पंवार और कन्हैया के साथ दिल्ली पहुंचा. जहां केशव बिल्जवाण मिला और उनसे 13-13 हजार रुपए टिकट के मांगे. 26 जून 2025 को केशव ने यशपाल और मनीष पंवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर छोड़ा और एक शिवम नाम के व्यक्ति की जानकारी दी.

पहले बैंकॉक फिर जंगल के रास्ते ले जाया गया म्यांमार: साथ ही कहा कि शिवम ही बैंकॉक में सभी व्यवस्था करेगा. इसके बाद वो बैंकॉक एयरपोर्ट पहुंचा, जहां शिवम की ओर से भेजे गए एक व्यक्ति उन्हें लेने आया. वहां से वो व्यक्ति उन्हें मैसोट ले गया और उस रात मैसोट के एक होटल में रुकवाया. यहां उन्हें कुछ ठीक नहीं लग रहा था तो उन्होंने शिवम से बात की.

चीन के लोगों ने साइबर ठगी के काम में लगाया: जिस पर शिवम का कहना था कि डरने की जरूरत नहीं है. दूसरे दिन एक व्यक्ति जंगल के रास्ते म्यांमार ले गया. जहां पर डांगयांग में सुपना कंपनी में उन्हें छोड़ा गया. वहां चीन के व्यक्ति और एक अन्य भारतीय व्यक्ति ने उन्हें काम की जानकारी दी और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए.

28 जून को उन्हें काम पर बुलाया गया और फेसबुक एडिटिंग का काम सिखाया गया. उसके बाद फेसबुक आईडी पर अलग-अलग फोटोग्राफ लगाकर फर्जी फेसबुक आईडी बनाने को कहा गया. उन्होंने कुछ दिनों तक तो काम किया, लेकिन बाद में उन्हें गड़बड़ी लगने लगी. पीड़ित के अनुसार, जब उन्होंने काम से इनकार किया तो उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया गया. कई दिनों तक एक ही भवन के अंदर उन्हें कैद करके रखा गया.

उन्होंने बताया कि ऑफिस को चीन के लोग ही नियंत्रित करते थे. कुछ समय बाद वहां पर आर्मी के साथ लड़ाई होने लगी तो चीन के लोग वहां से भाग गए. मौका मिला तो वो भी वहां से भाग निकले. उसके बाद वो म्यांमार में भटकने लगे तो उन्हें एक एनजीओ के बारे में पता लगा तो एक महीने वो उसी एनजीओ में रहे. कुछ समय बाद भारतीय दूतावास उन्हें वहां से निकाल कर भारत लाए.

"पीड़ित की तहरीर के आधार पर आरोपित केशव बिजल्वाण और शिवम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है."- नवनीत भुल्लर, एसएसपी एसटीएफ, उत्तराखंड

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