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गिरफ्तारी के दो महीने बाद निदा खान को राहत, दानिश शेख की जमानत याचिका खारिज

लोक अभियोजक विजय गायकवाड़ तथा पीड़िता के वकील मिलिंद कुरकुटे और नितिन पंडित ने दोनों आरोपियों की जमानत का विरोध किया.

Two months after arrest, TCS case accused Nida Khan gets bail from Nashik court
निदा खान (फाइल फोटो) (ETV Bharat)
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By PTI

Published : July 6, 2026 at 7:44 PM IST

2 Min Read
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नासिक (महाराष्ट्र): नासिक की एक अदालत ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की कर्मचारी निदा खान को यहां स्थित कंपनी की शाखा में कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण से जुड़े मामलों में से एक में सोमवार को जमानत दे दी. उसे गिरफ्तारी के करीब दो महीने बाद यह राहत मिली है.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (नासिक रोड कोर्ट) के जी जोशी ने निदा खान को जमानत दी, लेकिन सह-आरोपी दानिश शेख की जमानत याचिका खारिज कर दी. निदा खान की ओर से अधिवक्ता राहुल कासलीवाल ने मुख्य रूप से इस आधार पर जमानत मांगी कि वह गर्भवती है. लोक अभियोजक विजय गायकवाड़ तथा पीड़िता के वकील मिलिंद कुरकुटे और नितिन पंडित ने दोनों आरोपियों की जमानत का विरोध किया.

अभियोजन पक्ष का कहना था कि जांच के दौरान यौन शोषण और धर्म बदलने के लिए मजबूर किए जाने के साक्ष्य सामने आए हैं. अभियोजन के अनुसार, दानिश शेख ने अपनी सहकर्मी एवं पीड़िता को धर्मांतरण के उद्देश्य से एक इस्लामी पुस्तक और बुर्का दिया था.

उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि पीड़िता का जानबूझकर यौन उत्पीड़न किया गया और उसका धर्म बदलवाने की कोशिश की गई. अभियोजन ने यह भी दावा किया कि आरोपी यह जानते हुए कि पीड़िता अनुसूचित जाति से है, उसका धर्मांतरण करने का प्रयास कर रहे थे.

यह मामला देवलाली कैंप पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 (छलपूर्वक यौन संबंध बनाना), 65 (यौन उत्पीड़न) और 299 (धार्मिक भावनाएं आहत करना) के तहत दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है. दोनों पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं भी लगाई गई हैं.

नासिक पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) टीसीएस की नासिक इकाई में महिला कर्मचारियों के कथित शोषण, जबरन धर्मांतरण के प्रयास, धार्मिक भावनाएं आहत करने, उत्पीड़न और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े कुल नौ मामलों की जांच कर रहा है.

मामला सामने आने के बाद टीसीएस ने कहा था कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और दबाव को बिल्कुल न बर्दाश्त करने की नीति लंबे समय से अपनाए हुए है और नासिक कार्यालय में कथित यौन उत्पीड़न में शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है.

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