आजादी के बाद से था सड़क बनने का इंतजार! मंझलाडीह गांव के दो भाइयों ने जमीन दान कर पेश की मिसाल
धनबाद के मंझलाडीह गांव के दो भाईयों ने सड़क के लिए अपनी जमीन दान कर दी. रिपोर्ट- नरेंद्र निषाद.

Published : September 2, 2026 at 9:08 PM IST
धनबाद: आज के दौर में जमीन के छोटे से टुकड़े भी कई बार रिश्तों पर भारी पड़ जाते हैं. जमीन विवाद में कहीं परिवारों के बीच दुश्मनी तक हो जाती है, तो कही मामला मारपीट और गोलीबारी तक पहुंच जाता है, लेकिन धनबाद के मंझलाडीह गांव से सामने आई तस्वीर इन सबके बीच एक अलग और सकारात्मक कहानी बयां कर रही है.
दो भाईयों ने मिलकर दी 5 डिसमिल जमीन दान
यहां दो भाइयों ने गांव के विकास के लिए अपनी रैयती जमीन दान कर दी. करीब पांच डिसमिल जमीन, जिसकी कीमत लगभग 10 लाख रुपये है. सड़क निर्माण के लिए प्रहलाद हाजरा और उनके भाई प्रशुराम हाजरा ने जरा भी संकोच नहीं किया. उनका कहना है कि यदि उनकी जमीन से पूरे गांव का रास्ता आसान हो सकता है, तो इससे बड़ा संतोष और क्या होगा.
यह तस्वीर है धनबाद के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के पंडुकी पंचायत स्थित मंझलाडीह गांव की और यह सिर्फ सड़क निर्माण की तस्वीर नहीं है. यह बदलती सोच की तस्वीर भी है. एक तरफ जमीन के छोटे से टुकड़े के लिए विवाद, तनाव और हिंसा की खबरें अक्सर सामने आती हैं. वही इसी समाज में ऐसे लोग भी हैं, जो अपनी लाखों रुपये की जमीन दूसरों की सुविधा के लिए दान कर देते हैं.
गांव में था पक्की सड़क का अभाव
मंझलाडीह के हाजरा टोला में आजादी के बाद से ही पक्की सड़क का अभाव था. सड़क निर्माण के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण सालों से लोगों की परेशानी हो रही थी. गांव के लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए कच्चे रास्ते का सहारा लेना पड़ता था.
गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने में होती थी परेशानी
बारिश में रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती थी. सबसे ज्यादा परेशानी तब होती थी, जब गांव में कोई बीमार पड़ता था या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत होती थी. गांव तक वाहन नहीं पहुंच पाते थे. मरीज को खाट पर लादकर, कंधे पर उठाकर या गोद में लेकर लिंक रोड तक पहुंचाना पड़ता था, यानी जिस समय इलाज के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, उस समय गांव के लोगों को सड़क के अभाव में लंबा संघर्ष करना पड़ता था.
सड़क बनने से मिलेगी राहत
स्थानीय महिला चंपा देवी बताती है कि गर्भवती महिलाओं को काफी दिक्कत होती थी, उन्हें खाट पर लादकर लिंक रोड तक ले जाना पड़ता था. गाड़ियां गांव तक नहीं पहुंच पाती थीं. सड़क बन जाने से लोगों को बहुत राहत मिलेगी.
ग्रामीणों की इस परेशानी को देखते हुए सड़क निर्माण की कोशिश शुरू हुई, लेकिन रास्ते में सबसे बड़ी अड़चन जमीन थी. सरकारी जमीन नहीं होने के कारण सड़क का निर्माण आगे नहीं बढ़ पा रहा था, ऐसे में हाजरा परिवार ने वह काम किया, जिसकी उम्मीद शायद किसी ने नहीं की थी.

सड़क के लिए 10 लाख की जमीन दान
प्रहलाद हाजरा और उनके भाई प्रशुराम हाजरा ने अपनी रैयती जमीन सड़क निर्माण के लिए दान करने का फैसला किया. दोनों भाइयों ने मिलकर करीब पांच डिसमिल जमीन दी. इस जमीन की कीमत करीब दो लाख रुपये प्रति डिसमिल बताई जा रही है, यानी करीब 10 लाख रुपये मूल्य की जमीन सड़क निर्माण के लिए दान कर दी गई. ऐसे समय में करीब 10 लाख रुपये की जमीन को गांव के लिए दान कर देना, अपने आप में बड़ी बात है. यह सिर्फ जमीन का दान नहीं, यह सोच का दान है.
लोगों की जिंदगी आसान बनाने की पहल
यह सिर्फ सड़क के लिए जमीन देना नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों की जिंदगी आसान बनाने की पहल है. जमीन दान देने वाले प्रहलाद हाजरा ने बताया कि आजादी के बाद से गांव में सड़क नहीं है. सरकारी जमीन नहीं रहने के कारण सड़क नहीं बन पा रही थी. मुखिया के पास सड़क निर्माण का प्रस्ताव रखा और अपनी जमीन दान देने की बात कही.

गांव की जरूरत को देखते हुए दान की जमीन
इसके बाद हम दोनों भाइयों ने मिलकर पांच डिसमिल जमीन दान दी. आगे भी जरूरत पड़ी तो सहयोग करेंगे. प्रहलाद हाजरा और उनके भाई ने सिर्फ जमीन देकर अपना दायित्व खत्म नहीं किया है. उनका कहना है कि अगर सड़क निर्माण में आगे भी जमीन की जरूरत पड़ती है, तो वे अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करेंगे, यानी करीब 10 लाख रुपये की जमीन देने के बाद भी उनका कहना है कि गांव की जरूरत सबसे पहले है.
भाईयों के परिजनों ने किया फैसले का स्वागत
परिवार की महिलाओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है. प्रशुराम हाजरा की बड़ी बहू अलवा देवी ने बताया कि गांव के लोगों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने भी अपने ससुर से जमीन देने का आग्रह किया था. अलवा देवी ने बताया कि लोगों को काफी दिक्कत हो रही थी. सड़क निर्माण के लिए जमीन दान देने की बात कही थी, हमने भी ससुर से इसके लिए प्रार्थना की थी.

250 मीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य शुरू
हाजरा परिवार के इस फैसले का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है. करीब 250 मीटर लंबी सड़क का निर्माण शुरू हो गया है. सड़क पूरी होने के बाद गांव तक वाहनों की पहुंच आसान होगी. सबसे बड़ी राहत उन लोगों को मिलेगी, जिन्हें आज तक मरीजों को उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता था.
अब होगी परेशानी दूर
स्थानीय महिला अंजु देवी बताती है कि सड़क बनना शुरू हो गया है, इससे हम लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी. पहले मरीजों को कंधे पर उठाकर और गोद में लेकर जाना पड़ता था, गांव तक वाहन नहीं पहुंचते थे. 1 अब सारी परेशानी दूर होने वाली है.
ग्रामीणों ने दोनों भाईयों के काम की सरहाना की
ग्रामीण राजकुमार पासवान भी इसे समाज के लिए एक अच्छा काम मानते हैं. उनका कहना है कि जमीन दान देकर हाजरा परिवार ने गांव ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक मिसाल पेश की है. जमीन दान देकर समाज के लिए एक अच्छा काम किया है, इससे गांव के लोगों को काफी फायदा मिलेगा.

जिला पंचायत प्रतिनिधि एजाज अहमद ने भी दोनों भाइयों की पहल की सराहना की है. उन्होंने बताया कि सड़क नहीं रहने के कारण मरीजों को खाट पर ले जाने की मजबूरी थी, ऐसे में गांव के विकास के लिए जमीन दान करना सराहनीय होने के साथ-साथ पुण्य का काम भी है.
उन्होंने आगे बताया कि यह काफी सराहनीय कदम है. सड़क नहीं रहने के कारण मरीजों को खाट पर ले जाना पड़ता था, गांव के विकास के लिए कोई अपनी जमीन दान करता है, तो यह पुण्य का काम भी है.

मंझलाडीह गांव के प्रहलाद हाजरा और प्रशुराम हाजरा ने करीब 10 लाख रुपये मूल्य की पांच डिसमिल जमीन सड़क के लिए दान कर यह साबित किया है कि समाज में बदलाव सिर्फ बड़ी घोषणाओं से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी कुर्बानियों से भी आता है, उनकी यह पहल न सिर्फ गांव के लिए सड़क बनाएगी, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक मिसाल छोड़ेगी, जो अपनी संपत्ति को सिर्फ निजी अधिकार नहीं, बल्कि समाज के काम आने वाला साधन मानते हैं.
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