ETV Bharat / bharat

ट्विशा शर्मा केस: सास गिरिबाला सिंह को बड़ा झटका, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रद्द की अग्रिम जमानत

जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा, ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और मौजूद साक्ष्यों का सही से परीक्षण नहीं किया. मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपी पक्ष को राहत देना ठीक नहीं था.

TWISHA SHARMA DEATH CASE
पूर्व जज गिरिबाला सिंह अग्रिम जमानत खारिज (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : May 28, 2026 at 7:26 AM IST

|

Updated : May 28, 2026 at 7:51 AM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा की मौत को गंभीर मानते हुए ट्विशा की सास और पूर्व न्यायधीश गिरिबाला सिंह की अंतिरिम जमानत को रद्द कर दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि निचली अदालत ने जल्दबाज़ी मे गिरिबाला सिंह को जमानत दे दी. उच्च न्यायलय ने अपने फैसले मे कहा कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपी पक्ष को राहत देना ठीक नहीं था. कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए.

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और मौजूद साक्ष्यों का सही से परीक्षण नहीं किया

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और मौजूद साक्ष्यों का सही से परीक्षण नहीं किया. मृतका ट्विशा के शरीर पर फांसी के अलावा अन्य चोटों के निशान पाए गए थे, जिनका संतोषजनक जवाब आरोपी पक्ष नहीं दे सका. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया. साथ ही मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की गई, जिसे जांच को प्रभावित करने वाला व्यवहार माना जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि अब मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है, इसलिए जांच एजेंसी को पक्षकार बनाया जाना जरूरी है.

हाईकोर्ट जस्टिस देव नारायण मिश्रा ने अपने आदेश में कहा कि यह ज़रूरी है कि बेल कैंसल करने के लिए “ठोस और भारी कारण” मौजूद हों. जमानत तभी कैंसल की जा सकती है जब कोर्ट ने गैर-ज़रूरी बातों पर विचार किया हो या रिकॉर्ड पर मौजूद ज़रूरी चीज़ों को नज़रअंदाज़ किया हो. जिससे जमानत देने का आदेश कानूनी तौर पर नामंज़ूर हो जाता है.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मृतका के शरीर पर फांसी के अलावा भी कई चोटों के निशान मिले थे. मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं. अदालत ने इसे मामले का महत्वपूर्ण पहलू मानते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की गहन जांच जरूरी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्विशा शर्मा के परिवार और अन्य गवाहों के बयानों में साफ आरोप लगाए गए हैं कि पति और सास उस पर एबॉर्शन का दबाव बना रहे थे. इसके अलावा दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के आरोप भी सामने आए हैं.

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने यह मान लिया था कि केवल विवाह के सात साल के भीतर हुई मौत के आधार पर अग्रिम जमानत खारिज नहीं की जा सकती। निचली अदालत ने यह भी माना था कि आरोपी पक्ष ट्विशा के खाते में पैसे भेजता था और व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य शिकायत पति के खिलाफ दिखाई देती है। इन्हीं आधारों पर अग्रिम जमानत दी गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और साक्ष्यों की गहराई से जांच करने पर अलग तस्वीर सामने आती है.

हाईकोर्ट की दलील

  1. मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देना उचित नहीं था.
  2. ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और साक्ष्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया.
  3. आरोपी पक्ष चोटों के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया.
  4. जांच में पूरा सहयोग नहीं किया गया.
  5. मीडिया में बयान देकर मृतका की छवि प्रभावित करने की कोशिश की गई.
  6. पोस्टमॉर्टम में फांसी के अलावा अन्य चोटों के निशान मिले.
  7. गवाहों ने गर्भपात के दबाव और दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए.
  8. अग्रिम जमानत केवल विशेष परिस्थितियों में दी जानी चाहिए.

आखिर में हाईकोर्ट ने क्या कहा?

अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य, मामले की गंभीरता और जांच की मौजूदा स्थिति को देखते हुए 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत न्यायोचित नहीं थी. इसके साथ ही अदालत ने 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा पारित अग्रिम जमानत आदेश को निरस्त कर दिया और दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं.

CBI और राज्य सरकार की दलीलें, गर्भावस्था के बाद पति और सास ने ट्विशा के चरित्र पर संदेह जताया

गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया, जिसका उल्लेख व्हाट्सऐप चैट्स में है. ट्विशा लगातार परिवार को मानसिक प्रताड़ना की जानकारी दे रही थी. आरोपी प्रभावशाली हैं और जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी है.

Last Updated : May 28, 2026 at 7:51 AM IST