तृणमूल में टूट ! भाजपा बोली, 'ममता अंटार्कटिका में विरोध करें या किसी रेगिस्तान में, कोई फर्क नहीं पड़ेगा'
तृणमूल के कई विधायकों में अंसतोष की खबरें. निशाने पर अभिषेक बनर्जी हैं. भाजपा ने अपनी स्थिति साफ कर दी है.

Published : June 2, 2026 at 1:32 PM IST
|Updated : June 2, 2026 at 2:00 PM IST
कोलकाता : क्या तृणमूल कांग्रेस में टूट होगी ? ये सवाल बार-बार मीडिया में उठा रहा है. दरअसल, टीएमसी के ही एक पूर्व नेता ने ऐसा दावा किया है. उनका कहना है कि टीएमसी के अधिकांश विधायक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ हैं, लिहाजा बहुत संभव है कि प.बंगाल में भी "महाराष्ट्र मॉडल" लागू हो सकता है.
महाराष्ट्र मॉडल का मतलब है कि पार्टी में टूट और बड़ा धड़ा एक अलग गुट के रूप में मान्यता पा सकता है. अब वह सत्ताधारी दल के साथ होंगे या विरोध में रहेंगे, अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है. वैसे, प.बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि किसी भी दागी टीएमसी नेता को भाजपा में शामिल नहीं किया जाएगा.
टीएमसी से निलंबित चल रहे नेता रिजू दत्ता ने कहा, "टीएमसी के दो विधायकों, ऋतब्रता बंदोपाध्याय और संदीपान साहा ने स्पीकर को पत्र लिखकर दावा किया कि उनके हस्ताक्षर जाली हैं. यह सुनकर तृणमूल कांग्रेस ने इन दोनों विधायकों को निष्कासित कर दिया. चूंकि मैंने भी कई वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस में काम किया है, इसलिए मुझे खबर मिली और कुणाल घोष ने भी प्रेस में बताया कि ऋतब्रता बंदोपाध्याय के नेतृत्व में लगभग 50 तृणमूल कांग्रेस विधायक एक होटल में मिले. उन्होंने फोन पर भी बात की और शाम को विधायक छात्रावास में कई विधायकों के साथ बैठक की. आज वे एकजुट होकर विधानसभा स्पीकर से मिलेंगे और तीन मुख्य मुद्दे उठाएंगे. पहला, हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है. लगभग 50 विधायक हमारे साथ हैं. हम असली तृणमूल कांग्रेस हैं. दूसरा, चूंकि हम असली तृणमूल कांग्रेस हैं, इसलिए विपक्ष के नेता ऋतब्रता बंदोपाध्याय होंगे, न कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय. तीसरा, हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है, इसलिए यह चिन्ह. यह हमारा होना चाहिए. शिवसेना महाराष्ट्र मॉडल फिलहाल बंगाल में लागू है. मैं दो बहुत महत्वपूर्ण बातें कहना चाहता हूं. पहली बात, अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदारी लेनी होगी. जिन लोगों को अभिषेक बनर्जी ने हाथ पकड़कर इस पार्टी में लाया, उन्होंने पार्टी को धोखा दिया है. तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी को भी जिम्मेदारी लेनी होगी, जो मैंने 8 और 9 तारीख को कहा था, आज वे वही बात कह रहे हैं: वे आई-पीएसी से नाराज हैं. वे अभिषेक बनर्जी से नाराज हैं."
रिजु दत्ता कहते हैं, "पार्टी सिर्फ एक पोस्टर बनकर रह जाएगी. दीदी, अभिषेक बनर्जी और उनके कुछ पुराने वफादार दिग्गज विधायक ही बचेंगे. अगर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं का साथ नहीं देगी, तो कार्यकर्ता पार्टी का साथ क्यों देंगे? यह पहला मुद्दा है. दूसरा, दीदी अभिषेक के प्रति पूरी पार्टी के गहरे असंतोष को समझ नहीं पाईं. अब दीदी को इन सभी मुद्दों का समाधान करना होगा."
अब सवाल ये है कि क्या टीएमसी के एमएलए भाजपा के साथ जाएंगे या फिर उन्हें भाजपा का साथ मिलेगा ? पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने इसका सीधा जवाब दिया है. उन्होंने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी टीएमसी के नेताओं को शामिल नहीं करेगी.
उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा ने अपनी ताकत जमीनी स्तर से खड़ी की है और वह "दागी" लोगों को शामिल नहीं करेगी. उन्होंने आगे कहा, "भाजपा का तृणमूलकरण कभी नहीं होगा." भट्टाचार्य ने कहा, "टीएमसी के लिए हमारे दरवाजे बंद हैं. हमने बिना किसी को बाहर से लाए 207 सीटें जीतीं. जनता ने टीएमसी के नेताओं के खिलाफ वोट दिया. इस बार हमारी राजनीतिक रणनीति निचले स्तर से शुरू हुई है. हम दागी लोगों को अपनी पार्टी में कैसे शामिल कर सकते हैं? भाजपा का तृणमूलकरण कभी नहीं होगा."
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आज कोलकाता में हुए विरोध प्रदर्शन पर व्यापक हमला बोलते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि टीएमसी अब खुद के ही खिलाफ हो गई है. उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने पार्टी को नकार दिया है और उनके लिए खेल खत्म हो गया है. उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी को विरोध प्रदर्शन नहीं करने देगी. टीएमसी सड़कों पर उतरकर जनता का सामना करने की स्थिति में नहीं है."
उन्होंने कहा, "पूर्व मुख्यमंत्री के अदालत जाने पर क्या हुआ, यह सभी जानते हैं. अब टीएमसी खुद टीएमसी के खिलाफ है. ममता बनर्जी ध्यान भटकाने के लिए दिल्ली की बात कर रही हैं. वह दिल्ली आ सकती हैं, अंटार्कटिका जा सकती हैं या रेगिस्तान जा सकती हैं. वह कुछ भी कर सकती हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल की जनता ने टीएमसी को नकार दिया है. खेल खत्म हो गया है."
दलबदल की अटकलों के बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने इस बात पर बल दिया कि पार्टी के अधिकांश विधायक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ रहेंगे और यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व संगठन पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा. चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल की ओर से दलबदल कराने और विपक्षी पार्टी को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही हैं.
मीडिया में खबरें हैं कि निष्कासित विधायक रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल विधायकों का एक समूह अलग हो सकता है. बागी विधायकों की कोलकाता के एक होटल और विधायक हॉस्टल में बैठक करने की खबरों से पिछले कुछ दिनों से राज्य के राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है.
हालांकि इन खबरों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अटकलें हैं कि बागी खेमे के संपर्क में रहने वाले विधायकों की संख्या 20 से 50 के बीच हो सकती है. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने 294 में से 80 सीट जीती थीं.
तृणमूल कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष के तौर पर नामित किए गए चट्टोपाध्याय ने कहा, ‘‘सरकार के भारी दबाव के चलते कुछ लोग जाली हस्ताक्षरों के बारे में बयान देने के लिए मजबूर हो रहे हैं. कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सत्तापक्ष द्वारा धनबल के इस्तेमाल के कारण तृणमूल के खिलाफ जाने की कोशिश कर रहे हैं. हम लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं.’’
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