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रांची में आदिवासी एकता महाजुटान रैली में बंधु तिर्की ने भरी हुंकार, बोले- हमारा हक छीनने की कोशिश हुई तो कर देंगे ठीक

रांची में आदिवासी एकता महाजुटान रैली आयोजित की गई. जिसमें विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए. उपेंद्र कुमार की रिपोर्ट.

Tribal Unity Grand Rally
आदिवासी एकता महाजुटान रैली (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : August 30, 2026 at 6:45 PM IST

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रांची: झारखंड में परिसीमन के बाद जनजातीय समुदाय के लिए लोकसभा एवं विधानसभा की सीटों में कमी की संभावना, जनगणना में अलग सरना धर्म कोड, MMDR संशोधन बिल, 2026 वापस लेने जैसे मांगों को लेकर विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा बुलाये गए आदिवासी एकता महाजुटान रैली में संयोजक और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा.

झारखंड को नागपुर बनाना चाहते हैं: बंधु तिर्की

रांची में हजारों की संख्या में अलग-अलग जिलों से आए जनजातीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए बंधु तिर्की ने बताया कि ये RSS-BJP वाले झारखंड को नागपुर बनाना चाहते हैं लेकिन यह बिरसा मुंडा की धरती है, यहां अगर हमारा हक अधिकार छीना गया, तो हम आंख-कान ठीक कर देंगे.

आदिवासी एकता महाजुटान रैली (Etv Bharat)

बंधु तिर्की ने केंद्र को लिया आड़े हाथ

बंधु तिर्की ने अपने विरोधियों को संबोधित करते हुए कहा कि आंख खोल कर देख लो, यह 'ईसाई आदिवासियों' की रैली नहीं बल्कि सभी आदिवासी समाज की रैली है. बंधु तिर्की ने बताया कि केंद्र सरकार को अलग सरना धर्म कोड देना ही होगा और MMDR संशोधन बिल, 2026 वापस लेना ही होगा. उन्होंने रैली के माध्यम से केंद्र को चेताते हुए बताया कि यदि हमारी सीट घटी तो भाजपा की ईंट से ईंट बजा देंगे.

आदिवासियों का ख्याल रखती रही है कांग्रेस: के. राजू

वहीं प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा कि कांग्रेस शुरू से जनजातीय समुदाय के विचारों का ख्याल रखती रही है. पार्टी नेता कहते हैं कि आदिवासियों का जल, जंगल और जमीन पर हक है और उसी पर हमारे नेता काम कर रहे हैं.

हमारे हक और अधिकार को दूर करने की कोशिश: मंत्री नेहा शिल्पी तिर्की

इधर, कृषि मंत्री नेहा शिल्पी तिर्की ने कहा कि 2007 में कांग्रेस ने झारखंड में परिसीमन नहीं किया और विधानसभा एवं लोकसभा में आदिवासियों का आरक्षण सुरक्षित रहा लेकिन अब आदिवासियों के हक और अधिकार को दूर करने की कोशिश हो रही है, इसका विरोध हम करेंगे.

आदिवासियों को पतन करने की रही है रणनीति: कालीचरण मुंडा

रैली में पहुंचे कांग्रेस सांसद कालीचरण मुंडा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि इनकी रणनीति देश से आदिवासियों को पतन करने की रही है, जबकि हमारे नेता कहते हैं कि यह देश आदिवासियों का है, ऐसे में हमें जागना होगा, परिसीमन से हमारी सीट बढ़ना चाहिए, ना की घटना चाहिए.

Tribal Unity Grand Rally
आदिवासी एकता महाजुटान रैली में भारी संख्या में पहुंचे आदिवासी (Etv Bharat)

देश का पहला नागरिक आदिवासी: राजेश कच्छप

कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप ने कहा कि इस देश का पहला नागरिक कोई है तो वह आदिवासी है. संसद के अंदर और बाहर राहुल गांधी कह रहे हैं कि आदिवासी, इस देश का मूल निवासी है. झारखंड के जनजातीय समुदाय को जानना होगा कि परिसीमन है क्या और कैसे डिलिमिटेशन से हमारा नुकसान होगा. राजेश कच्छप ने बताया इस लड़ाई को जीतने के लिए हमें एकजुट रहना होगा.

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि आज की तारीख में RSS और BJP वाले आदिवासियों को हटाने और भगाने का काम कर रहे हैं.
राज्य में 1951 के जनगणना के आधार पर परिसीमन करके दिखाए. संघर्ष सड़क से सदन तक जारी रहेगा. अगर अन्य के लिए 50% सीट बढ़ाने की सोच रहे हैं तो जनजातीय आरक्षित सीटों को भी 50% बढ़ाना होगा.

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आदिवासी एकता महाजुटान रैली (Etv Bharat)

ये परिसीमन की लड़ाई: विक्रांत भूरिया

आदिवासी संगठनों द्वारा रैली में मध्य प्रदेश के झाबुआ विधानसभा से विधायक और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने आदिवासियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि बीजेपी वाले हमें आदिवासी नहीं बल्कि वनवासी कहते हैं. विक्रांत भूरिया ने बताया कि हमारी राजनीतिक ताकत कम करने की कोशिश, केंद्र की मोदी सरकार कर रही है लेकिन ऐसा काम जनजातीय समुदाय नहीं होने देगा क्योंकि यह उलगुलान की लड़ाई है. हम लड़ेंगे पीछे नहीं हटेंगे.

झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया ने आगे बताया कि सब मिलकर लड़ेंगे, तभी हमें हमारा अधिकार मिलेगा. उन्होंने कहा कि मैं मध्य प्रदेश से यहां आया हूं और वही से पेसा कानून बना था.

Tribal Rally in Jharkhand
आदिवासी एकता महाजुटान रैली (Etv Bharat)

2007 में भी आपसी एकता से रोका था परिसीमन: विकास सिंह मुंडा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रतिनिधि के रूप में शामिल झामुमो विधायक विकास सिंह मुंडा ने कहा कि आज का दिन आदिवासी समाज के लिए बड़ा दिन है. 2007 में भी इसी तरह आपसी एकता से परिसीमन रोका था लेकिन आज 28 विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति आरक्षित है और अब इसे बढ़ाने की लड़ाई है. झामुमो सांसद ने कहा कि असम में परिसीमन से आदिवासियों को नुकसान पहुंचा है.

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