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35 बैलगाड़ी पर निकली बारात, बिहार की इस शादी ने जीता हर किसी का दिल

बिहार की बैलगाड़ी वाली बारात ने सभी का दिल जीत लिया है. जब 70 बैलों से सजी हुई 35 बैलगाड़ियों पर बाराती सवार होकर निकले.

SAMASTIPUR BULLOCK CART WEDDING
समस्तीपुर में बैलगाड़ी वाली बारात (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 26, 2026 at 2:14 PM IST

4 Min Read
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रिपोर्ट: अमित कुमार

समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर शहर में 25 फरवरी को एक ऐसी बारात निकली, जिसने आधुनिक युग में प्राचीन परंपरा को जीवंत कर दिया. सड़कों पर न तो लग्जरी कारों की कतार दिखी और न ही डीजे की तेज धुन. इसके बजाय बैलों की सधी हुई चाल और बैलगाड़ियों की मद्धिम चरमराहट के साथ लोक गीतों और शहनाई की मधुर तान सुनाई दी. लोगों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल में कैद किया, क्योंकि नई पीढ़ी के लिए यह दृष्य खास था.

हर तरफ देसी थीम वाली शादी की चर्चा: इस अनोखी बारात की चर्चा देखते ही देखते वायरल हो गई. दरअसल समस्तीपुर जिले के मगरदही घाट निवासी प्रदीप सेठ के बेटे आलोक कुमार की शादी थी. बारात जिले के रोसड़ा इलाके के गजराज पैलेस तक जानी थी. ऐसे में परिवार ने शादी को पर्यावरण के अनुकूल (Eco-Friendly) और प्राचीन सभ्यता को अपनाने का फैसला किया. बारात 35 बैलगाड़ियों के साथ पारंपरिक वेशभूषा में निकली. बैलगाड़ियों को सजाया गया और लोकगीत की भी व्यवस्था थी.

बैलगाड़ी पर निकली बारात (ETV Bharat)

''हम लोगों ने शादी को खास बनाना चाहते थे, कुछ अलग करना चाहते थे. लेकिन ऐसी उम्मीद नहीं थी, मेरी शादी इतनी खास हो जाएगी.'' - आलोक कुमार, दूल्हा

शाही अंदाज में सजी बैलगाड़ियां और दूल्हे की घोड़ी: बारात में बैलगाड़ियों पर सोफे और गद्दे बिछाए गए थे, जिस पर बैठकर बाराती शाही सवारी का मजा ले रहे थे. दूल्हा आलोक घोड़े पर सवार होकर आगे-आगे चल रहा था. शाम ढलते ही बारात स्वर्ग होटल से निकली और बाजार समिति स्थित गजराज पैलेस की ओर बढ़ी. रास्ते में लोग डांस करते नजर आए, जबकि बैलगाड़ियों पर बैठे बाराती इस अनोखे अनुभव का लुत्फ उठा रहे थे. गजराज पैलेस पहुंचते ही हर किसी की जुबान पर इस प्राचीन शैली वाली शादी की तारीफ थी.

SAMASTIPUR BULLOCK CART WEDDING
बैलगाड़ी वाली बारात ने सभी का दिल जीता (ETV Bharat)

पशु प्रेमी महेंद्र प्रधान का अनोखा विचार: इस देसी थीम को तैयार करने वाले पशु प्रेमी व दूल्हे के चाचा महेंद्र प्रधान ने बताया कि सोनपुर मेले में नियमित कार्यक्रम करने के कारण उनका मन बैलगाड़ी वाली बारात का विचार आया. उन्होंने कहा, "आजकल महंगी गाड़ियों से बारात निकलती है, लेकिन युवा पीढ़ी नहीं जानती कि प्राचीन काल में बैलगाड़ी से कैसे बारात जाती थी. इसे पुनर्जीवित करने और प्रदूषण मुक्त संदेश देने के लिए यह फैसला लिया. बारात स्वर्ग होटल से गजराज पैलेस तक गई, जिसमें कोई पेट्रोल-डीजल नहीं जला."

SAMASTIPUR BULLOCK CART WEDDING
35 सजी हुई बैलगाड़ियां (ETV Bharat)

प्रदूषण मुक्त बारात का संदेश: महेंद्र प्रधान ने जोर दिया कि वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण फैलाता है, लेकिन बैलगाड़ी वाली बारात पूरी तरह प्रदूषण मुक्त थी. करोड़ों की कारों वाली बारातों को लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इस बारात को देखने के लिए भारी भीड़ जुट गई. लोगों ने मोबाइल से वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर शेयर किए. कुल 35 बैलगाड़ियों में 70 बैल जुते थे, जो इस आयोजन की भव्यता को दर्शाता है.

"स्वर्ग होटल के मालिक प्रदीप सेठ के बेटे आलोक की शादी है. 35 बैलगाड़ियों में सवार बारात मथुरापुर जा रही है. मैं लड़के का चाचा हूं, लेकिन ऐसा नजारा सालों पहले देखा था, जब बैलगाड़ी से बारात जाया करती थी." - महेंद्र प्रधान, दूल्हे के चाचा

SAMASTIPUR BULLOCK CART WEDDING
पर्यावरण-अनुकूल शादी (ETV Bharat)

लोगों में पुराने दौर की यादें ताजा: बारात देखने वाले लोगों ने कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे 80 के दशक का दौर लौट आया हो. रामाशीष राय जैसे गाड़ीवान ने उत्साह से बताया. उन्होंने कहा कि "प्रधान जी के यहां बैलगाड़ी से रोसड़ा बारात जा रही है. सालों बाद एक बार फिर जैसे वो दौर लौट आया है. बारात को देखकर शहरवासी भी आज खुद को प्राचीन काल में पहुंचा हुआ महसूस कर रहे है.''

पर्यावरण और संस्कृति का अनूठा मेल: यह बारात न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही थी, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत कर रही थी. आलोक और उनके परिवार का यह प्रयास दूसरों के लिए प्रेरणा बन गया है. ऐसे आयोजन आधुनिकता के बीच परंपराओं को जीवित रखने का बेहतरीन उदाहरण हैं.

SAMASTIPUR BULLOCK CART WEDDING
पशु प्रेमी हैं दूल्हे के चाचा (ETV Bharat)

सोशल मीडिया पर वायरल: इस बैलगाड़ी बारात के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. लोग इसे अनोखा और यादगार बता रहे हैं. समस्तीपुर में यह शादी लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी, जो पर्यावरण जागरूकता और सांस्कृतिक गौरव दोनों को बढ़ावा देती है.

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