मसूरी में टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों पर सवाल, 10 महीने में सिर्फ 1.16 लाख पंजीकरण, वास्तविक संख्या पर प्रश्न
अनूप नौटियाल ने कहा- क्या रजिस्ट्रेशन व्यवस्था मसूरी पहुंचने वाले वास्तविक पर्यटकों का एक छोटा हिस्सा दर्ज कर रही धीरज सजवाण की रिपोर्ट

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 22, 2026 at 5:21 PM IST
|Updated : August 22, 2026 at 5:27 PM IST
देहरादून: मसूरी में पर्यटकों की वास्तविक संख्या और टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों के बीच बड़े अंतर ने शहर की कैरिंग कैपेसिटी के आंकड़ों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरटीआई लगाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने जहां आंकड़ों पर हैरानी जताई है, वहीं पर्यटन सचिव ने कैमरों से जुटाए जा रहे वाहन डाटा को विश्वसनीय बताया है.
मसूरी में टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों पर बड़ा सवाल: उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल मसूरी में टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों को लेकर अब सवाल खड़े हो गए हैं. सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल की ओर से आरटीआई के जरिए प्राप्त जानकारी के मुताबिक अगस्त 2025 से मई 2026 तक 10 महीने में मसूरी में सिर्फ 1 लाख 16 हजार 8 पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन हुआ. खास बात यह है कि इसी अवधि में मसूरी में वीकेंड, छुट्टियों, त्योहारों और गर्मियों के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही रही. ऐसे में रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों और वास्तविक पर्यटक संख्या के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
10 महीने में सिर्फ 1.16 लाख रजिस्ट्रेशन: आरटीआई से मिले माहवार आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2025 में 27,349, सितंबर में 5,876, अक्टूबर में 8,571, नवंबर में 6,134, दिसंबर में 9,346, जनवरी 2026 में 4,983, फरवरी में 3,003, मार्च में 4,759, अप्रैल में 20,731 और मई में 25,256 पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन दर्ज हुआ. इस तरह 10 महीनों में कुल 1,16,008 पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन हुआ.

सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने आरटीआई से किया खुलासा: सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई से जानकारी हासिल करने वाले अनूप नौटियाल का कहना है कि-
इन आंकड़ों से यह सवाल उठता है कि क्या रजिस्ट्रेशन व्यवस्था मसूरी पहुंचने वाले वास्तविक पर्यटकों का एक छोटा हिस्सा ही दर्ज कर रही है. हमने मौजूदा आंकड़ों के आधार पर अनुमान जताया है कि संभव है कि वास्तविक पर्यटकों में से केवल 5 से 10 प्रतिशत का ही रजिस्ट्रेशन हो रहा हो. स्पष्ट किया है कि इस अनुमान का मौजूदा रजिस्ट्रेशन सिस्टम के आधार पर सत्यापन किया जाना जरूरी है.
-अनूप नौटियाल, आरटीआई लगाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता-
एनजीटी के हस्तक्षेप के बाद शुरू हुआ कैरिंग कैपेसिटी का आकलन: दरअसल, मसूरी में टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था जनवरी 2023 में जोशीमठ भू-धंसाव संकट के बाद एनजीटी के हस्तक्षेप के पश्चात शुरू हुई थी. इसका उद्देश्य मसूरी की वैज्ञानिक कैरिंग कैपेसिटी का आकलन करना और उसी के अनुरूप पर्यटन गतिविधियों का प्रबंधन करना था. इसके बाद राज्य सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति का गठन किया था. समिति को मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी का आकलन करने और निवारक एवं सुधारात्मक उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई थी.

एनजीटी में सरकार ने ये रिपोर्ट पेश की थी: राज्य सरकार की ओर से 24 जुलाई 2023 को एनजीटी में प्रस्तुत रिपोर्ट में मसूरी के लिए 18 निवारक और सुधारात्मक उपायों की पहचान की गई थी. ऐसे में मसूरी में आने वाले पर्यटकों की वास्तविक संख्या का सटीक डाटा कैरिंग कैपेसिटी तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है. आरटीआई के आंकड़ों को लेकर सबसे बड़ा सवाल जनवरी से मई की अवधि के आंकड़ों से उठ रहा है.

राज्य सरकार की रिपोर्ट में तीन गुना ज्यादा पर्यटक पहुंचे मसूरी: राज्य सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी से मई 2022 के बीच 3,78,037 पर्यटकों ने मसूरी का दौरा किया था. वहीं जनवरी से मई 2026 के बीच आरटीआई के अनुसार सिर्फ 58,732 पर्यटकों का रजिस्ट्रेशन हुआ. यानी दोनों आंकड़ों में बड़ा अंतर है. अनूप नौटियाल का कहना है कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद मसूरी में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए रजिस्ट्रेशन व्यवस्था की तत्काल समीक्षा जरूरी है.
पर्यटन सचिव का बयान: हालांकि, पर्यटन विभाग इन आंकड़ों को लेकर अलग तस्वीर पेश कर रहा है. पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल का कहना है कि-
मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी का निर्धारण सिर्फ पर्यटन विभाग का विषय नहीं है. हर विभाग की अपनी भूमिका है. पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना है और विभाग इसी दिशा में लगातार काम कर रहा है.
-धीराज सिंह गर्ब्याल, सचिव, पर्यटन-
पर्यटन सचिव ने बताया कैसे जुटाया आंकड़ा: धीराज गर्ब्याल के मुताबिक मसूरी में वास्तव में कितने लोग प्रवेश कर रहे हैं, इसका डाटा जुटाने के लिए पर्यटन विभाग को काम करने को कहा गया था. इसके तहत शहर में अलग-अलग स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए मसूरी में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले वाहनों का डाटा जुटाया जा रहा है. पर्यटन सचिव का कहना है कि कैमरों से जुटाया जा रहा यह डाटा गलत नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह प्रत्यक्ष रूप से वाहनों की आवाजाही के आधार पर तैयार हो रहा है.

ऐसे में मसूरी में टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों और कैमरों से जुटाए जा रहे वाहन डेटा के बीच तालमेल महत्वपूर्ण हो जाता है. एक तरफ आरटीआई के आंकड़े रजिस्ट्रेशन व्यवस्था की पहुंच पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ पर्यटन विभाग कैमरा आधारित डेटा को वास्तविक पर्यटक दबाव का बेहतर आधार मान रहा है.

आंकड़ों के वैज्ञानिक मिलान की जरूरत: अब जरूरत इस बात की है कि इन दोनों तरह के आंकड़ों का वैज्ञानिक तरीके से मिलान किया जाए, ताकि मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी और पर्यटन प्रबंधन के लिए सही तस्वीर सामने आ सके. अनूप नौटियाल का कहना है कि-
अधूरे या कम रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के आधार पर सड़कों, ट्रैफिक, पार्किंग, जलापूर्ति, कचरा प्रबंधन, आवास और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ने वाले दबाव का सही आकलन नहीं किया जा सकता. ऐसे में मसूरी के लिए प्रभावी और वैज्ञानिक पर्यटन प्रबंधन की दिशा में विश्वसनीय डेटा सबसे अहम कड़ी बन गया है.
-अनूप नौटियाल, आरटीआई लगाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता-
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